अमरोहा: कागजों में जिंदा हैं 587 मृतक किसान, सिर पर ₹3.20 करोड़ का कर्ज; जानें क्या है पूरा मामला
अमरोहा में 587 मृत किसान अभी भी सरकारी अभिलेखों में जीवित हैं, जिन पर 3.20 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। उनके परिजनों द्वारा समिति की सदस्यता न लेने स ...और पढ़ें

डिडौली गांव स्थित पूरनपुर बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति। जागरण आर्कइव
HighLights
न नाम हटाए जा रहे हैं और न ही ऋण वसूली के लिए कोई कार्रवाई चल रही है
राहुल शर्मा, अमरोहा। जनपद की सहकारी समितियों के 587 सदस्य किसानों की मौत हो चुकी है लेकिन, अभिलेखों में जिंदा हैं। इस सब की छोड़िए करोड़ों के बकाएदार भी हैं..., 320.70 लाख रुपये की देनदारी उन पर है। अधिकारियों ने कर्ज वसूली के लिए उनके वारिसों को समिति सदस्य बनाने की प्रक्रिया की लेकिन, किसी के स्वजन ने मना कर दिया तो किसी के घर में जमीन का विवाद खड़ा हो गया।
इसके चलते न तो बकाएदारों से वसूली की जा सकी है और न ही उनके नामों को अभिलेखों से हटाने की कार्रवाई की गई है। अब विभागीय अधिकारियों ने फिर से स्वजन से बातचीत कर उनसे कर्ज अदाएगी की कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
जनपद में 45 सहकारी समितियां हैं। इनसे करीब 35 हजार किसान सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं। खाद व बीज पर समितियां सदस्य किसानों को ऋण उपलब्ध कराती हैं। 6,496 किसान समितियों के कर्जदार हैं। उन पर 3,782.27 लाख रुपये का बकाया है। लेकिन, इन बकाएदार किसानों 1,115 ऐसे थे जिनकी मृत्यु हो चुकी है।
ब्लाक का नाम और बकाएदार किसानों की सूची
| ब्लाक का नाम | बकाएदार किसानों की संख्या |
| अमरोहा | 612 |
| जोया | 363 |
| गजरौला | 317 |
| मंडी धनौरा | 2,482 |
| हसनपुर | 829 |
| गजरौला | 1,893 |
इनमें से 528 किसानों के वारिस समिति के सदस्य बन गए हैं जबकि, 587 के अभी तक नहीं बन पाए हैं। इसके चलते उनसे ऋण वसूली की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। कोई सालों पहले मृत हो चुका है तो किसी ने इस साल दम तोड़ा है। हैरानी की बात ये है कि धीरे-धीरे मृतकों के ऊपर ब्याज भी बढ़ता जा रहा है।
एआर कोआपरेटिव वरुण अग्रवाल ने बताया कि नियम है कि अगर कोई ऋणी किसान की मृत्यु हो जाती है तो उसके स्वजन से ऋण वसूलने की कार्रवाई की जाती है। इसके लिए उसके बेटों या बेटी को समिति की सदस्यता ग्रहण कराई जाती है। यदि दो बेटों के नाम जमीन हुई है तो दोनों से आधे-आधे ऋण की वसूली की जाती है।
खबरें और भी
वर्ष 2007 से 107 किसान कर्जदार, 1.70 करोड़ की देनदारी
सहकारी समितियों के कर्जदारों का आंकड़ा 19 साल से लगातार बना आ रहा है। 107 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने वर्ष 2007 में सहकारी समितियों से कर्ज लिया था लेकिन, उनके द्वारा अदाएगी नहीं की गई। धीरे-धीरे किसानों पर ब्याज लगता गया और ऋण की धनराशि 1.70 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
इनमें से कई किसानों की मृत्यु तक हो चुकी है। स्वजन ऋण देने से मना कर रहे हैं। जमीन को लेकर पारिवारिक विवाद भी ऋण नहीं देने की वजह सामने आई है। इसके चलते अधिकारी उनसे ऋण नहीं वसूल पा रहे हैं। नोटिसों तक ही उनकी कार्रवाई सीमित है।
बकाएदार किसानों से ऋण वसूली के लिए अभियान शुरू हो गया है। सितंबर माह तक चलेगा। मृतक किसानों के स्वजन से ऋण वसूली की जाती है। इससे पहले उनको समिति का सदस्य बनाया जाता है। जो मृतक किसान बकाएदार हैं, उनके स्वजन में कोई न कोई विवाद है। समिति सचिव उनसे बार-बार सदस्य बनने के लिए कहते हैं। कुछ मना कर देते हैं तो कोई विवाद निपटने की बाद कहता है। बहरहाल, ऋण जमा करने के लिए स्वजन को समझाया जाता है। सैकड़ों मृतक किसानों के स्वजन सदस्य बन चुके हैं। उनसे ऋण वसूली हो रही है।
- वरुण अग्रवाल, एआर कोआपरेटिव
यह भी पढ़ें- एक दूल्हा, 3 दुल्हनें! अमरोहा की यूट्यूबर बहनों ने कैमरामैन से रचाई शादी; माँ बोलीं- सच है तो कोई वास्ता नहीं