अलीगढ़ RMPSU में भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र की स्थापना: वेद, आयुर्वेद-योग जैसे प्राचीन ज्ञान पर आधुनिक शोध व शिक्षा
राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय (आरएमपीएसयू) राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) केंद्र स्थापित करेगा। यह केंद्र प ...और पढ़ें

राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय।
HighLights
आरएमपीएसयू में भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र स्थापित होगा
वेद, आयुर्वेद, योग जैसे प्राचीन ज्ञान पर शोध
भारतीय बौद्धिक विरासत को आधुनिक शिक्षा से जोड़ेगा
विनोद भारती, अलीगढ़। राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय (आरएमपीएसयू) भारतीय ज्ञान परंपरा को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) केंद्र की स्थापना होगी। कार्यपरिषद की बैठक में अनुमोदन के बाद कुलपति ने भी मुहर लगा दी है।
यह केंद्र वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, योग, भारतीय गणित, खगोल विज्ञान, दर्शन, पर्यावरण, कृषि, लोकज्ञान और सांस्कृतिक विरासत जैसे प्राचीन ज्ञान-स्रोतों का अध्ययन ही नहीं करेगा, बल्कि उन्हें आधुनिक शोध, नवाचार और समकालीन शिक्षा से भी जोड़ेगा। विश्वविद्यालय कार्य परिषद के इस प्रस्ताव को प्रबंधन की मंजूरी भी मिल चुकी है।
वेद-उपनिषद से लेकर आयुर्वेद, योग, भारतीय गणित और लोकज्ञान पर होगा शोध
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। इसी क्रम में आरएमपीएसयू में स्थापित होने वाला यह केंद्र शिक्षकों के प्रशिक्षण, शोध परियोजनाओं, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और व्याख्यानमालाओं का प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां प्राचीन भारतीय ग्रंथों के वैज्ञानिक पक्ष, पारंपरिक तकनीकों और स्थानीय ज्ञान के दस्तावेजीकरण पर भी कार्य किया जाएगा।
आधुनिक नवाचार के साथ भारतीय बौद्धिक विरासत को मिलेगा नया मंच
केंद्र की स्थापना के बाद विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित प्रमाणपत्र, डिप्लोमा और वैकल्पिक पाठ्यक्रमों का लाभ मिलेगा। शोधार्थियों के लिए भारतीय परंपरा से जुड़े विषयों पर नए शोध के अवसर खुलेंगे। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच अंतर्विषयक शोध को भी बढ़ावा मिलेगा, ताकि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान, प्रबंधन, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों से जोड़ा जा सके।
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देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों से स्थापित होगा सहयोग
प्रबंधन की योजना है कि इस केंद्र के माध्यम से देश के प्रमुख शिक्षण एवं शोध संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग स्थापित किया जाए। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को संयुक्त शोध परियोजनाओं में भागीदारी का अवसर मिलेगा। भारतीय भाषाओं, संस्कृति और लोक परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ समाजोपयोगी ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी प्रयास किया जाएगा।
यह केंद्र केवल सांस्कृतिक अध्ययन का मंच नहीं होगा, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा के वैज्ञानिक, तकनीकी और व्यावहारिक पक्ष पर नए विमर्श और अनुसंधान का आधार बनेगा। कार्य परिषद से अनुमोदन होने के बाद अब शासन को प्रस्ताव जाएगा। कार्यपरिषद से अनुमोदन के बाद अब आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
प्रबुद्ध सिंह, कुलसचिव, आरएमपीएसयू।