Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    विश्वसनीयता के संकट से जूझ रहा रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, संतों को साधने में जुटे स्वामी गोविंददेव गिरि

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 05:35 AM (IST)

    चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट विश्वसनीयता के संकट से जूझ रहा है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि संतों से स ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    HighLights

    1. चढ़ावा चोरी के कारण ट्रस्ट विश्वसनीयता संकट का सामना कर रहा है।

    2. कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि डैमेज कंट्रोल के प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं।

    3. आरएसएस और विहिप नेता भी संतों से संवाद में सहयोग कर रहे हैं।

    रघुवरशरण, अयोध्या। चढ़ावा चोरी के चलते विश्वसनीयता के संकट का सामना कर रहा रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट संतों को साधने में लगा है। यह अभियान चलाने के लिए उसे अघोषित तौर पर आरएसएस एवं विहिप के नेताओं का भी सहयोग मिल रहा है।

    इसी के साथ ट्रस्ट की लाचारी भी बयां हाे रही है। ट्रस्ट अपने जिन दो सर्वाधिक सशक्त-सक्रिय प्रतिनिधियों के बूते जाना जाता था, वह स्वयं चढ़ावा चोरी विवाद में त्यागपत्र दे चुके हैं। वैसे तो रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट 15 सदस्यीय है, किंतु गिनती के कुछ ट्रस्टियों को छोड़ कर शेष बैठकों तक ही सीमित रहते हैं।

    यद्यपि ट्रस्ट अध्यक्ष महांत नृत्यगाोपालदास मंदिर आांदोलन, अयोध्या और हिंदुत्व के सबसे प्रभावी चेहरे रहे हैं, किंतु राम मंदिर के भूमि पूजन के बाद से ही लगातार बीमारी और बढ़ती उम्र के चलते उनकी उपस्थिति प्रतीकात्मक होकर रह गई है। महांत दिनेंद्रदास अवश्य अपने स्तर से पूरी सक्रियता बरत रहे हैं, किंतु उनकी अपनी सीमा है।

    ट्रस्ट के एक अन्य प्रभावी सदस्य और मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र जरूर अपनी भूमिका के प्रति सजग दिखते हैं, किंतु वह ट्रस्ट का बचाव करने के फेर में न पड़ कर स्वयं को निर्माण संबंधी गतिविधियों तक केंद्रित रखना पसंद करते हैं। ऐसे में ट्रस्ट के गैरिक वसनी कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ट्रस्ट की साख बचाने के लिए अकेले मोर्चा ले रहे हैं।

    खबरें और भी

    वह चढ़ावा चोरी के बाद छह जुलाई को ट्रस्ट की पहली बैठक से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए मीडिया का सामना करने के लिए आने वाले पहले व्यक्ति थे। ...तो अगले तीन दिन तक उन्होंने रामनगरी में डेरा डाल कर स्थानीय संतों से संवाद कर डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया।

    संतों का भरोसा हासिल करने के अभियान में वह गोपाल राव भी सक्रिय हैं, जिन्हें छह जुलाई की बैठक में ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य होने के पद से वंचित होना पड़ा। तथापि वह पूरी जवाबदेही से संतों के बीच ट्रस्ट की बेगुनाही सिद्ध करने में जुटे हैं।

    शीर्ष पीठ रामवल्लभाकुंज में संतों के बीच गाोपाल राव ने कहा कि चोरी कुछ लोगों ने की है, लेकिन पूरे राम मंदिर ट्रस्ट को बदनाम किया जा रहा है। ट्रस्ट की चुप्पी का गलत अर्थ निकाला गया। संतों ने भी उन्हें प्रोत्साहित किया तथा कहा, रामभक्तों का भ्रम दूर करने के लिए ट्रस्ट को तथ्यों के साथ खुल कर सामने आना चाहिए।

    रामनगरी के शीर्ष संतों में शुमार रामवल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमारदास ट्रस्ट के ऐसे प्रयासों का स्वागत करते हुए कहते हैं, रामभक्तों का भ्रम दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। तुलसीदास छावनी के महांत जनार्दनदास के अनुसार स्वामी गोविंददेव गिरि ने मीडिया के सामने जो तथ्य रखे, उससे काफी हद तक दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।

    विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज एवं संघ के प्रांत प्रचारक कौशल किशोर भी हाल के दिनाें में संतों से भेंट के साथ डैमेज कंट्रोल का यत्न करते देखे जा रहे हैं।

    यह भी पढ़ें- राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपतराय से 7 बार हुई पूछताछ, SIT की जांच पूरी