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    अमरोहा की ये 10 फीट की गलियां बन सकती हैं 'डेथ ट्रैप', आग लगने पर बेबस हो जाती है फायर ब्रिगेड!

    Updated: Wed, 18 Mar 2026 07:20 AM (IST)

    अमरोहा शहर और कस्बों की संकरी गलियां अग्निशमन विभाग के लिए बड़ी चुनौती हैं। आग लगने पर फायर टेंडर इन तंग रास्तों तक नहीं पहुंच पाते, जिससे जान-माल का ...और पढ़ें

    अमरोहा में बिजनौर मार्ग पर लगी आग। जागरण आर्काइव

    अमरोहा में बिजनौर मार्ग पर लगी आग। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. अमरोहा, गजरौला, हसनपुर, मंडी धनौरा के साथ ही अन्य कस्बों में भी आती दिक्कत

    2. सरकारी और निजी संस्थानों में आग पर काबू पाने के लिए उपलब्ध हैं पर्याप्त संसाधन

    जागरण संवाददाता, अमरोहा। जिला मुख्यालय यानि अमरोहा शहर को देखें तो यह पुराना शहर है। सैकड़ों साल पुराना इतिहास समेटे शहर की बसावट भी प्राचीन हैं। कई संकरे रास्ते और तंग गलियां तो ऐसे हैं जहां से केवल एक बार में एक ही बाइक गुजर सकती है। अधिकांश रास्ते तो 10 फीट से अधिक चौड़ाई वाले नहीं हैं। यही स्थिति नौगावां सादात कस्बा की भी है। हसनपुर और मंडी धनौरा के साथ ही गजरौला की पुरानी बस्तियों में संकरे रास्ते व घनी आबादी आज भी दमकल विभाग के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।

    कई बार दमकल के फायर टेंडर इन संकरी गलियों में फंस जाते हैं। तब तक घटनास्थल पर आग सब कुछ राख कर देती है। हालांकि जिले के सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान, स्कूल-कालेज, निजी व सरकारी अस्पताल के साथ ही सरकारी और गैर सरकारी दफ्तरों में अग्निशमन यंत्र भी पर्याप्त हैं। जिनकी जांच समय-समय पर विभाग की ओर से की जाती है।

    नवंबर 2025 की रात 10 बजे नगर के मुहल्ला गुजरी स्थित क्राकरी की दुकान में शार्ट सर्किट से आग लग गई थी। जिस स्थान पर यह दुकान है, वहां तक जाने के लिए 20 फीट चौड़े मुख्य बाजार की सड़क से मोड़ लेकर मात्र 10 फीट चौड़ी संकरी सड़क पर जाना होता है। वहां मोड़ पर फायर टेंडर न तो मुड़ सकता है और न ही भीतर गली में जा सकता है।

    हालांकि, दमकल की टीम मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन फायर टेंडर नहीं जा सका। करीब 80 फीट हौज पाइप फैलाकर जब तक कर्मी घटनास्थल तक पहुंचे उस समय तक दुकान जल चुकी थी। यह घटना केवल एक बानगी है। मुहल्ला सद्दो और मुल्लाना में भी दो घटनाएं ऐसी ही हो चुकी हैं। यहां तो गनीमत यह रही थी कि मुहल्ले के लोगों ने परिवार के लोगों को बचा लिया था।

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    यह स्थिति केवल अमरोहा नगर की ही नहीं, नौगावां सादात में भी है। कई बार अतिक्रमण भी आड़े आता है। बहुमंजिला इमारत, बाजार, गोदाम और औद्योगिक इकाइयों में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम हैं। इन भवनों में फायर एग्जिट, अलार्म सिस्टम, अग्निशमन यंत्र, स्प्रिंकलर सिस्टम जैसे सुरक्षा उपकरण मौजूद हैं और नियमित जांच भी की जाती है। लेकिन कई व्यवसायिक प्रतिष्ठान में आग पर काबू पाने का प्रबंध नाकाफी हैं। वहीं, जिले के अस्पतालों, माल, कोचिंग सेंटर, स्कूल और सरकारी कार्यालयों में अग्नि सुरक्षा मानक भी लगभग पूरे हैं।

    काटन और जैकेट कारखानों के पास नहीं है एनओसी

    अमरोहा नगर और नौगावां सादात में काटन और जैकेट तैयार करने के कारखाने हैं। परंतु यह सभी कारखाने दमकल विभाग की बगैर एनओसी के चल रहे हैं। नियमानुसार इन कारखानों के संचालन के लिए विभाग से एनओसी लेनी चाहिए। परंतु बगैर औपचारिकता पूरी किए इनका संचालन किया जा रहा है। जबकि आग लगने की अधिकांश घटनाएं भी इन्हीं कारखानों में होती हैं। दमकल विभाग कई बार नोटिस भेजता है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती है।

     

    ग्रामीण क्षेत्र में घटना स्थल पर पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं आती। परंतु नगरीय क्षेत्रों में कई बार संकरे रास्ते परेशानी पैदा करते हैं। समय पर घटना स्थल पर नहीं पहुंचा जाता। स्कूल-कालेज, अस्पताल, बहुमंजिला भवन, दफ्तर व अन्य सार्वजनिक इकाइयों पर माह में दो बार चेकिंग की जाती है। काटन और जैकेट कारखानों की ओर से एनओसी नहीं ली गई है।

    - अनुराग तोमर, एफएसओ।


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