बदायूं सपा में बगावत! 5 लाख मुस्लिम आबादी, पर 1 भी पद नहीं... सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव की PDA रणनीति पर उठे सवाल
बदायूं में समाजवादी पार्टी के छह विधानसभा अध्यक्षों की सूची में एक भी मुस्लिम चेहरा न होने से समुदाय में नाराजगी है। इंटरनेट मीडिया पर पांच लाख मुस्लि ...और पढ़ें

सपा के मुस्लिम नेताओं की ओर से इंटरनेट मीडिया पर की गई टिप्पणी। साभार इंटरनेट मीडिया
HighLights
छह विधानसभा अध्यक्षों में एक भी मुस्लिम चेहरा नहीं, हिस्सेदारी के हिसाब से उठाई टिकट की मांग
2022 के टिकट वितरण से लेकर 2027 की तैयारियों तक मुस्लिम समाज के नेताओं ने उठाए सवाल
आशीष देव मिश्रा, बदायूं। जिले में करीब पांच लाख मुस्लिम और लगभग 3.40 लाख यादव मतदाता होने का दावा करते हुए समाजवादी पार्टी से जुड़े मुस्लिम समाज के लोगों ने संगठन और चुनावी प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विधानसभा चुनाव-2027 की तैयारियों के तहत सपा द्वारा घोषित छह विधानसभा अध्यक्षों की सूची में एक भी मुस्लिम नेता को जगह नहीं मिलने के बाद इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर नाराजगी खुलकर सामने आ रही है।
फेसबुक, व्हाट्सएप ग्रुप और इंस्टाग्राम पर पार्टी के समर्थक और पदाधिकारी प्रतिनिधित्व, पीडीए और टिकट वितरण को लेकर लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने तीन दिन पहले बिसौली से सुरेंद्र पाल सिंह, सहसवान से नवाब सिंह, बिल्सी से देवेंद्र गौतम, बदायूं सदर से अतुल पटेल, शेखूपुर से अशोक यादव और दातागंज से सतीश यादव को विधानसभा अध्यक्ष बनाया है।
नियुक्तियों में पाल, ठाकुर, गौतम, कुर्मी और यादव समाज को प्रतिनिधित्व मिला, लेकिन मुस्लिम समाज का कोई चेहरा शामिल नहीं होने से इंटरनेट मीडिया पर बहस तेज हो गई है। सपा से जुड़े स्वाले चौधरी ने फेसबुक पर लिखा कि जिलाध्यक्ष से लेकर छह विधानसभा अध्यक्षों तक किसी भी पद पर मुस्लिम समाज को प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जबकि जिले में पांच लाख मुस्लिम और 3.40 लाख यादव हैं।
उन्होंने इसे जिले के आम मुस्लिम समाज की आवाज बताया। अनवार खान ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मुस्लिम समाज को केवल संगठनात्मक पद नहीं, बल्कि अपनी आबादी के अनुपात में विधानसभा टिकट मिलने चाहिए। उनका कहना है कि पदों से ज्यादा अहम राजनीतिक भागीदारी और टिकटों में हिस्सेदारी है।
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मोहतशाम सिद्दीकी ने लिखा कि 15 जून को लखनऊ में राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ हुई बैठक में उन्होंने पीडीए के तहत मुस्लिम समाज की भागीदारी का मुद्दा उठाया था, लेकिन नई सूची से यह संदेश गया कि मुस्लिम समाज को दरकिनार किया जा रहा है। इंटरनेट मीडिया पर 2022 के विधानसभा चुनाव का भी लगातार उल्लेख किया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि जिले की छह सीटों में केवल बदायूं सदर से मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट दिया गया, जबकि दातागंज, शेखूपुर और सहसवान जैसी सीटों पर यादव उम्मीदवार उतारे गए। मुस्लिम समाज के लोगों का तर्क है कि सहसवान में करीब एक लाख, शेखूपुर में लगभग डेढ़ लाख और दातागंज में करीब 60 हजार मुस्लिम मतदाता हैं, फिर भी इन सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार नहीं बनाए गए।
उनका आरोप है कि मुस्लिम समाज को अक्सर ऐसी सीटें दी जाती हैं, जहां जीत की संभावना कम होती है। जिस सदर सीट पर सपा मुस्लिम प्रत्याशी दिया जाता है, उस सीट पर 2022 में ही जीत मिली थी। इंटरनेट मीडिया पर पूर्व सांसद सलीम शेरवानी का भी जिक्र किया जा रहा है।
कई लोगों का कहना है कि जब तक सलीम शेरवानी को लोकसभा का टिकट मिलता था, तब तक मुस्लिम समाज सम्मानजनक भागीदारी महसूस करता था, लेकिन अब संगठन से लेकर लोकसभा और विधानसभा टिकटों तक प्रतिनिधित्व घटने से असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।
लोग कह रहे हैं कि सपा पीडीए को लेकर आगे बढ़ रही है, लेकिन उसमें से ए यानि अल्पसंख्यक को उतना वैटेज नहीं मिल रहा। इंटरनेट मीडिया पर हिस्सेदारी के हिसाब से किन्हीं दो सीटों पर टिकट की मांग भी शुरू हो गई है।