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    राम मंदिर चढ़ावा चोरी: गणना कार्य से जुड़ते ही आरोपियों की आर्थिक स्थिति में आया था बदलाव, SIT जांच में बड़ा खुलासा

    Updated: Sun, 28 Jun 2026 09:55 AM (GMT+05:30)

    राम मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़ने के बाद चढ़ावा चोरी के आरोपियों की आर्थिक स्थिति तेजी से सुधरी, उन्होंने महंगी संपत्तियां खरीदीं और रिश्तेदारों को भी ...और पढ़ें

    कार मिस्त्री रहे लवकुश को छह माह पहले मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्रा के पिता रवींद्र ने रखवाया था। जागरण

    कार मिस्त्री रहे लवकुश को छह माह पहले मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्रा के पिता रवींद्र ने रखवाया था। जागरण

    HighLights

    1. आरोपियों ने मंदिर व्यवस्था से जुड़कर खरीदी महंगी संपत्तियां और वाहन।

    2. अनुकल्प मिश्रा ने रिश्तेदारों को भी मंदिर में नौकरी दिलवाई, संपत्ति बनाई।

    3. टिन्नू यादव के पास दानपात्र की चाबियां मिलीं, भतीजा भी नियुक्त।

    लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर की विभिन्न व्यवस्थाओं से जुड़ने के उपरांत चढ़ावा चोरी में पकड़े गए आरोपितों की आर्थिक स्थिति लगभग सुधरती चली गई थी। किसी ने महंगी जमीनें खरीदीं, तो किसी ने फ्लैट। किसी ने लग्जरी वाहन खरीद लिए, तो किसी ने बना बनाया घर। यही नहीं गणना कार्य से इन कर्मियों को जोड़ा गया, तो इसमें अधिक लाभ काे देखकर कइयों ने अपने रिश्तेदारों को भी ट्रस्टियों से पैरवी करके रखवा दिया गया। इससे भी बात नहीं बनी, तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अनुशंसा करा दी।

    ये आरोपित स्वयं तो लाभ कमाते ही रहे, अपने रिश्तेदारों व परिजनों की भी यदा-कदा सहायता करते रहे। आरोपितों के जेल चले जाने के बाद अब इनके परिजनों में मायूसी है, तो कुछ मंदिर से जुड़े अन्य लोगों की भी इसमें संलिप्तता की बात कह कर न्याय मिलने की आस संजोए हैं।

    मिल्कीपुर के बसावां गांव के रहने वाले अनुकल्प मिश्रा का परिवार पहले जैसे-तैसे गुजर-बसर करता रहा। बताते हैं जब उसे एक ट्रस्टी व कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निकटता का लाभ मिला और वह एक कर्मी के रूप में मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़ा तो कुछ ही समय में पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृ़ढ़ होती चली गई और इसका परिवार गांव में नव-धनाढ्य परिवारों में शामिल हो गया।

    अनुकल्प की चाची नेहा मिश्रा की मानें तो उसने अपने अन्य चाचा की भी मदद की और रिश्तेदारों की भी। स्वयं नोएडा के एक अपार्टमेंट में फ्लैट लिया और रिश्तेदार को लखनऊ में बीबीडी कालेज के सामने भूखंड खरीदवाया।

    उसने लोकगायक दिवाकर द्विवेदी के कौशलपुरी स्थित आवास को लगभग 62 लाख रुपये में खरीद लिया और यहीं अपने परिवार के साथ रहने लगा। वहीं, इसका बहनाेई रुदौली के फगौली ठाकुरान निवासी लवकुश मिश्र पहले एक साधारण कार मिस्त्री रहा।

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    इसका परिवार भी आर्थिक तंगी का शिकार था। छह महीने पहले जब अनुकल्प के पिता रवींद्र मिश्र रवि ने अपने दामाद लवकुश को भी ट्रस्ट का कर्मी बनवा दिया, तो अनुकल्प ने पैरवी करके इसे भी नकदी की गणना से जोड़ लिया। यहीं से इसकी भी जीवनशैली बदल गई। उसने अयोध्या शहर में प्लाट खरीदा और घर भी बनवाने लगा। हालांकि उसके पिता बच्चूलाल मिश्र तो इससे इन्कार करके उस जमीन को खेत गिरवी रख कर खरीदने की बात करते हैं, परंतु उसके घर से दस लाख रुपये नकद बरामद होने के सवाल पर अनुत्तरित हो जाते हैं।

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    बेटे के जेल चले जाने के बाद पूरा परिवार गमगीन है। इसी तरह अयोध्याधाम के स्वर्गद्वार मोहल्ले का रहने वाला रामशंकर यादव टिन्नू विहिप से जुड़े रहने के बाद जब मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़ा तो ट्रस्ट महासचिव के साथ उसकी निकटता का उसे काफी लाभ मिला। वह मंदिर की प्रत्येक व्यवस्थाओं में दखल देने लगा। यहां तक कि नकदी की गणना जहां होती थी, वहां भी वह बेधड़क पहुंचता रहा है।

    एसआइटी जांच में उसके पास दानपात्रों की चाभियां मिलने से यह प्रमाणित भी हो गया। इसी कारण उसने चार-पांच महीने पहले अपने भतीजे मनीष यादव को भी न केवल ट्रस्ट का कर्मी बनवा दिया था, बल्कि उसे भी गणना में रखवा दिया। दोनों के जेल चले जाने के बाद अब इसके भी परिवार के लोग हैरान व परेशान हैं।

    हालांकि टिन्नू यादव की पत्नी पूनम यादव तो अभी भी पति को निर्दोष बताते हुए साजिशन फंसाने का आरोप लगाती हैं। वहीं, अविनाश शुक्ल के बारे में भी बताया जाता है कि उसने अयोध्या में ही कहीं प्लाट खरीद लिया है, लेकिन वह नाका पर किराए के कमरे में रहता था।