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सारी किस्तें चुकाने के बाद भी क्रेडिट स्कोर हुआ खराब, उपभोक्ता आयोग ने फाइनेंस कंपनी पर लगाया जुर्माना

Published: Sat, 18 Jul 2026 05:17 PM (IST)

औरैया में एक उपभोक्ता का समय से पहले ऋण चुकाने के बावजूद क्रेडिट स्कोर खराब हो गया, जिस पर जिला उपभोक्ता आयोग ने महिंद्रा फाइनेंस को दोषी पाया।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. उपभोक्ता ने समय से पहले वाहन ऋण चुकाया था।

  2. महिंद्रा फाइनेंस की गलती से क्रेडिट स्कोर खराब हुआ।

  3. उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को हर्जाना देने का आदेश दिया।

जागरण संवाददाता, औरैया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने समय से पहले ऋण चुकता करने के बावजूद उपभोक्ता का क्रेडिट स्कोर खराब रखने के मामले में सख्त रुख अख्तियार किया।

अध्यक्ष जिला उपभोक्ता आयोग जगन्नाथ मिश्र ने विपक्षीगणों को सेवा में कमी का दोषी पाया। आयोग ने विपक्षीगण को 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता के रिकार्ड को दुरुस्त करने व उसे हर्जाना देने का आदेश दिया।

परिवादी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता संजीव पांडेय ने बताया कि ग्राम अनंतराम महेवा निवासी अनिल त्रिपाठी ने 12 अक्टूबर 2009 को महिंद्रा फाइनेंस से वाहन ऋण लिया था, जिसकी अंतिम किस्त 15 अगस्त 2012 को देय थी।

परिवादी ने तय समय से पहले ही 6 मार्च 2012 तक पूरी ऋण राशि जमा कर दी थी। फाइनेंस कंपनी द्वारा लोन क्लोजर की सूचना सिबिल को नहीं दिए जाने के कारण सिबिल पोर्टल पर उनके खाते में सूट फाइल की गलत एंट्री दर्ज हो गई थी।

परिवादी को 8 जून 2025 को जानकारी हुई कि क्रेडिट स्कोर और पर्सनल लोन स्कोर में भारी गिरावट आई है, जिसके कारण उन्हें अन्य वित्तीय संस्थाओं से वित्तीय सहायता मिलना बंद हो गई थी।

कई बार शिकायत करने व कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो अनिल त्रिपाठी ने अधिवक्ता के माध्यम से उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया।

साक्ष्यों का अवलोकन कर आयोग ने माना कि उपभोक्ता द्वारा समय से पूर्व ऋण अदा करने के बावजूद गलत स्कोर दर्ज करना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी है।

जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्र, सदस्य अमिता निगम व जितेंद्र सिंह कुशवाह की न्यायपीठ ने आदेश दिया कि विपक्षीगण 45 दिनों के भीतर सूट फाइल की एंट्री को डिलीट करें और परिवादी का क्रेडिट स्कोर नियमानुसार शुद्ध करें। इसके अतिरिक्त परिवादी को मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए 8,000 रुपये और वाद व्यय 5,000 रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।

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