अमरोहा में सिलाई मशीन योजना में बड़ा घपला! किसान ने सीडीओ के सामने ऑडियो बजाकर खोली पोल, चयन प्रक्रिया पर रोक
अमरोहा में सिलाई मशीन वितरण योजना में बड़े घपले का खुलासा हुआ है, जहाँ लाभार्थियों के चयन के लिए अवैध वसूली की जा रही थी। किसान शीशपाल सिंह ने सीडीओ क ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
मुख्य विकास अधिकारी ने उपायुक्त उद्योग से तलब की लाभार्थियों के चयन की सूची
जागरण संवाददाता, अमरोहा। जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा सिलाई मशीन वितरण में घपलेबाजी की जा रही है। लाभार्थियों का चयन के नाम पर अवैध वसूली हो रही है। एक हजार से लेकर चार हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इसकी पोल किसान शीशपाल सिंह ने गुरुवार को सीडीओ एके मिश्र के सामने खोली।
शिकायती पत्र देते हुए साक्ष्य भी उपलब्ध कराए। रुपये नहीं देने पर बेटी व रिश्तेदार की बेटी को लाभार्थियों की सूची से बाहर करने और इस साल बगैर बताए उनका आवेदन करने और साक्षात्कार कराने का भी आरोप लगाया।
मामले में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए सीडीओ ने लाभार्थियों के चयन की प्रकि्रया पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है। उपायुक्त से पिछले और इस साल के आवेदकों व चयनितों की सूची मांगी है। साथ ही प्रकरण की जांच के लिए अधिकारी नामित करने की बात कही है।
नौगावां सादात तहसील क्षेत्र के गांव इब्राहिमपुर निवासी शीशपाल सिंह गुरुवार को विकास भवन स्थित सीडीओ कार्यालय पहुंचे। यहां पर मुख्य विकास अधिकारी काे शिकायती पत्र सौंपा। उनको अवगत कराया कि उसने बेटी शिवी व गांव नाजरपुर कलां के रहने वाले रिश्तेदार जितेंद्र सिंह की बेटी शिखा का एक जनपद एक उत्पाद प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना के तहत 17 मई 2025 को आनलाइन आवेदन किया था।
करीब डेढ़ माह बाद उनको साक्षात्कार के लिए जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र बुलाया गया था। साक्षात्कार पास होने के बाद उनसे लाभार्थियों के चयन की सूची में नाम फाइल कराने और सिलाई मशीन दिलवाने की एवज में चार हजार रुपये की मांग की गई। पैसे नहीं दिए तो उनकी व रिश्तेदार की बेटी को अपात्र दर्शा दिया गया।
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इसके बाद उनको बताया गया कि रुपये ऊपर तक जाते हैं। तुमने नहीं दिए तो नाम सूची में नहीं आया। क्योंकि, जो पैसे देता है, उसका नाम ही सूची में आता है। आरोप लगाया कि इसकी शिकायत करना जब मैंने शुरू किया तो कर्मचारियों ने इस साल दोनों का आवेदन उनको सूचना दिए बगैर ही ऑनलाइन कर दिए।
कल उनका फिर साक्षात्कार हुआ है। किसान ने कर्मचारियों की आडियो भी अधिकारियों को सुनवाई। लिखित शिकायत व साक्ष्य मिलने पर सीडीओ ने प्रकरण को बेहद संजीदगी से लिया है। उन्होंने हाल ही में चल रही लाभार्थियों के चयन की प्रकि्रया पर अग्रिम आदेशों तक प्रतिबंध लगा दिया है।
उपायुक्त उद्योग से पिछले साल और इस साल के आवेदकों व चयनित लाभार्थियों के नामों की सूची मांगी है। इसके अतिरिक्त प्रकरण की जांच जनपदीय अधिकारियों से कराने का भरोसा किसान को दिलाया है।
आंगनबाड़ी व केंद्र के कर्मचारी कर रहे गड़बड़झाला
किसान की बात पर यकीन करें तो एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र में सिक्का चलता है। जो लोग योजना के तहत आवेदन करते हैं, उनके नामों की सूची विभाग से प्राप्त कर वह घर-घर जाती है और रुपये का लेनदेन कर लाभार्थियों की चयन सूची में नाम लाने की पक्की गारंटी लेती है।
यही कार्यकर्ता उनके पास आई थी। केंद्र पर मौजूद एक कर्मचारी को ही यह धनराशि वसूलकर दी जाती है। यह कर्मचारी अधिकारियों को आगे देने की बात कहता है। कर्मचारी संविदा कर्मी है। उन्होंने कार्यकर्ता का पता लगाने के लिए डीपीओ को जांच सौंप दी है।
मामला संज्ञान में आया है। लाभार्थियों के चयन की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। पिछले और मौजूदा वर्ष के चयनित लाभार्थियों व आवेदकों की सूची तलब की गई है। मामले की जांच कराने के लिए अधिकारी नामित किए जाएंगे।
- अश्वनी कुमार मिश्र, सीडीओ
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