बदायूं में बंदरों की उछलकूद से टूटकर गिरी पीपल की डाल, दो महिलाओं की मौत; 5 लोग घायल
बदायूं के ललेई गांव में गुरु पूर्णिमा पर हवन-पूजन के दौरान बंदरों की उछलकूद से पीपल की डाल टूटकर गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई और पांच अन्य श्रद्धा ...और पढ़ें

मंदिर में टूटी पड़ी इसी डाल से दबकर हुई महिलाओं की मौत, जांच करती पुलिस
HighLights
बदायूं में बंदरों की उछलकूद से पीपल की डाल गिरी।
गुरु पूर्णिमा पर हवन-पूजन कर रही दो महिलाओं की मौत।
कुंवरगांव में सात महीने में बंदरों से चौथी जानलेवा घटना।
जागरण संवाददाता, बदायूं। बंदरों के उत्पात के कारण बुधवार को दो महिलाओं की जान चली गई, पांच अन्य श्रद्धालुओं को गंभीर चोटें आईं। वे सभी ललेई गांव में गुरू पूर्णिमा पर मंदिर परिसर में हवन-पूजन व कीर्तन कर रही थीं। उसी दौरान पीपल के पेड़ पर बंदरों ने उछलकूद की, जिससे मोटी डाल टूटकर उनके ऊपर जा गिरी। क्षण भर में भजनों की ध्वनि चीख-पुकार में बदल गई। कुंवरगांव क्षेत्र में बंदरों के उत्पात के कारण सात महीने में चौथी जानलेवा घटना है।
कुंवरगांव के ललेई गांव में गमा देवी मंदिर में प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा पर धार्मिक आयोजन में दर्जनों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस बार भी दोपहर को मंदिर परिसर में हवन-पूजन हो रहा था, उसके बराबर में पीपड़ के वर्षों पुराने पेड़ के नीचे महिलाएं कीर्तन कर रही थीं।
उन्होंने ढोलक बजाने के लिए अमीर बानो को बुलाया था। ग्रामीणों के अनुसार, पेड़ पर तीन बंदर उछलकूद कर रहे थे। उन्हें शोर कर भगाने का प्रयास किया, मगर नहीं हटे। बंदरों की उछलकूद में पीपल की भारी-भरकम डाल टूटकर महिलाओं पर गिर गई। इसमें ऊषा देवी की मौके पर मौत हो गई।
ढोलक मास्टर अमीर बानो, श्यामा देवी, हरदेवी, रामलली, मोहनलाल, एवं 14 वर्षीय निराली को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने अमीर बानो को मृत घोषित कर दिया। श्यामादेवी, हरदेवी, रामलली, निराली और मोहनलाल का उपचार कराया जा रहा।
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मोहनलाल ने बताया कि बंदरों को भगाने का प्रयास कर रहे थे, उसी दौरान डाल टूट गई। कुंवरगांव के थाना प्रभारी राजेश कौशिक ने बताया कि ग्रामीणों ने एंबुलेंस व पुलिस को फोन कर घटना की जानकारी दी थी। तत्काल टीम भेजकर घायलों को अस्पताल भिजवाया गया।
ग्रामीणों का कहना था कि पूर्व में भी बंदरों के कारण हादसे हो चुके, फिर भी पकड़ने का इंतजाम नहीं कराया गया। छतों पर बंदरों के झुंड ग्रामीणों पर हमला कर देते हैं। इसमें जनवरी से मई के बीच तीन अलग घटनाओं में तीन ग्रामीणों की मौत हो चुकी।
हादसों के बाद बंदर पकड़वाने का आश्वासन दिया जाता है, मगर बाद में ग्राम पंचायतें टाल देती हैं। बता दें कि बंदर पकड़वाकर जंगल में छुड़वाने की जिम्मेदारी निकायों, ग्राम पंचायतों की होती है। वन विभाग इस प्रक्रिया की निगरानी करता है ताकि बंदरों से क्रूरता न हो।