अयोध्या में फर्जी हाजिरी वालों पर शिकंजा, अब तक दो हजार श्रमिक नहीं दे सके जीवित होने का प्रमाण
अयोध्या के रुदौली में विकसित भारत ग्राम रोजगार योजना के तहत 90% मजदूरों की ई-केवाईसी पूरी हो गई है, पर 2,023 जॉबकार्ड धारक अभी भी जीवित होने का प्रमाण ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
रुदौली में 90% मजदूरों की ई-केवाईसी पूर्ण, 2,023 लंबित।
फर्जी हाजिरी रोकने को आधार फेस प्रमाणीकरण अब कार्यस्थल पर।
तकनीकी दिक्कतें दूर कर सभी पात्र मजदूरों की ई-केवाईसी होगी।
संवाद सूत्र, रुदौली (अयोध्या)। विकसित भारत ग्राम रोजगार योजना (वीबीजी-राम जी) में फर्जी उपस्थिति और प्राक्सी मजदूरों पर लगाम कसने के लिए शुरू की गई आधार आधारित ई-केवाईसी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।
विकासखंड रुदौली में पंजीकृत 20,223 सक्रिय मजदूरों में से करीब 18,200 (90 प्रतिशत) की ई-केवाईसी जून माह में ही पूरी कर ली गई, लेकिन 2,023 जॉबकार्ड धारक अब भी जीवित होने का प्रमाण नहीं दे सके हैं।
ऐसे में क्षेत्र में इस बात की चर्चा है कि जिन जाब कार्डों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है, उनमें से अधिकांश केवल फर्जी हाजिरी और भुगतान के लिए बनाए गए थे। हालांकि विभाग ने इन अटकलों को सिरे से खारिज किया है।
खंड विकास अधिकारी अखिलेश कुमार गुप्ता ने बताया कि शेष बचे जॉबकार्ड धारकों की ई-केवाईसी न होने के पीछे तकनीकी और दस्तावेजी कारण हैं। कई मजदूरों के आधार कार्ड में नाम, जन्म तिथि अथवा अन्य विवरण में त्रुटियां हैं। कुछ मामलों में आधार से मोबाइल नंबर लिंक नहीं है, जबकि कई जगह फेस आथेंटिकेशन और नेटवर्क संबंधी तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि इन कमियों को दूर करा कर सभी पात्र मजदूरों की ई-केवाईसी पूरी कराई जाएगी। नई व्यवस्था के तहत अब कार्यस्थल पर ही आधार फेस प्रमाणीकरण के जरिए यह सत्यापित किया जाता है कि जाब कार्डधारक स्वयं काम कर रहा है।
यदि वास्तविक मजदूर मौजूद नहीं होगा तो फेस आथेंटिकेशन असफल हो जाएगा, जिससे न उपस्थिति दर्ज होगी और न ही मजदूरी का भुगतान होगा। इससे फर्जी हाजिरी, प्राक्सी मजदूर और भुगतान में गड़बड़ी की संभावना काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।