राम मंदिर दान गबन जांच के बीच नृपेंद्र मिश्र बन सकते हैं ट्रस्ट के CEO, बयानों से तेज हुई अटकलें
राम मंदिर की दानराशि में गबन की एसआईटी जांच के बीच नृपेंद्र मिश्र को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बनाए जाने ...और पढ़ें

HighLights
नृपेंद्र मिश्र राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ बन सकते हैं।
दानराशि गबन मामले की एसआईटी जांच चल रही है।
उनका निर्माण समिति अध्यक्ष कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर की दानराशि में गबन मामले की एसआईटी (विशेष जांच दल) जांच के बीच ही राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष व पूर्व आईएएस नृपेंद्र मिश्र को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किए जाने की अटकलें शुरू हो गई हैं।
एसआईटी के किसी प्रशासनिक अधिकारी को ट्रस्ट में सीईओ के रूप में नियुक्त करने की संस्तुति करने और हाल ही में सामने आए उनके बयानों से यह संभावना प्रबल हो उठी है।
माना जा रहा कि रामजन्मभूमि परिसर में मंदिरों का निर्माण पूरा हो जाने के कारण समाप्त हो रहे मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष के कार्यकाल के बाद उन्हें सीईओ बनाया जा सकता है। हालांकि यह एसआईटी जांच पूरी हो जाने के बाद ही किए जाने की संभावना है।
दानपात्रों की धनराशि में गणना के दौरान गबन का प्रकरण सामने आने के बाद निर्माण समिति के चेयरमैन के रूप में नृपेंद्र मिश्र दो बार (नौ व 13 जून) अयोध्या आए और दोनों बार उन्होंने इस प्रकरण पर स्थानीय मीडियाकर्मियों के सामने चुप्पी साधे रही।
इसी बीच जब राज्य सरकार ने मामले की विस्तृत जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी और तीनों सदस्य जांच करने यहां पहुंचे, तो चंद दिनों के अंतराल पर पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र का एक के बाद एक मीडिया में बयान सामने आता गया। इसमें उन्होंने न केवल दानराशि में चोरी मानी, बल्कि इसे ‘डाका’ तक कह दिया।
खबरें और भी
इसी के साथ उन्होंने ट्रस्टियों के स्तर से वित्तीय पारदर्शिता में बड़ी चूक भी माना और प्रत्येक स्तर पर निगरानी प्रबंधन को मजबूत किए जाने की आवश्यकता जताई। एसआईटी जांच में प्रत्येक स्तर पर गड़बड़ियां सामने आईं और मीडिया में खबरें प्रसारित होने लगीं, तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर ट्रस्ट महासचिव चंपतराय का बचाव करते हुए उन्हें निर्दोष भी बता दिया।
एसआईटी ने की प्रशासकीय अधिकारी को सीईओ बनाने की संस्तुति
प्रारंभिक रिपोर्ट में एसआईटी ने किसी प्रशासकीय अधिकारी को सीईओ बनाने की संस्तुति की, तो अब माना जा रहा कि केंद्र सरकार के स्तर से उन्हें सीईओ बनाया जा सकता है। इस संभावना को इससे भी बल मिल रहा कि उनका निर्माण समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल समाप्त हो रहा।
सभी मंदिरों व प्रकल्पों को ट्रस्ट को हैंडओवर कर दिए जाने के बाद इस समिति का अस्तित्व नहीं रह जाएगा। नृपेंद्र मिश्र, गठन के समय से ही ट्रस्ट के सदस्य हैं। उनके निर्देशन में ही समस्त निर्माण हुआ है। वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सलाहकार और पीएमओ में प्रमुख सचिव भी रहे हैं। उन्हें लंबा प्रशासकीय अनुभव प्राप्त है। ऐसी स्थिति में किसी अन्य अधिकारी की सीईओ के रूप में तैनाती के आसार काफी क्षीण हैं।