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    अलीगढ़: अब बेटियां भी दिखाएंगी सेंटर फायर और स्टैंडर्ड पिस्टल में दम, NRAI ने महिला शूटर्स के लिए स्पार्धाएं खोलीं

    Updated: Mon, 06 Jul 2026 11:39 AM (IST)

    नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने महिलाओं के लिए सेंटर फायर पिस्टल और स्टैंडर्ड पिस्टल स्पर्धाओं में भागीदारी की अनुमति दी है। ...और पढ़ें

    दिल्ली की शूटिंग रेंज पर प्रैक्टिस करतीं बालिका निशानेबाज। सौ. लक्ष्य शूटिंग इंस्टीट्यूट

    दिल्ली की शूटिंग रेंज पर प्रैक्टिस करतीं बालिका निशानेबाज। सौ. लक्ष्य शूटिंग इंस्टीट्यूट

    HighLights

    1. महिलाओं को सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में पहली बार अनुमति मिली।

    2. स्टैंडर्ड पिस्टल अब सभी आयु वर्ग की महिलाओं के लिए उपलब्ध।

    3. एनआरएआई ने 'बेटी बचाओ-बेटी खिलाओ' मुहिम को दिया बढ़ावा।

    गौरव दुबे, अलीगढ़। शूटिंग खेल की जिस स्पर्धा में अब तक पुरुषों का वर्चस्व देखने को मिलता था, अब देश की बेटियां भी उसमें दमखम दिखाएंगी। देशभर में महिलाओं के लिए पहली बार सेंटर फायर पिस्टल (.32 बोर) स्पर्धा में हिस्सा लेने पर मुहर लगा दी गई है। अभी तक ये पुरुष प्रधान स्पर्धा के तौर पर जानी जाती थी।

    इसके अलावा, स्टैंडर्ड पिस्टल स्पर्धा जो जूनियर वर्ग की बेटियों के लिए ही उपलब्ध थी, अब वूमन, मास्टर वूमन, सीनियर मास्टर वूमन, सुपर मास्टर वूमन वर्गों में भी खेली जा सकेगी।

    यानी 16 से लेकर 70 वर्ष या उससे ऊपर उम्र तक की निशानेबाज इस स्पर्धा में अपनी प्रतिभा दिखा सकेंगी। नेशनल राइफल एसोसिएशन आफ इंडिया (एनआरएआई) ने जून में ही इस संबंध में सर्कुलर भी जारी कर दिया है

    जिले में बेटियों ने शूटिंग की इन विधाओं में प्रैक्टिस करना भी शुरू कर दिया है

    बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ-बेटी खिलाओ की मुहिम को धार देने के लिए ये निर्णय एनआरएआइ द्वारा किया गया है। अब बेटियां पहली बार .32 पिस्टल जैसे कठिन व पेचीदा खेल में देश के लिए पदक लाने का दम रखेंगी। अभी तक पुरुष वर्ग में आेलिंपियन जसपाल राणा को ही इस स्पर्धा में महारथ हासिल रही है। अब इस नई व्यवस्था से बालिका निशानेबाजों में खुशी की लहर सी छा गई है।

    बालिका निशानेबाजों को .32 बोर की पिस्टल रखने की अनुमति भी मिल गई है। जिले में बालिका खिलाड़ियों ने शूटिंग की इन विधाओं में प्रैक्टिस करनी भी शुरू कर दी है। हर आयुवर्ग में स्टेट व नेशनल क्वालीफाई करने के लिए अलग-अलग स्कोर की सीमा भी निर्धारित की गई है। नेशनल क्वालीफाई करने के लिए 600 अंकों का मैच होगा। वहीं आलइंडिया क्वालीफाई करने के लिए 300 अंक का मैच होगा।

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    सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा का प्रारूप

    अंतरराष्ट्रीय शूटिंग कोच वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि इस स्पर्धा में निशानेबाज 25 मीटर दूरी पर निशाना साधते हैं। एक निशानेबाज दो चरणों में कुल 60 शॉट चलाता है।

    • पहले चरण में 30 शाट चलाने होते हैं। इसके लिए चार मिनट का समय निर्धारित होता है। दूसरा चरण रैपिड फायर (तीव्रता वाला) होता है। इसमें भी 30 शॉट चलाने हाेते हैं लेकिन समय केवल 90 सेकेंड (1.30 मिनट) का निर्धारित होता है। तीन सेकेंड में लक्ष्य साधते हुए एक गोली चला देनी होती है।
    • इसी तरह स्टैंडर्ड पिस्टल में भी 25 मीटर की दूरी से 60 शॉट चलाए जाते हैं। मगर समय में बदलाव होता है। इसमें पहले चरण में चार मिनट में 20 गोली चलाकर लक्ष्य भेदते हैं।
    • दूसरे चरण में दो भाग होते हैं। पहले भाग में 20 सेकेंड में 20 गोली और दूसरे भाग में 10 सेकेंड में 20 गोली चलाकर लक्ष्य भेदना होता है।

    नेशनल के लिए क्वालीफाइंग स्कोर, सेंटर फायर पिस्टल, वर्ग, कुल अंक, क्वालीफाइंग स्कोर

    • वूमन, 600, 520
    • मास्टर वूमन, 600, 515
    • सीनियर मास्टर वूमन, 600, 500
    • सुपर मास्टर वूमन, 600, 480

    स्टैंडर्ड पिस्टल

    वर्ग, कुल अंक, क्वालीफाइंग स्कोर

    1. वूमन, 600, 515
    2. मास्टर वूमन, 600, 505
    3. सीनियर मास्टर वूमन, 600, 475
    4. सुपर मास्टर वूमन, 470

    शूटर्स के बोल

    'सेंटर फायर पिस्टल में बालिका व महिला खिलाड़ियों के लिए शुरू कर दिया गया है। ये काफी सराहनीय पहल है। बेटियां भी इस स्पर्धा में देश को पदक जिता सकती हैं। इसकी प्रैक्टिस भी शुरू कर दी है। प्रियांशी, नेशनल शूटर, दिल्ली'

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    'सेंटर फायर पिस्टल व स्टैंडर्ड पिस्टल में महिलाओं के आने से स्पर्धा कड़ी होगी। इसकी प्रैक्टिस भी कर रहे हैं। यह एनआरएआई का शानदार फैसला है। अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में देश के लिए पदक बढ़ेंगे। दीया वशिष्ठ, नेशनल शूटर, अलीगढ़'


    सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा को महिला वर्ग में शुरू कर दिया गया है। इस स्पर्धा में बेटियां भी देश का मान बढ़ाएंगी। साथ ही स्टैंडर्ड पिस्टल जिसको केवल बालिका वर्ग में खेलने की अनुमति थी, अब महिला वर्ग में भी शुरू कर दिया गया है।

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    पवन कुमार सिंह, महासचिव, एनआरएआई