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    राम मंदिर के भोग को अब तक नहीं मिला शुद्धता का प्रमाणपत्र, चढ़ावा चोरी के बाद अधर में फंसा मामला

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 05:30 AM (IST)

    राम मंदिर के भोग को FSSAI का शुद्धता प्रमाणपत्र ढाई साल बाद भी नहीं मिल पाया है। चढ़ावा चोरी मामले और पूर्व महासचिव के इस्तीफे के कारण यह प्रक्रिया अध ...और पढ़ें

    राम मंदिर

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    HighLights

    1. राम मंदिर भोग प्रमाणपत्र ढाई साल से लंबित।

    2. चढ़ावा चोरी मामले ने प्रमाणपत्र प्रक्रिया को रोका।

    3. पूर्व महासचिव के इस्तीफे से आवेदन प्रभावित।

    लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। भव्य मंदिर में रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के ढाई वर्ष बाद भी राम मंदिर के भोग को शुद्धता का प्रमाणपत्र नहीं मिल पाया है। दो माह पहले श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आवेदन के पश्चात एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) की टीम ने सीता रसोई का विभिन्न मानकों पर परीक्षण किया था।

    इसी बीच जून माह में चढ़ावा चोरी उजागर हुई, तो सब ठंडा पड़ गया। ट्रस्ट की ओर से कोई पैरवी नहीं किए जाने से प्रक्रिया अब भी लंबित बताई जा रही है। अब प्रमाणपत्र मिलेगा या नहीं, यह भी अधर में है। कारण यह कि ट्रस्ट की ओर से पूर्व महासचिव चंपतराय ने ही आवेदन किया था और चोरी मामले में उनका त्यागपत्र हो चुका है। अब वह ट्रस्ट पदाधिकारी भी नहीं रह गए हैं।

    रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी रामजन्मभूमि परिसर में मंदिरों का निर्माण कार्य जारी रहने और सीता रसोई के स्थायी नहीं होने से श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एफएसएसएआई में आवेदन नहीं किया था। गत वर्ष निर्माण पूर्ण हुआ और सीता रसोई को परकोटे की उत्तरी भुजा पर निर्मित मां अन्नपूर्णा मंदिर के समीप स्थायित्व मिला, तो ट्रस्ट की ओर से पूर्व महासचिव चंपतराय ने मंदिरों के भोग को एफएसएसएआई की ओर से प्रदान किए जाने वाले ‘भोग’ (ब्लिसफुल हाइजेनिक ऑफरिंग टू गाड) प्रमाणपत्र पाने के लिए आवेदन किया था।

    गत 27 व 28 मई को दिल्ली से आई पांच सदस्यीय टीम ने परिसर की सीता रसोई का गहन परीक्षण कर प्री-आडिट व पोस्ट ऑडिट किया था। रामलला के भोग में प्रयुक्त होने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, स्वच्छता व अन्य बिंदुओं को परखा था और भोग बनाने वाले रसोइयों व कोठारियों को फास्ट हाइजेनिक प्रशिक्षण दिया था।

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    तब खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से कहा गया था कि अब शीघ्र ही एफएसएसएआइ से प्रमाणपत्र निर्गत कर दिया जाएगा। दो माह से अधिक समय बीत गया, लेकिन अभी तक राम मंदिर को प्रमाणपत्र नहीं मिल सका है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त ग्रेड-दो देवाशीष उपाध्याय ने बताया कि राम मंदिर का भोग प्रमाणपत्र अभी प्रक्रियागत है। उन्हें यह नहीं पता कि कब तक मिल सकेगा। यह उनके स्तर का मामला नहीं है। नए सिरे से आवेदन करना पड़ेगा या नहीं, इसकी भी जानकारी उन्हें नहीं है।

    रामनगरी के चार मंदिरों को मिल चुका है प्रमाणपत्र

    एफएसएसएआई की ओर से मंदिरों के भोग को दिया जाने वाला ‘भोग’ प्रमाणपत्र शुद्धता का परिचायक है। यह अयोध्या की प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी, जैन मंदिर रायगंज, गुरुद्वारा नजरबाग व कनकभवन को पहले ही मिल चुका है। अन्य कई मंदिरों की ओर से भी इसके लिए आवेदन किया गया है।

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