अयोध्या में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मांग, 'राम मंदिर के लिए मूर्धन्य धर्माचार्यों का ट्रस्ट बने'
ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अयोध्या में राम मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाए, आरोप लगाया कि हिंदू धर्म का मजाक उड़ाया जा रहा है। उन्होंने ...और पढ़ें

हनुमानगढ़ी में ज्योतिष्ठपीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की सहयोगियों के साथ अगवानी करते गद्दीनशीन के कृपापात्र मामादास दाएं से दूसरे।- जागरण
HighLights
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए।
धर्माचार्यों का ट्रस्ट बनाने और संतों को भोग व्यवस्था सौंपने की मांग।
उन्होंने हनुमानगढ़ी और कनकभवन में भी दर्शन-पूजन किया।
संवाद सूत्र, जागरण, अयोध्या। रामनगरी पहुंचे ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अयोध्या धाम बस स्टेशन के निकट सागर पैलेस परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि रामजन्मभूमि परिसर में कदम-कदम पर हिंदू धर्म का मजाक उड़ाया जा रहा है। भगवान तक भक्तों का भोग नहीं पहुंच रहा है।
रामलला के गर्भगृह में प्रधानमंत्री, सरसंघ चालक, मुख्यमंत्री और राज्यपाल जा सकते हैं, किंतु अयोध्या का संत नहीं जा सकता। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, राम मंदिर में सनातन धर्म के मूर्धन्य धर्माचार्यों का ट्रस्ट बनाया जाय तथा रामलला के भोग-राग की व्यवस्था के लिए अयोध्या के संतों को मौका दिया जाय।
इस दाैरान उन्होंने सागर पैलेस का शिलान्यास भी किया। इस अवसर पर करतलिया भजनाश्रम के महांत रामदास त्यागी, रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष दिलीपदास त्यागी, सूर्यभानदास, आनंददास, संतरामदास, पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय पवन, साकेत पीजी कालेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सुनील पाठक, शहीद शोध संस्थान के अध्यक्ष सूर्यकांत पांडेय, लड्डूलाल यादव, श्रीचंद यादव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

रामनगरी में प्रवास के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी पहुंच बजरंगबली का दर्शन-पूजन भी किया। इस दौरान हनुमाानगढ़ी के सर्वोच्च महांत गद्दीनशीन प्रेमदास ने हनुमान जी की मूर्ति एवं गदा भेंट कर उनका अभिनंदन किया। इससे पूर्व ज्योतिष्पीठाधीश्वर का हनुमानगढ़ी के द्वार से ही गद्दीनशीन के कृपापात्र युवा संत मामादास के संयोजन में सैकड़ों संतों ने पुष्प वर्षा कर अभिनंदन किया गया।
खबरें और भी
यह भी पढ़ें- चढ़ावा चोरी मामला: पुलिस रिमांड में टिन्नू ने उगले कई राज, सामने आ सकते हैं कई नए नाम
मामादास ने कहा कि शीर्ष सनातनधर्मी आचार्य के रूप में वह हमारे प्रेरक, मार्गदर्शक हैं और इसकी राजनीतिक व्याख्या नहीं हाेनी चाहिए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रामभक्तों की शीर्ष पीठ कनकभवन में भी दर्शन-पूजन किया। वह जानकीघाट बड़ास्थान भी गए, जहां रसिक पीठाधीश्वर स्वामी जन्मेजयशरण ने बड़ी संख्या में संतों एवं स्वस्तिवाचन करने वाले बटुकाें के साथ उनका स्वागत किया।