गाजियाबाद के हत्यारोपी सोनू को बचाने की साजिश का भंडाफोड़, बदायूं में 'दारोगा मामा' समेत दो सस्पेंड
गाजियाबाद के हत्यारोपी सोनू को बचाने के आरोप में दारोगा नरेंद्र कुमार और राजकुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया है। एसएसपी अंकिता शर्मा ने जांच में मिली ...और पढ़ें


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जागरण संवाददाता, बदायूं। गाजियाबाद में हत्या कर भागे सोनू को हल्की धाराओं में जेल भेजने की पटकथा लिखने वाले दारोगा नरेंद्र कुमार व राजकुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया।
सोनू को फरारी के दौरान मुठभेड़ जैसी सख्त कार्रवाई का डर सताया तो फैजगंज थाने में तैनात दारोगा मामा नरेंद्र कुमार से मदद मांगी थी।
इसके बाद नरेंद्र ने मूसाझाग थाने के दारोगा राजकुमार सिंह से संपर्क किया। जांच में इसकी पुष्टि होने पर एसएसपी अंकिता शर्मा ने मंगलवार को कार्रवाई कर दी। दैनिक जागरण ने दो अगस्त को ही इस मिलीभगत की पर्तें उधेड़ दी थीं कि भांजे को बचाने के लिए दारोगा ने पटकथा लिखी।
12 जुलाई को गाजियाबाद में हार्न बजाने पर सोनू ने बाइक सवार विपिन कुमार की हत्या कर दी थी। वह पुलिस के हाथ नहीं आया तो 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया। इस बीच सोनू ने दूर के रिश्तेदार मामा फैजगंज बेहटा थाने में तैनात वरिष्ठ दारोगा नरेंद्र कुमार से संपर्क किया।
नरेंद्र कुमार ने पहले अपने थाने में प्रयास किया कि बचाव का रास्ता बन जाए। सफलता न मिलने पर पूर्व थानाध्यक्ष रह चुके मूसाझाग थाने के दारोगा राजकुमार सिंह से बात की। दोनों ने तय किया कि पूर्व परिचित बिनावर थाने के दारोगा बलवीर सिंह से मदद ली जाए।
इस मिलीभगत का सौदा 15 लाख रुपये में तय हुआ। 23 जुलाई को बलवीर सिंह ने सोनू तमंचा समेत पकड़े जाने के आरोप में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, वहां से जेल भेज दिया गया। सोनू के पीछे लगी गाजियाबाद की पुलिस व एसओजी टीम लोकेशन के आधार पर बिनावर पहुंची।
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वहां पता चला कि दारोगा बलवीर ने सोनू को फर्जी नाम,पते से जेल भेज दिया है। इसकी शिकायत पर बरेली डीआइजी अजय कुमार साहनी ने जांच बैठाई। उसमें दोषी पाए जाने पर दारोगा बलवीर सिंह निलंबित किया जा चुका, जबकि पर्यवेक्षण में लापरवाह इंस्पेक्टर अरिहंत को थाने से हटा दिया गया था।
इसके बाद एसएसपी अंकिता शर्मा ने विस्तृत जांच एसपी देहात डा. हृदेश कठेरिया को सौंपी। उन्होंने जांच में पाया कि आरोपित सोनू की वरिष्ठ दारोगा नरेंद्र से दूर की रिश्तेदारी थी। उसे तमंचे में जेल भेजने की पटकथा नरेंद्र कुमार और मूसाझाग के दारोगा राजकुमार ने ही रची थी।