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    स्वामी रामभद्राचार्य का आह्वान, राम के अपमान का बदला लिया, अब कृष्ण जन्मभूमि के लिए संघर्ष

    Updated: Mon, 15 Jun 2026 12:25 PM (IST)

    स्वामी रामभद्राचार्य ने अलीगढ़ में राम कथा के दौरान कहा कि राम मंदिर का बदला ले लिया गया है, अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर बनाने का बदला लेना है। उन् ...और पढ़ें

    अलीगढ़ में रामभद्राचार्य।

    अलीगढ़ में रामभद्राचार्य।

    HighLights

    1. रामभद्राचार्य ने कहा राम का अपमान का बदला लिया।

    2. अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण का बदला लेना है।

    3. अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ करने की बात कही।

    जागरण संवाददाता, अलीगढ़। प्रसिद्ध संत व कथावाचक जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने रविवार को रामकथा के प्रथम दिन कृष्ण जन्मभूमि, काशी और संभल से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर अवश्य बनेगा और इस विषय पर कोई समझौता नहीं होगा। अयोध्या का गौरव लौट चुका है। अब कृष्ण जन्मभूमि का गौरव लौटाया जाएगा।

    कानपुर हाईवे स्थित लधौआ के आनंद एग्रोकेम परिसर में रविवार से शुरू हुई नौ दिवसीय रामकथा में पहले दिन स्वामी रामभद्राचार्य ने अयोध्या राम मंदिर आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लिए लंबे समय तक संघर्ष किया गया।

    छह जून, 1528 बाबर ने अयोध्या में मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद बनाई। हमने इसके लिए 76 बार संघर्ष किया। गांव-गांव अलख जगाई। अयोध्या में राम मंदिर के आंदोलन का नतीजा है कि पूरे भारत में कमल खिला दिया।

    पीएम मोदी के लंबे कार्यकाल का किया उल्लेख

    स्वामी रामभद्राचार्य ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लंबे कार्यकाल का उल्लेख कर इसे भगवान राम की कृपा से जोड़कर देखा। कहा, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होने के बाद अब लोगों को अन्य धार्मिक स्थलों के प्रति भी जागरूक होने की आवश्यकता है।

    अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ है

    रामभद्राचार्य ने कहा, अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ है। मुसलमानों ने अलीगढ़ कर दिया है। अलीगढ़ में भगवान राम को मानने और पसंद करने वाले लोगों की बड़ी संख्या है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक कृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण नहीं होगा, तब तक दर्शन करने नहीं जाएंगे।

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    भक्तिपथ’ बन गया हाईवे, खूब गूंजे श्रीराम के जयकारे

    कथा स्थल पर स्वामी रामभद्राचार्य जैसे ही पहुंचे, भारत माता की जय, जय श्रीराम, जय जय श्रीराम और सीताराम की जय से पंडाल गूंज उठा। कथा शुरू होने से पहले उन्होंने गणेश वंदना के साथ हनुमान चालीसा की संगीतमय प्रस्तुति दी। बोले, यह उनकी 1424वीं कथा है। यह ऐतिहासिक होगी।