अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में नृपेंद्र मिश्र अलग-थलग, चढ़ावा चोरी स्वीकारना पड़ा भारी
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र, चढ़ावा चोरी स्वीकारने और कुछ ट्रस्टियों पर अनियमितता का आरोप लगाने के बाद ट्रस्ट में अलग-थलग पड़ गए ...और पढ़ें

मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र। जागरण
HighLights
नृपेंद्र मिश्र चढ़ावा चोरी स्वीकारने के बाद ट्रस्ट में अलग-थलग।
उनकी समीक्षा बैठकें नहीं हो पा रही, ट्रस्ट बैठकों से भी दूर।
अयोध्या दौरा भी कम हुआ, मीडिया में स्वीकारोक्ति बनी वजह।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद अचानक सक्रिय हुए मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अब साइलेंट मोड में हैं। जांच के लिए एसआइटी गठित होने पर मीडिया में चोरी स्वीकार लेने और कुछ ट्रस्टियों के विरुद्ध बोल कर अनियमितता को मान लेने से वह अलग-थलग पड़ गए हैं। दस जुलाई के बाद उनका अगला दौरा नहीं तय हो पा रहा, जबकि पहले वह प्रत्येक पखवारे रामजन्मभूमि परिसर पहुंच निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते थे।
पांच अगस्त तक उनकी समीक्षा बैठक नहीं तय हो पाई है। कार्यदायी एजेंसियों के अधिकारी उनके कार्यालय से ई-मेल आने का इंतजार कर रहे हैं। इसी बैठक में कार्यदायी एजेंसी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) व टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (टीसीई) की विदाई भी की जानी है। निर्माण कार्य पूरा होने से विदाई 20 जुलाई तक तय हुई थी।
पांच जून को चोरी उजागर होने के बाद नौ जून को मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अचानक अयोध्या आए थे। उन्होंने परिसर में ट्रस्टियों के साथ बैठक कर इसकी गोपनीय रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को दी थी। इसी बीच प्रकरण के मीडिया की सुर्खियां बनने पर राज्य सरकार ने एसआइटी गठित कर जांच शुरू कराई तो नृपेंद्र मिश्र ने मीडिया से बात करते हुए न केवल चढ़ावा चोरी को स्वीकारा था, बल्कि इसे डाका तक कह दिया था। साथ ही कुछ ट्रस्टियों की ओर से अनियमितता बरतने की भी बात कही थी।
हालांकि उन्होंने पूर्व महासचिव चंपतराय का बचाव किया था। बावजूद इसके उनकी यह स्वीकारोक्ति ट्रस्ट से जुड़े कुछ कर्मियों और मंदिर के सेवादारों को रास नहीं आई। उनके प्रति आक्रोश इतना उपजा कि नृपेंद्र मिश्र गत दस जुलाई को निर्माण कार्य की समीक्षा करने अयोध्या पहुंचे, तो कार्यदायी एजेंसियों के अधिकारियों के अलावा कोई ट्रस्टी उनसे मिला ही नहीं। मिश्र ने भी किसी से मुलाकात नहीं की और तीन दिनों के दौरे को दो दिन में निपटा कर दिल्ली वापस हो गए।
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उन्होंने लौटते समय पत्रकारों से बातचीत में यह भी कहा था कि चढ़ावा चोरी की घटना से स्वयं को छोटा महसूस कर रहा हूं। इन्हीं बातों से वह इतने अलग-थलग पड़ गए हैं कि गत 22 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में उन्हें न तो बुलाया गया, न ही जानकारी दी गई। इससे पहले छह जुलाई की बैठक में भी वह नहीं शामिल हुए थे।
निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने दूरभाष पर ‘दैनिक जागरण’ से बातचीत में कहाकि समीक्षा बैठक की तिथि शीघ्र ही तय की जाएगी। अभी नहीं निश्चित हो पाई है। वह आनलाइन समीक्षा तो नियमित रूप से कर रहे हैं।