राम मंदिर में पहली बार झूले पर विराजमान होकर दर्शन देंगे रामलला, 15 अगस्त से शुरू होगा भव्य झूलनोत्सव
राम मंदिर में नवगठित धार्मिक समिति की पहली वर्चुअल बैठक में रामलला के झूलनोत्सव को भव्य रूप देने का निर्णय लिया गया। ...और पढ़ें

रामलला
HighLights
रामलला दिन भर झूले पर भक्तों को दर्शन देंगे।
गर्भगृह से कुबेर टीला तक निकलेगी रामलला की पालकी यात्रा।
पुजारी अब हमेशा पीत वस्त्र (पीले कपड़े) में रहेंगे।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की नवगठित धार्मिक समिति की पहली बैठक शनिवार को वर्चुअल हुई। इसमें राम मंदिर में पूरी आस्था के साथ झूलनोत्सव मनाने का निर्णय हुआ। रामलला के सावन उत्सव और सावन मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए।
ट्रस्ट कोषाध्यक्ष व धार्मिक समिति के अध्यक्ष गोविंददेव गिरि सहित समिति के सभी सदस्य आनलाइन जुड़े। बैठक का प्रमुख एजेंडा इस बार के झूलनोत्सव को भव्य स्वरूप प्रदान करना रहा है। झूलनोत्सव तक रामलला पहली बार दिन भर झूले पर ही भक्तों को दर्शन देंगे।
नित्य सुबह श्रृंगार आरती के बाद रामलला के उत्सव विग्रह को स्वर्ण हिंडोले पर विराजित कर दिया जाएगा, जिन्हें शयन आरती के बाद ही झूले से उतारकर विश्राम कराया जाएगा। अब तक विगत वर्षों में सिर्फ शाम को भगवान झूलनविहार करते थे।
तय हुआ कि मंदिर के गर्भगृह से कुबेर टीला तक रामलला के उत्सव विग्रह की पालकी यात्रा निकाली जाएगी।
कुबेर टीला पर भगवान झूले पर विराजित होंगे और फिर भव्य व दिव्य राम मंदिर के गर्भगृह के सम्मुख स्वर्ण जड़ित हिंडोले पर विराजित किए जाएंगे। यह उत्सव 15 अगस्त तृतीया तिथि से अनवरत पूर्णिमा तक प्रवहमान रहेगा। भगवान को नए नए वस्त्र व स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाएगा। इसमें माल पुआ, रबड़ी, दही आदि भोग लगेगा।
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झूलनोत्सव में बाहरी के साथ ही स्थानीय कलाकारों को भी प्रस्तुति का मौका दिया जाएगा। इनकी अलग-अलग सूची तैयार कर आमंत्रित किया जाएगा। साथ ही रामनगरी के संतों को शामिल होने का आह्वान किया जाएगा। जिससे सभी भक्त रामलला का झूलनोत्सव देख सके।
परंपरागत रूप से यह उत्सव सावन शुक्ल पंचमी से शुरू होता रहा है, लेकिन इस बार सावन शुक्ल तृतीया से शुरू होगा। 12 दिनों तक चलने वाले उत्सव में झूला दर्शन के साथ कजरी गीत और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नित्य शाम को आयोजित होंगे। दर्शन व्यवस्था, कतार प्रबंधन, सुरक्षा, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा सुविधा और भीड़ नियंत्रण की तैयारियों की समीक्षा की गई।
धार्मिक समिति की बैठक में अध्यक्ष के रूप में गोविंददेव गिरि के अलावा जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, युगपुरुष स्वामी परमानंद, स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ, निर्मोही अखाड़ा के महांत दिनेंद्रदास, ट्रस्ट अध्यक्ष महांत नृत्यगोपालदास के उत्तराधिकारी महांत कमलनयनदास, महांत रामानंददास, सिद्धपीठ श्रीहनुमन्निवास के महांत आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण और रामवल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमारदास सदस्य जुड़े और अपने विचार प्रस्तुत किए।
श्रीरामवल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने कहा कि रामलला के झूलन को उत्सव को धार्मिक आयोजन से ओतप्रोत किया गया है। सभी संत मिलकर इस उत्सव को स्वर्णिम बनाएंगे। शाम साढ़े सात बजे से शुरू हुई बैठक पौने नौ बजे तक चली। इसके बाद सभी सदस्य अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में वार्ता करते रहे।
अब पीत वस्त्र परिधान पहनेंगे रामलला के पुजारी
पहली धर्मसमिति की बैठक में बड़ा निर्णय लिया गया। इसके अंतर्गत रामलला के पुजारी अब हमेशा पीत वस्त्र में रहेंगे। अब पुजारियों को अर्धक्षौर में रहने को वर्जित किया गया है। इसके तहत पुजारी चाहे तो दाढ़ी बाल का मुंडन करा कर रहें, या फिर दाढ़ी बाल से युक्त रहें।