लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी पीएनसी ने MP में किया अवैध खनन, 104 करोड़ का लगा है जुर्माना
पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड पर झांसी-खजुराहो फोरलेन निर्माण के दौरान सरकारी भूमि से अवैध खनन का आरोप है। छतरपुर में 367 करोड़ के राजस्व नुकसान के बाद कंप ...और पढ़ें

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी पीएनसी अवैध खनन में फंसी।
HighLights
पीएनसी पर झांसी-खजुराहो फोरलेन में अवैध खनन का आरोप।
छतरपुर में 367 करोड़ के राजस्व नुकसान का मामला।
कंपनी पर 104 करोड़ का जुर्माना, अपील लंबित।
जागरण संवाददाता, आगरा। न नियमों की परवाह और न ही कार्रवाई का डर। झांसी-खजुराहो फोरलेन एक्सप्रेसवे के निर्माण में पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड ने खेल किया है। वर्ष 2020 से 2024 के मध्य सरकारी भूमि से अधिक मिट्टी की खोदाई की गई। इसी तरह से मौरंग का भी बिना अनुमति उत्खनन किया गया।
अवैध खनन के चलते छतरपुर, मध्य प्रदेश जिला प्रशासन को 367 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ था। लगातार शिकायतें मिलने पर तत्कालीन डीएम संदीप जीआर ने पीएनसी पर 104 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। डीएम के आर्डर के खिलाफ कमिश्नर कोर्ट में अपील की गई जहां वर्तमान में वाद की सुनवाई चल रही है। अवैध खनन पर अभी तक जुर्माना बरकरार है।
झांसी-खजुराहो फोरलेन का निर्माण पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड ने किया है। यह फोरलेन छतरपुर, मध्य प्रदेश में बना है। वर्ष 2020 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। नौ मई 2020 को तत्कालीन डीएम शीलेंद्र सिंह से किसानों ने मुलाकात की थी।
किसानों ने नौगांव के करारागंज में सरकारी भूमि में अवैध खनन और मौरंग के खनन की शिकायत की थी। 15 मई को डीएम ने नौगांव के एसडीएम राजस्व से इसकी रिपोर्ट मांगी थी। जिस पर लेखपाल ने मौके का निरीक्षण किया।
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तीन जुलाई को जांच में पाया कि 2.45 करोड़ घनमीटर से अधिक मिट्टी और मौरंग का खनन किया गया है। सरकारी रेट के हिसाब से 367 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ है। खनन निरीक्षक अशोक ने अवैध खनन का केस डीएम कोर्ट में पेश किया था। नौगांव तहसील के करारागंज गांव की भूमि चारागाह श्रेणी की है।
खसरा नंबर 2908/1/1 में पांच हेक्टेयर भूमि है। खसरा नंबर 1507 में एक हेक्टेयर, खसरा नंबर 2650 में 2.14 हेक्टेयर, खसरा नंबर 1677 में .46 हेक्टेयर का तालाब था। इन सभी से पीएनसी द्वारा मिट्टी और मौरंग का खनन किया था। दो साल तक यह रिपोर्ट दस्तावेजों में दबी रही।
मार्च 2024 में तत्कालीन डीएम संदीप जीआर ने पीएनसी पर लगे जुर्माना वाद की सुनवाई की। डीएम कोर्ट ने 104 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। एक माह में जुर्माना राशि अदा करने के आदेश दिए थे।
छतरपुर के जिला खनन अधिकारी अमित मिश्रा ने बताया कि डीएम कोर्ट के आदेश के खिलाफ पीएनसी इंफ्राटेक ने कमिश्नर कोर्ट में अपील की थी। कमिश्नर कोर्ट में वाद लंबित है। जुर्माना राशि अभी भी बरकरार है।
एनएचएआई ने लगाई रोक, राज्यों में पीएनसी को मिले ठेके
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने हाल ही में पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड पर एक साल के लिए नए ठेके लेने पर रोक लगाई थी लेकिन उसी अवधि में महाराष्ट्र सहित अन्य कई राज्यों में पीएनसी को आसानी से करोड़ों रुपये के ठेके मिले हैं।
सेवानिवृत्त इंजीनियर टीके शर्मा ने बताया कि एनएचएआई ने किसी संस्था को ठेका देने पर रोक लगा दी है तो अन्य विभागों में ठेके नहीं मिलने चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। इसकी ठीक तरीके से जांच होनी चाहिए। इसमें कई विभागीय अधिकारी फंस सकते हैं। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को ठोस कदम उठाना चाहिए।