अमर ज्योति घोटाले के पीड़ितों के लिए बड़ी राहत: ₹200 करोड़ की ठगी मामले में दिवाला प्रक्रिया शुरू, 6 अगस्त तक करें दावा
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू की है, जिसने निवेशकों के लगभग ₹200 करोड़ ठग ...और पढ़ें

अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड
HighLights
वर्ष 2025 में दो सौ करोड़ से ज्यादा लेकर फरार हुई थी अमर ज्योति कंपनी, मालिकों पर दर्ज हैं चार मामले
जागरण संवाददाता, बदायूं। अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड कंपनी द्वारा हजारों निवेशकों के करीब दो सौ करोड़ रुपये लेकर फरार होने के मामले में अब राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने बड़ा कदम उठाया है। न्यायाधिकरण ने कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए हैं। इसके लिए कंपनी के आफिस के बाहर नोटिस भी चस्पा कर दिया गया है।
वर्ष 2016 में शुरू हुई इस निधि कंपनी ने अधिक ब्याज का लालच देकर जिले के अलावा आसपास के जिलों की महिलाओं, किसानों, मजदूरों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और तमाम वकीलों से धन जमा कराया था।
कुछ समय तक ब्याज देने के बाद कंपनी ने डेढ़ साल पहले कार्यालय बंद कर दिया और इसके संचालक शशिकांत मौर्य, सूर्यकांत मौर्य व श्रीकांत मौर्य फरार हो गए। पीड़ितों का अनुमान है कि कंपनी करीब दो सौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि लेकर फरार हुई है। इससे जिले के हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं।
न्यायाधिकरण इलाहाबाद पीठ ने 23 जुलाई 2026 को कंपनी के विरुद्ध दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का आदेश पारित किया और अभी दो दिन पहले ही इसकी प्रति प्राप्त हुई। इसके साथ ही गुरुग्राम निवासी वीणु ड्राल को अंतरिम समाधान अधिकारी नियुक्त किया गया है। अब कंपनी का पूरा प्रबंधन उन्हीं के अधीन रहेगा।
दिवाला प्रक्रिया की धारा 17 के तहत अब कंपनी के निदेशक, अधिकारी और कर्मचारी बिना समाधान अधिकारी की लिखित अनुमति के बैंक खाते, सावधि जमा, संपत्ति और कागजातों को नहीं चला सकेंगे। धारा 14 के तहत कंपनी पर रोक भी लगा दी गई है। अब कंपनी के विरुद्ध कोई अलग से वसूली या मुकदमा नहीं चलाया जा सकेगा।
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आसान हो सकती है पीड़ितों की राह
समाधान अधिकारी वीणु ड्राल ने सभी जमाकर्ताओं, सदस्यों और निवेशकों से अपना-अपना दावा जमा करने की अपील की है।इसकी अंतिम तिथि छह अगस्त 2026 तय की गई है। दावा निर्धारित प्रारूप में इसे आनलाइन भी जमा किया जा सकता है। इसके लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा। सभी दावों की जांच के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।
समाधान अधिकारी ने यह भी कहा है कि जिन लोगों के पास कंपनी की संपत्ति, बैंक खाते, वाहन या अन्य कागजातों की जानकारी हो, वह तुरंत सूचना दें। संपत्ति छिपाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कंपनी के फरार होने के बाद से परेशान निवेशकों को अब न्यायाधिकरण की इस कार्रवाई से कुछ राहत की उम्मीद जगी है। पीड़ित अब छह अगस्त तक अपना दावा जमा कर रुपये वापस मिलने की प्रक्रिया से जुड़ सकेंगे।