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अयोध्या में घटिया गोशाला निर्माण पर डीएम शशांक त्रिपाठी की कार्रवाई, UPCLDF होगी ब्लैकलिस्ट

Updated: Wed, 12 Aug 2026 09:37 AM (IST)

अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने घटिया गो संरक्षण केंद्रों के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था यूपीसीएलडीफ को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की है। उन्होंने अपर मुख्य सचिव पशुधन को पत्र लिखकर भविष्य में इस संस्था को अयोध्या में कोई कार्य न देने की भी संस्तुति की है।

डीएम अयोध्या।

डीएम अयोध्या।

HighLights

  1. जिलाधिकारी ने यूपीसीएलडीफ को ब्लैकलिस्ट करने की संस्तुति की

  2. घटिया और अधोमानक गो संरक्षण केंद्रों के निर्माण का मामला

  3. भविष्य में अयोध्या में कार्य न देने की भी सिफारिश

आनंदमोहन, अयोध्या। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने वृहद गो संरक्षण केंद्र का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था उप्र राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ लि. (यूपीसीएलडीफ) को काली सूची में डालने के लिए अपर मुख्य सचिव (एसीएस) पशुधन को पत्र लिखा है। पत्र में भविष्य में इस संस्था को अयोध्या में कोई कार्य न दिए जाने की संस्तुति भी है। जिलाधिकारी का यह पत्र 10 दिन पहले 28 जुलाई का है।

अयोध्या के विकास व सुंदरीकरण के निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं की कार्यदायी संस्थाओं के जिलाधिकारी के पत्र के बाद कान खड़े हो गये हैं।

जिलाधिकारी के पत्र से कार्यदायी संस्थाओं में हड़कंप

एसीएस को लिखे पत्र में जिलाधिकारी ने उन वृहद गो संरक्षण केंद्रों के नाम का उल्लेख किया है जिनके निर्माण अधोमानक व गुणवत्ता विहीन हैं। मिल्कीपुर तहसील के अंजरौली, कोटिया, सोहावल तहसील में हूंसेपुर व रुदौली तहसील में गनेशपुर के नाम पत्र में शामिल हैं पत्र में इनके निर्माण की खामियों को जिलाधिकारी ने इंगित किया है। कार्यदायी संस्था को उनमें सुधार के लिए मुख्य विकास अधिकारी की ओर से 15 मई एवं मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से 30 मई 2026 को पत्र लिखने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ।

यही नहीं इसके बाद बीकापुर तहसील के मऊ में वृहद गो संरक्षण केंद्र के निर्माण के लिए 12 दिसंबर को इसी संस्था को नामित कर दिया है। जिन वृहद गो संरक्षण केंद्रों के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं, उनमें पशुपालन विभाग की ओर से गोवंशीय पशु संरक्षित है।

अपर मुख्य सचिव को लिखा गया है पत्र गुणवत्ता के अनुरूप नहीं निर्माण

अधोमानक निर्माण के चलते ऐसे में गोवंशों को संरक्षित किये जाने का सवाल उठने लगा है। प्रशासनिक हल्के में 14 कोसी परिक्रमा पथ के निरीक्षण के बाद जिस तरह जिलाधिकारी ने उसकी निगरानी करने वाली लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड-तीन के एक्सईन समेत 13 इंजीनियरों का वेतन रोका है, उसकी भी चर्चा अधोमानक व समय से कार्य पूर्ण न करने वाली कार्यदायी संस्थाओं पर कार्रवाई के संदर्भ में तेज है।

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