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    भोलेनाथ की भक्ति में लीन कांवड़िये: कछला घाट से 201 लीटर गंगाजल लेकर बरेली निकले 7 शिवभक्त, 85 किमी की कठिन यात्रा शुरू

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 03:21 PM (GMT+05:30)

    कछला गंगाघाट से बरेली के सात शिवभक्त 201 लीटर गंगाजल लेकर 85 किलोमीटर की कठिन कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। यह दल बिना किसी मन्नत के भोलेनाथ की निस्वार् ...और पढ़ें

    कछला गंगा घाट से 201 लीटर गंगा जल भरकर बरेली जाते शिवभक्त। जागरण

    कछला गंगा घाट से 201 लीटर गंगा जल भरकर बरेली जाते शिवभक्त। जागरण

    HighLights

    1. पिछले वर्ष भी उठाई थी 101 लीटर की कांवड़

    संवाद सूत्र, कछला (बदायूं)। कछला गंगाघाट पर युवाओं के बीच भारी भरकम कांवड़ ले जाने का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को बरेली के इज्जतनगर निवासी सात शिव भक्तों का दल कलश में 201 लीटर गंगाजल भरकर 85 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पर निकला है। इस भारी वजन के साथ कदम बढ़ाना बेहद चुनौतीपूर्ण है, लेकिन भगवान भोलेनाथ का स्मरण और अटूट श्रद्धा शिव भक्तों को हर पल नई ऊर्जा प्रदान कर रही है।

    कांवड़ यात्रा की परंपरा में समय के साथ बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक दौर था जब कांच व प्लास्टिक की छोटी शीशियों में गंगाजल रखकर यात्रा की जाती थी। कांवड़ को माला, फोटो और कपड़ों से सजाने का वह तरीका आज भी बरकरार है, लेकिन आधुनिक दौर के युवाओं में अब कलश वाली कांवड़ उठाने की होड़ मच गई है।

    कछला घाट से पूर्व में 31, 51 और 101 लीटर तक गंगाजल ले जाने के कई रिकार्ड दर्ज हो चुके हैं। इस बार बरेली के इज्जतनगर लक्ष्मी मठ पुल के ललित शर्मा, अजय प्रजापति, बीरू राठौर, रोहित कश्यप, अदित कश्यप और सचिन राठौर समेत सात दोस्तों ने मिलकर 201 लीटर का रिकार्ड वजन उठाया है।

    कांवड़ यात्री ललित शर्मा ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष भी 101 लीटर जल की कांवड़ उठाई थी। भक्तों का कहना है कि उन्होंने भगवान शिव से कोई मन्नत नहीं मांगी है; वे केवल भोलेनाथ की निस्वार्थ भक्ति कर रहे हैं।

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    शिव की कृपा से उनके सभी कार्य अपने आप पूरे हो रहे हैं। यह दल आगामी सोमवार को इज्जतनगर स्थित लक्ष्मी मठ मंदिर में महाकाल का जलाभिषेक करेगा। भारी वजन के कारण सफर भले ही कठिन हो, पर शिव का नाम लेते ही भक्तों की थकान पल भर में गायब हो जाती है।

    परंपरा का बदला स्वरूप, नहीं बदली आस्था

    पहले कांच व प्लास्टिक की छोटी शीशियों में गंगाजल ले जाने का दौर था। सुंदर मालाओं और कपड़ों से सजी वह कांवड़ आज भी चलती है, लेकिन अब युवाओं में भारी कलश वाली कांवड़ का रुझान बढ़ा है। 31 से शुरू हुआ यह सफर अब 201 लीटर तक पहुंच चुका है।

    आस्था से मिलती है नई ऊर्जा

    201 लीटर जल का भारी वजन उठाकर 85 किलोमीटर की दूरी तय करना बेहद कठिन है। कांवड़ियों का कहना है कि हर एक कदम भारी लगता है, लेकिन दिल में हर-हर महादेव का ध्यान आते ही शरीर में अनोखी ऊर्जा दौड़ जाती है और कठिन राह भी आसान हो जाती है।

     

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