बदायूं डबल मर्डर: 21 साल का 'अवैध साम्राज्य' और अधिकारियों की खामोशी, कत्ल के बाद खुला ताऊ-भतीजे का सच!
बदायूं में हिंदुस्तान पेट्रोलियम के दो अधिकारियों की हत्या के बाद आरोपी अजय प्रताप सिंह और उसके परिवार का 21 ...और पढ़ें

बंद पड़ी आरोपित के ताऊ राकेश की दुकानें। जागरण
HighLights
पिछले दिनों बहेड़ी में भी अवैध खनन करने वालों ने किया था टीम पर हमला
कैंट में ईको स्पोर्ट्स कार से आए लोकेटरों ने ट्रैक्टर ट्राली छुड़ाने का किया प्रयास
जागरण संवाददाता, बदायूं। हिंदुस्तान पेट्रोलियम के सीबीजी प्लांट के उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता व सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा के हत्या के आरोपित अजय प्रताप सिंह और उसके परिवार की हनक के सामने जिले के प्रशासन अफसर सालों से घुटने टेके थे। ग्राम पंचायत सचिव से लेकर किसी जिलाधिकारी तक किसी ने इस हत्याकांड से पहले उसकी संपत्ति की जांच करने की हिम्मत नहीं जुटाई।
यही कारण रहा कि पिछले 21 सालों में इस परिवार ने ऐसा साम्राज्य खड़ा कर दिया, जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था। वह गांव में तालाबों की जमीन कब्जा रहे थे। ग्राम पंचायत की जमीन पर हाट लगवा कर वसूली कर रहे थे। ग्रामीणों की जमीनों को सस्ते दामों में खरीद रहे थे। इतना ही नहीं सीबीजी प्लांट में हर एक काम उन्हीं का था। इसकी शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
12 मार्च को सैजनी गांव स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम के सीबीजी प्लांट में उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता व सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा की हत्या कर दी गई थी। आरोपित अजय प्रताप सिंह ने घटना के बाद थाने में सरेंडर किया और देर रात तमंचा बरामदगी के दौरान पुलिस पर हमला कर दिया, जिसके बाद मुठभेड़ में आरोपित के दोनों पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
इसके बाद से लगातार उसकी व उसके परिवार की संपत्तियाें की जांच जारी है। इसमें पीडब्ल्यूडी की जगह पर अवैध कब्जे में मामले में उसकी व उसके ताऊ राकेश सिंह की 11 दुकानों का ध्वस्तीकरण किया जा चुका है। तालाब की भूमि पर 35 बीघा जमीन पर फसल बोई हुई थी, उसे नष्ट करा दिया गया है।
इसके अलावा ताऊ की करीब 53 दुकानों में से 32 दुकानों को सील किया जा चुका है। वह दोनों जिस ग्राम पंचायत की जमीन पर हाट लगवा कर वसूली कर रहे थे, वहां से वसूली बंद कराई गई। यह सब तब सामने आया जब दो अधिकारियों की हत्या हो गई। अब जिले के लोग यही सवाल कर रहे हैं कि यह सब इससे पहले सामने क्यों नहीं आया।
इसके पीछे जाएंगे तो पता चला कि गांव की प्रधान और उसका पति भी इसी परिवार के नजदीकी या कर्मचारी हैं। इसी के चलते पंचायत सचिव से लेकर लेखपाल आदि भी जमीनी हकीकत को छिपाए रहे। परिवार में प्रधानी से लेकर जिला पंचायत सदस्यी रही। जिसके चलते राजनीतिक पकड़ भी हमेशा मजबूत रही।
पहली बार 2005 में जिला पंचायत सदस्य बने राकेश सिंह ने इन 21 सालों में न सिर्फ अपना कद बढ़ाया, बल्कि अपना, अपने परिवार और भाई के बेटों आदि की संपत्तियों को भी बढ़ा लिया। लेकिन गांव से लेकर तहसील और जिला प्रशासन तक के अधिकारियों ने कभी कोई कार्रवाई नहीं की।
प्लांट लगने से पहले दिलवाई थी जमीन
सीबीजी प्लांट की स्थापना से पूर्व जब इसके लिए जमीन खरीदी गई तो इसी परिवार का हस्तक्षेप रहा। बताते हैं कि ग्रामीणों को डरा धमका कर मनमाफिक दामों में पहले ही जमीन खरीद ली गई थी।
इसके बाद जब प्लांट आया तो अपने नजदीकियों के जरिए जमीन को प्लांट के नाम कर तगड़ा मुआवजा वसूला गया। इसके अलावा प्लांट शुरू होने से पहले इसके आसपास की बड़ी मात्रा में जमीन आरोपित के परिवार के लोगों ने खुद और अपनी नजदीकी लोगों के नाम करवा दी थी।
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