अंतिम संस्कार के बाद जिंदा लौट आया शख्स, औरैया पुलिस की जांच में सामने आया हैरान करने वाला सच
औरैया में एक अज्ञात शव की गलत पहचान कर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन जिस व्यक्ति को मृत बताया गया था, वह तीन दिन बाद जीवित घर लौट आया। ...और पढ़ें
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यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है
HighLights
अज्ञात शव की गलत पहचान कर किया गया अंतिम संस्कार।
मृत घोषित व्यक्ति तीन दिन बाद जीवित घर लौटा।
झूठी पहचान प्रस्तुत करने पर तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज।
संवाद सहयोगी, औरैया। अजीतमल कोतवाली क्षेत्र में अज्ञात शव की गलत पहचान कर उसका अंतिम संस्कार कराने का मामला अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। जिस व्यक्ति को मृत मानकर पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया था, उसके तीन दिन बाद जीवित घर लौट आने से पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया।
पुलिस ने मामले की विवेचना के बाद झूठी पहचान प्रस्तुत कर विधिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप में तीन नामजद लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है। साथ ही यह पता लगाने में जुटी है कि जिस शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया, वह मृत व्यक्ति कौन था? इटावा, जालौन, कानपुर देहात समेत अन्य जनपदों की पुलिस से संपर्क साधा गया है। दर्ज गुमशुदगी की फाइलों के पन्ने भी पलटे जा रहे।
पुलिस के अनुसार 18 जुलाई को कानपुर-इटावा हाईवे पर भीखेपुर गांव के निकट पूर्व विधायक मदन सिंह गौतम के जर्जर होटल के पास एक अज्ञात शव बरामद हुआ था। शव कई दिन पुराना होने तथा चेहरा क्षतिग्रस्त होने के कारण उसकी पहचान संभव नहीं हो पा रही थी।
नियमानुसार शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और उसकी शिनाख्त कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी दौरान ग्राम सैदपुर अड्डा नंबर-3 निवासी वृजभान सिंह, राजेश कुमार तथा दशरथ सिंह थाना अजीतमल पहुंचे और लिखित प्रार्थना पत्र देकर शव की पहचान कमल सिंह उर्फ छुन्ना पुत्र सोनेलाल के रूप में की।
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स्वजनों द्वारा पहचान की पुष्टि किए जाने के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया और शव उन्हें सुपुर्द कर दिया। इसके बाद पूरे रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। घटना ने उस समय अप्रत्याशित मोड़ ले लिया जब अंतिम संस्कार के तीसरे दिन कमल सिंह जीवित अपने घर लौट आया।
उसे देखकर स्वजन, ग्रामीण और पुलिस सभी हैरान रह गए। इसके बाद यह सवाल खड़ा हो गया कि जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह आखिर किसका था। पुलिस ने मामले की दोबारा गहन जांच शुरू की। पूछताछ में कमल सिंह की पत्नी सुनीता ने बताया कि पारिवारिक विवाद के चलते कमल सिंह करीब डेढ़ वर्ष पहले घर छोड़कर चला गया था।
वह पानीपत, ग्वालियर सहित अन्य स्थानों पर मजदूरी करता रहा। इस दौरान दोनों के बीच संपर्क भी टूट गया था। बाद में पत्नी के फोन पर जानकारी मिलने के बाद वह सीधे गांव लौट आया। विवेचना के दौरान पुलिस को प्रथम दृष्टया यह तथ्य मिला कि अज्ञात शव की पहचान गलत एवं भ्रामक तरीके से कराई गई थी।
पुलिस का आरोप है कि झूठी पहचान प्रस्तुत कर न केवल विधिक प्रक्रिया को प्रभावित किया गया, बल्कि अज्ञात शव के वास्तविक वारिसों तक पहुंचने की संभावना भी प्रभावित हुई। इसी आधार पर उपनिरीक्षक अभय प्रताप की तहरीर पर सोनेलाल, वृजभान सिंह एवं राजेश कुमार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस अब पूरे घटनाक्रम से जुड़े प्रत्येक पहलू की जांच कर रही है। पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) अजीतमल मनोज गंगवार ने बताया, 'अज्ञात शव की पहचान के संबंध में प्रस्तुत तथ्यों की जांच में प्रथम दृष्टया गलत पहचान कराए जाने की बात सामने आई है। इस आधार पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
मामले की निष्पक्ष एवं गहन विवेचना कराई जा रही है। जो भी तथ्य और साक्ष्य जांच में सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिस अज्ञात शव का अंतिम संस्कार हुआ था, उसकी वास्तविक पहचान स्थापित करने के प्रयास भी जारी हैं।'
पुलिस का कहना है कि विवेचना पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह प्रकरण जनपद के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गया है, क्योंकि मृत घोषित कर अंतिम संस्कार किए जाने के बाद किसी व्यक्ति का जीवित लौट आना अत्यंत दुर्लभ और असामान्य घटना है।