औरैया सदर विधानसभा के कई मोहल्लों में जलभराव की समस्या बरकरार, ट्रॉमा सेंटर पर उठ रहे सवाल
औरैया सदर विधानसभा में विधायक के चार साल के कार्यकाल की समीक्षा की गई, जिसमें जलभराव और ट्रॉमा सेंटर जैसी प्रमुख समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। विधायक न ...और पढ़ें

भाजपा विधायक गुड़िया कठेरिया।
HighLights
औरैया सदर में जलभराव की समस्या आज भी गंभीर है।
ट्रामा सेंटर में चिकित्सकों और उपकरणों की कमी बनी हुई है।
विधायक ने 40 से अधिक सड़कों के निर्माण का दावा किया।
जागरण संवाददाता, औरैया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। वर्ष 2022 में चुने गए विधायकों का कार्यकाल अंतिम पड़ाव में पहुंच चुका है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि चुनाव के समय जिन समस्याओं को लेकर जनता ने अपने जनप्रतिनिधियों पर भरोसा जताया व कितना बदलाव आया।
विधानसभा क्षेत्रों की पांच प्रमुख समस्याएं सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, जलभराव या अतिक्रमण जैसे मुद्दों के समाधान के लिए पिछले चार वर्षों में क्या प्रयास हुए, कितनी योजनाएं धरातल पर उतरीं और कितने काम अब भी अधूरे हैं।
इसके अलावा जिन समस्याओं के समाधान का दावा किया गया था, वे वास्तव में खत्म हुईं या आज भी लोगों की परेशानी बनी हुई हैं। पांच बड़ी समस्याएं शहर का जलभराव, ट्रॉमा सेंटर, सेंगुर नदी पर पुल, रोडवेज बसों की बाईपास से न होकर कस्बा
में सुविधा, शहर की यातायात व्यवस्था। इनमें कुछ समस्याओं का समाधान हो गया लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद भी कई समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं।
नगर पालिका क्षेत्र में जलभराव की समस्या बड़ी है। नगर पालिका क्षेत्र की बात करें तो 25 वार्डों के मोहल्लों में बारिश के मौसम में घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। पालिका को यहां भरने वाला पानी पंपसेट लगाकर निकालना पड़ता है। कई मुहल्लों में वर्ष भर पानी भरा रहता है।
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जलभराव की बड़ी समस्या है, आधा शहर इससे त्रस्त है। नगर पालिका क्षेत्रों में दिक्कतें ज्यादा हैं। अजीतमल नगर पंचायत की बात करें तो यहां भी समस्याएं कम नहीं हैं। बारिश के मौसम में घरों से निकलना ही मुश्किल हो जाता है।
वर्ष 2022 में कानपुर-इटावा हाईवे किनारे भगौतीपुर गांव में ट्रॉमा सेंटर बनाया गया। करीब 2.64 करोड़ के बजट से कार्य हुआ। घायलों को त्वरित उपचार मिले, इस उद्देश्य से कार्यों को कराया गया। यहां ट्रॉमा सेंटर अब तक पूरी तरह से संचालित नहीं हो सका। इसके पीछे का कारण चिकित्सकों व उपकरणों की कमी है। अजीतमल बस स्टैंड पर बसों का ठहराव यात्रियों को नहीं मिला। चुनिंदा सुविधाएं ही मिलीं।
कानपुर-इटावा हाईवे से होकर निकलने वालीं बसें अजीतमल-बाबरपुर कस्बा से होकर बस स्टैंड पर नहीं पहुंचती। वर्षों पुरानी इस समस्या का निस्तारण नहीं हो सका। शहर के जर्जर संस्कृत महाविद्यालय भवन निर्माण के लिए विधायक की ओर से प्रयास हुए।
प्रस्ताव शासन में भेजा गया। स्वीकृति होने के बाद प्रबंध समिति में विवाद होने की वजह से कार्य नहीं हो सका। सेंगुर नदी पर एक पुल प्रस्तावित है, मंडी समिति में जलभराव की समस्या के निदान का सफल प्रयास किया। जिसमें बजट स्वीकृत होकर टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द ही कार्य शुरू हो जाएगा।
विकासखंड अजीतमल में ग्राम बीजलपुर में यमुना नदी पर पुल, पहुंच मार्ग व अतिरिक्त सुरक्षात्मक कार्य के लिए 167.61 करोड़ का प्रस्ताव। विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न 48 सड़कों का निर्माण कार्य कराया गया। औरैया-फफूंद मार्ग फोर लेन निर्माण के लिए 12.50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पास हुआ।
भाजपा विधायक गुड़िया कठेरिया का कहना है कि शहर के जलभराव के लिए सार्थक प्रयास किए गए। मुख्य कारणों को दूर कराने का प्रयास जारी है। गोहानीकलां से गोहानी खुर्द तक सड़क मार्ग का निर्माण कराया जा रहा। 40 से अधिक सड़कें बनाई गईं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरलाकिंग व सड़क निर्माण पर जोर दिया गया।
दूसरी ओर कानपुर-इटावा बाईपास से होकर निकलने वालीं बसों को अजीतमल-बाबरपुर कस्बा मार्ग से निकाले जाने के संबंध में प्रशासन से पत्राचार किया गया। सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर भी समस्याओं को बताया गया। काफी हद तक समस्या दूर हुई। वंदन योजना के तहत गौरैया तालाब, मां मंगला काली मंदिर, जिले के एकमात्र ब्रम्हाजी के मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में हाई मास्ट लाइटें लगाईं गईं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरलाकिंग मार्ग के साथ पक्की सड़कों पर काम हुआ। मंडी समिति के सामने कानपुर-इटावा हाईवे पर फुट ओवरब्रिज निर्माण को स्वीकृति मिल चुकी है।
विपक्षी प्रत्याशी ने क्या कहा
वर्ष 2022 के चुनाव में दूसरे नंबर रहे सपा प्रत्याशी जितेंद्र कुमार दोहरे ने कहा कि पांच साल में सदर विधान सभा में धरातल पर काम नहीं दिखा। वो चाहे चिकित्सा का क्षेत्र हो या फिर अन्य। जलभराव की समस्या आज भी शहर में है। जरा सी वर्षा में वार्डों से लेकर सड़कों पर पानी भर जाता है। चिकित्सा के क्षेत्र में भी कार्य नहीं दिखा। चिकित्सकों की कमी आज भी खलती है। शिक्षा हो या फिर अन्य क्षेत्र, जनता को इसका लाभ नहीं मिल सका। बिजली व्यवस्था भी कई क्षेत्रों में ठीक नहीं। उपकेंद्र सिर्फ नाम के हैं।
लोगों की प्रतिक्रियाएं
सदर विधायक का सरल व मृदुभाषी होना बड़ी उपलब्धि है। धार्मिक, सामाजिक व राजनैतिक मंच पर हमेशा उपस्थिति रहती है। जनसमस्याओं का सामना करने में हिचकती नहीं हैं। विकास कार्यों की बात करें तो शहर में एक दर्जन से अधिक सड़कों का निर्माण कराया है। -अनुराग अग्रवाल।
हम उम्र के लोगों का सम्मान करना, बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने में वह कभी नहीं हिचकतीं। शिष्टाचार दिखावा नहीं है। जो व्यवहार उनका चुनाव के दौरान था, वह आज भी है। जब भी किसी समस्या को लेकर बुलाया। उन्होंने आकर निराकरण का प्रयास किया। -डॉ. एसएसएस परिहार।
मंडी समिति की समस्याओंं को लेकर सदर विधायक को एक ही पत्र दिया गया। जिसका संज्ञान लेकर प्रदेश स्तर तक पहल की। परिणाम सामने है कि मंडी समिति की सड़क, नाला, नाली निर्माण आदि के लिए पांच करोड़ रुपये का बजट पास हो गया। सरल व सदव्यवहार उनके कद को और ऊंचा करता है। -जमाली सिंह, आढ़ती।
चुनावी वायदों पर अमल करना हर किसी के वश की बात नहीं होती। प्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद सालों नजर ही नहीं आते। लेकिन सदर विधायक का व्यवहार व भाषा शैली पर नियंत्रण राजनीतिक कुशलता है। जिसका लाभ उन्हें राजनैतिक जीवन में हमेशा मिलेगा। -अनिल पांडेय, व्यवसायी।
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