रामलला को कजरी से रिझाने वालों पर दिल खोलकर खर्च करने की तैयारी, कलाकारों को मिलेगा मानदेय
अयोध्या में सावन झूला मेला के दौरान रामलला के लिए कजरी और लोकगीत प्रस्तुत करने वाले कलाकारों पर सरकार लाखों रुपये खर्च करेगी। ...और पढ़ें

प्रभु रामलला।

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प्रहलाद तिवारी, अयोध्या। सावन की रिमझिम फुहार और कजरी की मधुर तान... रामनगरी में रामलला के दरबार तक लोकगीतों की मिठास पहुंचेगी। सावन झूला मेला के अवसर पर रामलला को कजरी और सावन के गीतों से रिझाने वाले कलाकारों पर सरकार भी दिल खोलकर खर्च करेगी।
संस्कृति निदेशालय ने इन कलाकारों के मानदेय के लिए लाखों रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। रामलला के दरबार सहित तुलसी स्मारक भवन स्थित अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
इसमें कजरी गायन, सावन आधारित लोकगायन, लोकनृत्य और नृत्य-नाटिका की प्रस्तुतियां होंगी। कजरी गायन के लिए एक कलाकार को दो लाख रुपये तक का मानदेय प्रस्तावित किया गया है। वहीं अन्य लोक कलाकारों को उनकी प्रस्तुति और दल के सदस्यों की संख्या के आधार पर 30 से 70 हजार रुपये तक मानदेय मिलेगा।
कलाकारों के मानदेय पर करीब सात लाख 12 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। मंच, ध्वनि-प्रकाश, टेंट, कलाकारों के आवास-भोजन और प्रचार-प्रसार समेत पूरा आयोजन करीब छह लाख 50 हजार रुपये का होगा।
खास बात यह है कि सावन की लोक परंपरा कजरी को रामनगरी के धार्मिक-सांस्कृतिक वातावरण से जोड़ते हुए कलाकारों को प्रोत्साहन देने की तैयारी है। इससे रामनगरी आने वाले श्रद्धालुओं को भी लोक संस्कृति और भक्ति संगीत का संगम देखने-सुनने को मिलेगा।
इन कलाकारों को मिलेगा मौका
मिर्जापुर की पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव, अयोध्या की सुमन यादव, शीतला प्रसाद, रीता शर्मा, अंबेडकनगर की प्रतिमा यादव, रायबरेली की नलिनी त्रिपाठी, वाराणसी की विदुषी गुप्ता, लखनऊ की अन्नपूर्णा श्रीवास्तव, गोरखपुर के सुगम सिंह, बाराबंकी की शशि चतुर्वेदी सावन पर आधारित कजरी, लोक गीत व नृत्य नाटिका प्रस्तुत करेगी।