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    नाव बंद, ट्यूब बनी सहारा: गंगा का जलस्तर बढ़ते ही खादर क्षेत्र में राशन और चारे का संकट, फसलें जलमग्न

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 03:46 PM (IST)

    गंगा के बढ़ते जलस्तर ने अमरोहा के खादर क्षेत्र में मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जहाँ नाव सेवा बंद होने से ग्रामीण ट्यूब के सहारे जान जोखिम में डालकर राशन और ...और पढ़ें

    गांव में पानी भरने और नाव का संचालन न होने पर जान जोखिम में डालकर रबड़ की ट्यूब पर खाद्य सामग्री लेकर जाते ग्रामीण। सौ.ग्रामीण

    गांव में पानी भरने और नाव का संचालन न होने पर जान जोखिम में डालकर रबड़ की ट्यूब पर खाद्य सामग्री लेकर जाते ग्रामीण। सौ.ग्रामीण

    HighLights

    1. गंगा का जलस्तर बढ़ा, खादर क्षेत्र में बढ़ी मुश्किलें, फसलों में भरा बाढ़ का पानी

    संवाद सहयोगी, मंडी धनौरा/कैसरा (बदायूं)। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने खादर क्षेत्र के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नाववाला गांव का संपर्क मार्ग जलमग्न होने के बाद भी प्रशासन नियमित नाव संचालन शुरू नहीं करा सका है। ऐसे में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर ट्यूब के सहारे गहरे पानी को पार कर रहे हैं। राशन, दवा और रोजमर्रा का सामान पहुंचाने के लिए लोग हर दिन जिंदगी दांव पर लगाने को मजबूर हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से नाव उपलब्ध कराने और संचालन शुरू कराने के दावे धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं। न तो नियमित नाव चल रही है और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। मजबूरी में ग्रामीण राशन की बोरियां और जरूरी सामान ट्यूब पर रखकर पानी के बीच से गुजर रहे हैं।

    बताया कि गहरे पानी में थोड़ी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है, लेकिन परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह जोखिम उठाना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल नियमित नाव संचालन, राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

    ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जलस्तर और बढ़ा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उप जिलाधिकारी शैलेश कुमार दुबे से इस संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।

    गंगा के जलस्तर में 20 सेंटीमीटर बढ़ोतरी, तेज धारा कर रही कटान

    पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही बारिश और बिजनौर स्थित चौधरी चरण सिंह बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण गंगा का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। शुक्रवार को गंगा के जलस्तर में 20 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अब गंगा का गेज 200.65 मीटर पर पहुंच गया है, जो खतरे के निशान से 1.35 मीटर नीचे है।

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    जलस्तर बढ़ने के साथ ही बाढ़ खंड विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। तटबंधों का निरीक्षण किया जा रहा है और बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। वहीं खादर क्षेत्र के खेतों में पानी भरने से फसलें खराब होने लगी हैं। किसान पशुओं के लिए हरा चारा तक नहीं जुटा पा रहे हैं। इस सप्ताह सोमवार और मंगलवार को गंगा का जलस्तर कम हुआ था, जबकि बुधवार को स्थिर रहा।

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    गुरुवार को फिर 10 सेंटीमीटर और शुक्रवार को 20 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। जलस्तर बढ़ने से दारानगर, भुड्डी समेत टापू पर बसे छह गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। इन गांवों के लोगों को एक ओर गंगा के पानी का खतरा है तो दूसरी ओर रामगंगा नहर का जलस्तर भी बढ़ रहा है। बाढ़ खंड विभाग के जेई सुभाष कुमार ने बताया कि शुक्रवार को जलस्तर में 20 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है।

    खतरे के निशान से जलस्तर अभी नीचे है, लेकिन विभाग पूरी तरह सतर्क है। उधर, गंगा के बढ़ते जलस्तर से ओसीता जगदेवपुर, कबीरपुर समेत टापू पर बसे गांवों के किसानों की हजारों बीघा फसलें पानी में डूब गई हैं। धान और सब्जियों की फसलें पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं। अब गन्ना और हरे चारे में भी पानी भरा होने से फसलें पीली पड़ने लगी हैं।

    पशुओं के चारे के लिए जान जोखिम में डाल रहे किसान

    गंगा में बाढ़ का पानी भरने के बाद किसानों के सामने पशुओं के लिए हरा चारा जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है। किसान पानी से होकर बैलगाड़ी और भैंसा बुग्गी के माध्यम से किसी तरह चारा घर तक पहुंचा रहे हैं। स्थानीय बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।

    गंगा किनारे बसे गांवों के आसपास कटान तेज हो गया है। धौरिया की मढ़ैया, सिरसा गुर्जर की मढ़ैया, सतैड़ा की मढ़ैया और गंगानगर गांव के पास गंगा आबादी की ओर बढ़ रही है। सिरसा गुर्जर और सतैड़ा की मढ़ैया के पास किसानों की कई छप्पर की झोपड़ियां गंगा में समा चुकी हैं।

    तीन दिन पहले उप जिलाधिकारी हिमांशु उपाध्याय ने ट्रैक्टर से गंगा क्षेत्र का दौरा कर मढ़ैया में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के निर्देश दिए थे। एसडीएम हिमांशु उपाध्याय ने बताया कि गंगा क्षेत्र में रह रहे लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही है। हालांकि गंगा का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है। लेखपालों को बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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