2027 चुनाव से पहले अयोध्या में बनेंगे स्थायी हेलीपैड, परियोजना को जल्द मिल सकती है मंजूरी
रुदौली विधानसभा क्षेत्र के मवई और रुदौली विकासखंडों में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले स्थायी हेलीपैड बनाए जाएंगे। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
रुदौली-मवई में 2027 चुनाव से पहले स्थायी हेलीपैड का निर्माण।
40 लाख रुपये की लागत से दो हेलीपैड बनाए जाएंगे।
चुनावी और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए आवागमन होगा सुगम।
संवाद सूत्र, अयोध्या। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले रुदौली विधानसभा क्षेत्र के मवई और रुदौली विकासखंडों को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। दोनों ब्लॉकों में स्थायी हेलीपैड बनाए जाएंगे, जिससे चुनावी और प्रशासनिक गतिविधियों के दौरान वीआईपी आवागमन अधिक सुगम होगा। लोक निर्माण विभाग ने हेलीपैड और पहुंच मार्ग के निर्माण का प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेज दिया है। अनुमति मिलते ही इसी माह निविदा प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
प्रदेश सरकार ने जनवरी 2026 में सभी विकासखंडों में स्थायी हेलीपैड के लिए भूमि चिह्नित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित संयुक्त टीम ने निर्धारित मानकों के अनुसार भूमि का चयन किया। टीम में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता, एआरटीओ, संबंधित एसडीएम, तहसीलदार, बीडीओ समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे।
हेलीपैड निर्माण के लिए ऐसे स्थानों का चयन किया गया है जहां बिजली के तार और बड़े पेड़ों से पर्याप्त दूरी हो तथा मुख्य मार्ग से सीधी और आसान पहुंच उपलब्ध हो। मवई विकासखंड के गनेशपुर तथा रुदौली विकासखंड के फिरोजपुर मख्दूमी गांव में भूमि चिह्नित की गई है।
पूरे प्रोजेक्ट में खर्च होंगे लगभग 40 लाख
प्रत्येक हेलीपैड के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप लगभग 26×26 मीटर का भूखंड चयनित किया गया है, जबकि निर्माण कार्य पर प्रति ब्लॉक करीब 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। पूरे प्रोजेक्ट की लागत लगभग 40 लाख रुपये बताई जा रही है।
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लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता विकल्प कनौजिया ने बताया कि भूमि चिह्नांकन और प्राक्कलन का कार्य पूरा कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अनुमति मिलते ही निविदाएं आमंत्रित कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
स्थायी हेलीपैड बनने से विधानसभा चुनाव, सरकारी कार्यक्रमों और आपातकालीन परिस्थितियों में प्रशासन को हर बार अस्थायी हेलीपैड बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी। साथ ही यदि किसी एक हेलीपैड पर किसी राजनीतिक दल के स्टार प्रचारक का कार्यक्रम होगा तो दूसरे दल के लिए वैकल्पिक हेलीपैड उपलब्ध कराया जा सकेगा। उपजिलाधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि यह परियोजना चुनावी प्रबंधन के साथ-साथ भविष्य की प्रशासनिक जरूरतों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी।