कौन थीं सती-उन निसा जिनके मकबरे काे संवारेगा ASI? मुमताज के शव के साथ बुरहानपुर से आई थीं आगरा
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ताजमहल के पश्चिमी गेट स्थित सती-उन-निसा के मकबरे का संरक्षण करेगा। इसके लिए 25 लाख रुपये का एनुअल कंजर्वेशन प्लान दि ...और पढ़ें

सती-उन-निसा का मकबरा।

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जागरण संवाददाता, आगरा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ताजमहल के पश्चिमी गेट स्थित सती-उन-निसा के मकबरे को संवारेगा। इसके लिए एनुअल कंजर्वेशन प्लान (एसीपी) तैयार कर दिल्ली मुख्यालय को भिजवाया गया है।
सती-उन-निसा, शाहजहां की बेगम मुमताज महल की परिचारिका और बेटी जहांआरा बेगम की शिक्षक थीं। वह मुमताज महल के वर्ष 1631 में बुरहानपुर में निधन के बाद उनके शव के साथ आगरा आई थीं।
ताजमहल के पश्चिमी गेट के बाईं तरफ सती-उन-निसा का मकबरा
ताजमहल के पश्चिमी गेट के बाईं तरफ सती-उन-निसा का मकबरा है। यह मकबरा पर्यटकों के लिए बंद है। इसके बाहर टिकटों की स्कैनिंग को टर्न स्टाइल गेट और सुरक्षा जांच को डोर फ्रेम मैटल डिटेक्टर (डीएफएमडी) लगे हुए हैं। सती-उन-निसा का मकबरा रेड सैंड स्टोन (लाल बलुई पत्थर) से बना हुआ है।
जाली वर्क के कई पत्थर खराब हो गए हैं
इसके फर्श, दासा (बॉर्डर), वीनियर कर्व्स, जाली वर्क के कई पत्थर खराब हो गए हैं। इससे ताजमहल देखने आने वाले पर्यटकों के बीच धरोहर की छवि खराब होती है। इसे देखते हुए एएसआई की आगरा शाखा ने सती-उन-निसा के मकबरे के संरक्षण के लिए एसीपी तैयार कर दिल्ली मुख्यालय भेजी है। संरक्षण कार्य पर सामग्री व मजदूरी समेत करीब 25 लाख रुपये का व्यय होगा।
सती-उन-निसा
सती-उन-निसा का जन्म फारस के माजंदारन प्रांत में विद्वानों व चिकित्सकों के परिवार में हुआ था। उनके छोटे भाई तालिब अमोली वर्ष 1619 में जहांगीर के दरबार में राजकवि बन गए थे। तालिब की मृत्यु के बाद सती-उन-निसा ने उनकी दो छोटी बेटियों को गोद लिया था। वह अपने पति की मृत्यु के बाद शाहजहां की बेगम मुमताज महल की सेवा में शामिल हो गई थीं।
मुमताज की बेटी जहांआरा को उन्होंने फारसी सिखाई थी
उन्हें बेगम के अंत:पुर की अध्यक्ष के पद पर पदोन्नत किया गया था। उन्हें शाही मुहर की रक्षक का पद मुहर-दार दिया गया था। मुमताज की बेटी जहांआरा को उन्होंने फारसी सिखाई थी। शाहजहां ने उन्हें सद्र-ए-नाथ के पद पर तैनात किया था। वर्ष 1647 में लाहौर में उनका निधन हुआ था। बाद में उनके शव को आगरा लाकर दफनाया गया था।
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एसीपी की स्वीकृति मिलने पर संरक्षण कार्य को एस्टीमेट तैयार कर टेंडर किया जाएगा।
कलंदर, ताजमहल के वरिष्ठ संरक्षण सहायक।