चढ़ावा चोरी मामला: आरोपी सुभाष ने कोर्ट में पेश किया बैंक लेनदेन का ब्योरा, 3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपित पूर्व बैंककर्मी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ने अपने पेंशन खाते के लेनदेन का विस्तृत ब्योरा कोर्ट में पेश किया। ...और पढ़ें

HighLights
सुभाष ने पेंशन खाते के 45 बिंदुओं का ब्योरा दिया।
अभियोजन ने जवाब देने के लिए कोर्ट से समय मांगा।
अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी, कोर्ट ने तय की।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में आरोपित पूर्व बैंककर्मी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ने गुरुवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा के न्यायालय में अपने पेंशन खाते में हुए प्रत्येक लेनदेन के पाई-पाई का हिसाब दिया।
अपनी आपत्ति में सुभाष ने विवेचक की आख्या पर ही कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बचाव पक्ष की आपत्ति पर जवाब देने के लिए अभियोजन ने समय मांगा, जिस पर न्यायालय ने तीन अगस्त की तिथि नियत की है।
जेल में निरुद्ध सुभाष श्रीवास्तव ने बीती 18 जुलाई को पेंशन खाते से निकासी पर लगी रोक को हटाने के लिए न्यायालय में अर्जी प्रस्तुत की थी। कहा था कि खाता सीज होने से दवा-इलाज, बिजली बिल इत्यादि के भुगतान पर संकट आ गया। पेंशन खाता ही परिवार के जीविकोपार्जन का आधार है।
इस अर्जी पर विवेचक क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने 21 जुलाई को अपनी आख्या प्रस्तुत करते हुए सीजर की कार्रवाई को विवेचना का हिस्सा बताया था। हालांकि, 23 जुलाई को न्यायालय ने उनकी इस आख्या को संतोषजनक न मानते हुए पुन: 27 जुलाई को स्पष्ट आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया था।
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विवेचक की आख्या पर सुनवाई करते हुए 27 जुलाई को न्यायालय ने सुभाष की माह जून 2026 की पेंशन राशि जो जुलाई 2026 में खाते में अंतरित हुई है, को बैंक से निकालने की अनुमति प्रदान कर दी थी और 30 जुलाई की तिथि नियत की।
गुरुवार को बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि अपनी आख्या में विवेचक ने कहीं स्पष्ट नहीं किया गया है कि पेंशन खाते में जमा कौन-सी धनराशि राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण से संबंधित अथवा संदिग्ध मानी गई है। पुलिस जानबूझकर यह नहीं बता रही है कि पेंशन खाता सीज करने के बाद न्यायालय को कब सूचित किया गया।
45 बिंदुओं में दिया राशि का विवरण
बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष 45 बिंदुओं में विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए खाते में जमा प्रत्येक राशि का स्रोत, तिथि और कारण क्रमवार बताया। साथ ही 30 हजार रुपये की नकद एंट्री पर भी अधिवक्ता ने बताया कि उक्त राशि एक मुकदमे के सिलसिले में अधिवक्ता की फीस के लिए अन्य माध्यम से पेंशन खाते में भेजी गई थी।