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    तिरंगे में लिपटा आया बेटा तो मां हुई बेसुध, बलिदानी जितेंद्र अमर रहें... से गूंजा अलीगढ़; सार्जेंट की अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब

    Updated: Tue, 16 Jun 2026 09:13 AM (IST)

    असम में वायुसेना के एएन-32 विमान हादसे में बलिदान हुए सार्जेंट जितेंद्र शर्मा को अलीगढ़ के सालपुर गांव में राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई द ...और पढ़ें

    जितेंद्र का फाइल फोटो।

    जितेंद्र का फाइल फोटो।

    HighLights

    1. सार्जेंट जितेंद्र शर्मा को राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई।

    2. असम में वायुसेना के एएन-32 विमान हादसे में हुए थे बलिदान।

    3. अलीगढ़ के सालपुर गांव में हजारों लोगों ने दी श्रद्धांजलि।

    संवाद सूत्र जट्टारी (अलीगढ़)। असम में वायुसेना के एएन-32 विमान हादसे में बलिदान हुए टप्पल क्षेत्र के गांव सालपुर निवासी भारतीय वायुसेना के सार्जेंट जितेंद्र शर्मा को सोमवार को पूरे राजकीय एवं सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

    तिरंगे में लिपटे वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए क्षेत्रभर से हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर आंख नम थी और वातावरण 'भारत माता की जय', 'वंदे मातरम्' तथा 'बलिदानी जितेंद्र अमर रहें' के नारों से गूंज रहा था।

    हजारों युवा रहे मौजूद

    सोमवार दोपहर करीब चार बजे सेना की गाड़ी से शहीद का पार्थिव शरीर यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते टप्पल इंटरचेंज पहुंचा। वहां पहले से मौजूद हजारों युवाओं और ग्रामीणों ने भारत माता के जयकारों के साथ अपने वीर सपूत का स्वागत किया। टप्पल इंटरचेंज से गांव सालपुर तक पहुंचने में शवयात्रा को करीब डेढ़ घंटे का समय लगा। रास्ते भर लोगों ने तिरंगा लहराकर और पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

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    सेना के वाहन में आया शव, छोटी गाड़ी में ले जाया गया।

    गांव पहुंचने पर उमड़ा जनसैलाब

    गांव पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे घरों की छतों तथा मार्गों पर खड़े होकर अपने वीर सपूत की एक झलक पाने को आतुर दिखाई दिए। सेना के वाहन से पार्थिव शरीर उतारकर जब घर लाया गया तो वहां मौजूद वृद्ध मां राजेश्वरी देवी और बहनों की तबीयत बिगड़ गई।

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    स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तत्काल उनकी जांच कर उपचार दिया। होश में आने के बाद मां बार-बार यही कहती रहीं, 'बेटा, एक बार मुझसे बात कर ले।' यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों के साथ महिला पुलिसकर्मियों की आंखें भी नम हो गईं।

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    डीएम ने दी श्रद्धांजलि।

    मां लगातार पूछती रही जितेंद्र का फोन आया क्या

    सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया जब परिजनों ने बताया कि शहादत की सूचना मिलने से पहले मां लगातार पूछ रही थीं, 'जितेंद्र का फोन आया क्या?' परिजन उन्हें यह कहकर समझाते रहे कि वह ड्यूटी पर हैं और विमान में होने के कारण संपर्क नहीं हो पा रहा है। लेकिन दोपहर में बेटी ने जब मां को बेटे की शहादत की सूचना दी तो घर में कोहराम मच गया। बेटे के बलिदान की खबर सुनते ही मां की तबीयत बिगड़ गई और स्वास्थ्य विभाग की टीम को घर पर तैनात करना पड़ा।

    60 सदस्यीय सैनिक दल ने बलिदानी सार्जेंट जितेंद्र शर्मा को अंतिम सलामी दी

    अंतिम दर्शन के बाद भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अतीम की मौजूदगी में करीब 60 सदस्यीय सैनिक दल ने बलिदानी सार्जेंट जितेंद्र शर्मा को अंतिम सलामी दी। सैनिकों ने पूरे सैन्य सम्मान और अनुशासन के साथ गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया। सैन्य बैंड और सलामी के बीच माहौल अत्यंत भावुक हो गया। इसके बाद बड़े भाई रमाकांत शर्मा ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की। हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

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    अंतिम विदाई के दौरान स्वजन।

    तीन भाइयों में सबसे छोटे थे जितेंद्र

    बलिदानी जितेंद्र शर्मा तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। वह चार बहनों के इकलौते भाई थे। उनकी सबसे छोटी बहन अजनेश विधवा हैं, जिनकी चिंता उन्हें हमेशा रहती थी। वह अपनी 17 वर्षीय भांजी शशि को पिता के निधन के बाद अपने पास ले आए थे और उससे बेहद स्नेह रखते थे। परिवार के लोगों के अनुसार वह भांजी की हर छोटी-बड़ी इच्छा पूरी करने का प्रयास करते थे।

    बचपन से देखा था देश सेवा का सपना

    जितेंद्र बचपन से ही देश सेवा का सपना देखते थे। उन्होंने जट्टारी स्थित डीआरजी कॉलेज से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद अलीगढ़ में कोचिंग कर तैयारी की और एक जनवरी 2015 को भारतीय वायुसेना में उनका चयन हो गया। यह उनकी पहली पोस्टिंग थी। अपनी कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और देशभक्ति के कारण वह क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गए थे।

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    जीवनसाथी के चयन की चल रही थी तैयारी

    परिवार ने उनके विवाह की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं और जीवनसाथी का चयन हो चुका था। जिस घर में कुछ समय बाद शहनाई बजने की उम्मीद थी, वहां अब वीर सपूत की अंतिम विदाई की तैयारियां हो रही थीं। इस असमय हुई शहादत ने परिवार के सभी सपनों को झकझोर कर रख दिया।

    बलिदानी जितेंद्र को क्रिकेट खेलने का भी बेहद शौक था। छुट्टियों में घर आने पर वह गांव स्थित कदम खंडेहा मंदिर प्रांगण में अपने साथियों के साथ क्रिकेट खेलते थे। ग्रामीणों के अनुसार उनका स्वभाव बेहद मिलनसार और सरल था, जिसके कारण वह सभी के प्रिय थे। उनकी मां राजेश्वरी देवी की आंखों का मात्र दस दिन पहले ही उपचार हुआ था और वह बेटे के साथ अधिक समय बिताने की उम्मीद कर रही थीं।

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    अंतिम संस्कार में पहुंचे जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी

    अंतिम संस्कार में सांसद सतीश गौतम, प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री सुरेंद्र दिलेर, जिलाधिकारी अवनीश कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन सहित कई प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी पहुंचे। सभी ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सांसद ने कहा कि देश अपने इस वीर सपूत के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता और सरकार परिवार के साथ हर परिस्थिति में खड़ी है।

    इस दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह लाला, ब्लॉक प्रमुख ऋषिपाल सिंह, योगेश प्रधान हामिदपुर, जिलाउपाध्यक्ष हरिशंकर गौड़, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रदीप बंसल, पूर्व विधायक भगवती सूर्यवंशी, पूर्व विधायक सत्यपाल सिंह, कर्मवीर प्रधान सालपुर, देवेश मालान हजियापुर, पूर्व चेयरमैन मनवीर सिंह, पूर्व सैनिक संगठन के कार्यकर्ता आदि मौजूद रहे।