चढ़ावा चोरी मामला: निर्मोही अखाड़ा में आपसी मतभेद उजागर, ट्रस्टी महंत दिनेंद्रदास को हटाने का दावा
रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि महंत दिनेंद्रदास को हटाए जाने को लेकर अखाड़ा में अंतर्कलह उजागर हुई है। ...और पढ़ें

ट्रस्टी महांत दिनेंद्र दास
HighLights
निर्मोही अखाड़ा में प्रतिनिधि दिनेंद्रदास को लेकर अंतर्कलह।
रामजन्मभूमि ट्रस्ट में दिनेंद्रदास की सदस्यता पर सवाल।
राजाराम चंद्राचार्य ने ट्रस्ट पुनर्गठन की याचिका दायर की।
संवाद सूत्र, अयोध्या। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में महांत दिनेंद्रदास निर्मोही अखाड़ा का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्हें निर्मोही अखाड़ा की महांती से हटाए जाने का दावा किया गया है। दिनेंद्रदास को सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार छह वर्ष पूर्व गठन के समय से ही तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में शामिल किया गया है।
उन्हें शामिल किए जाने का आधार रामनगरी में ही स्थित निर्मोही अखाड़ा की प्रारंभिक पीठ का तत्कालीन महांत होना रहा है, संकोची और मृदुभाषी दिनेंद्रदास को तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए उपयोगी भी माना जाता रहा है। असहमति उनके स्वभाव में कम से कम है।
उनका ट्रस्ट सदस्य होना उन लोगों को न्यायसंगत नहीं लगा, जो अखाड़ा के प्रतिनिधि के रूप में राम मंदिर की प्रभावी पैरवी करते रहे। आज जहां चढ़ावा चोरी से तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पहले ही विचलित है, वहीं अखाड़ा के ऐसे प्रतिनिधियों का प्रतिरोध भी मुखर हो गया है। अखाड़ा के सरपंच जिन राजाराम चंद्राचार्य ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत कर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है, वह छठवें-सातवें दशक से ही अदालत में राम मंदिर के लिए अखाड़ा की दावेदारी के सजग प्रहरी रहे।
राम मंदिर के प्रति उनकी विधिक समझ, बौद्धिक प्रखरता और वरिष्ठता के चलते ट्रस्ट में उनके शामिल होने की संभावना सर्वाधिक थी, तो अखाड़ा के पंच और राम मंदिर के प्रतिष्ठित-प्रमाणिक पक्षकार के रूप में नाका हनुमानगढ़ी के महांत भी राम मंदिर ट्रस्ट में शामिल किए जाने के योग्य माने जा रहे थे।
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जहां राजाराम चंद्राचार्य ने याचिका में तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है, वहीं महांत रामदास ने दिनेंद्रदास के मानसिक स्वास्थ्य का सवाल उठा कर कहा कि वह न केवल राम मंदिर ट्रस्ट, बल्कि ट्रस्ट में निर्माेही अखाड़ा का प्रतिनिधित्व लायक नहीं रह गए हैं।
उन्होंने तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में परिवर्तन का समर्थन भी किया। इस बीच दिनेंद्रदास ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा में उनके प्रतिरोध का विशेष अर्थ नहीं है। उनके अनुसार अखाड़ा के 19 पंचों में से 13 पंच उनके साथ हैं। महांत दिनेंद्रदास ने महांती से हटाए जाने की खबरों पर भी प्रतिक्रिया दी।