अपनों ने ही छोड़ दिया... बेटे-बहू ने बुजुर्गों को घर से निकाला, 7 दिन में 14 लोगों ने लिया वृद्धाश्रम में आश्रय
बेटे-बहू ने सीताराम और राजकुमारी जैसे कई बुजुर्गों को घर से निकाल दिया या छोड़ दिया। आश्रम अध्यक्ष शिव शर्मा ने बताया कि ऐसे मामलों में काउंसलिंग कर स ...और पढ़ें

वृद्धाआश्रम में मौजूद बुजुर्ग।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, आगरा। रुनकता के रहने वाली 65 वर्षीय सीताराम को उन्हीं के बेटे और बहू ने गाली-गलौज कर धक्केमार कर घर से बाहर निकाल दिया। घर में तीन बेटे और दो बेटियां हैं। किसी का दिल नही पसीजा और बुजुर्ग माता-पिता को बेइज्जत कर घर से निकाल दिया।
लुधियाना चले गए बहू और बेटा
वहीं ताजगंज क्षेत्र की रहने वाली 70 वर्षीय राजकुमारी का बेटा और बहू उन्हें छोड़कर लुधियाना चले गए। जिन लोगों के पास उन्हें छोड़ गए,उन लोगों ने मारपीट की और पैसे मांगे। तंग आकर राजकुमारी ने घर छोड़ दिया। कुछ दिनों तक भीख मांगकर गुजारा किया, अंत में वृद्धाश्रम का सहारा लेना पड़ा।
कोरोना में खाेया एक बेटा, अब दूसरे बेटे ने साथ नहीं दिया
ताजगंज शहीद नगर की रहने वाली 70 वर्षीय राजकुमारी कोरोना काल में अपने बेटे को खो चुकी हैं । उम्र के इस पड़ाव पर पति ने भी साथ नहीं दिया। दूसरे बेटे ने भी उन्हें साथ नहीं रखा और आश्रम में छोड़ दिया।
सात दिन में 14 बुजुर्ग आए
यह सिर्फ तीन जनों की कहानी नहीं है। अपनों से सताए ऐसे 14 बुजुर्ग हैं, जिन्हें एक सप्ताह के भीतर मजबूरन सिकंदरा यमुना किनारा स्थित रामलाल वृद्धाश्रम का आश्रय लेना पड़ा। आश्रम के अध्यक्ष शिव शर्मा का कहना कि पिछले एक सप्ताह के भीतर आश्रम में 14 बुजुर्ग माता-पिता ने आश्रय लिया है। ज्यादातर केस ऐसे हैं, जिसमें बहू और बेटे ने माता-पिता को मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया है।
खबरें और भी
शिव का कहना है कि हमारी कोशिश रहती है कि काउंसलिंग कर आपस में सुलह कराकर बुजुर्गों को उनके घर हंसी-खूशी भेज दिया जाए। जो मां-बाप अपना पूरा जीवन बच्चों के लिए समर्पित कर देते हैं वही उनके साथ ऐसा व्यवहार करतें हैं। बुढ़ापे में उनका सबसे अधिक ध्यान रखने की जरूरत है।