सिर्फ सड़क नहीं, 'रोजगार की रफ्तार' है गंगा एक्सप्रेस-वे; बदायूं-शाहजहांपुर में बनेंगे 4 बड़े इंडस्ट्रियल हब
गंगा एक्सप्रेस-वे बदायूं और शाहजहांपुर में चार औद्योगिक गलियारे विकसित कर रहा है, जिनमें से दो पर काम शुरू हो चुका है। यह परियोजना क्षेत्र में रोजगार ...और पढ़ें

बदायूं से गुजरे गंगा एक्सप्रेसवे का नजारा। जागरण
HighLights
चारों इंटरचेंज पर औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना, दो पर यूपीडा ने शुरू किया काम
अंकित गुप्ता, बदायूं। मेरठ से प्रयागराज तक बने कुल 594 किमी के गंगा एक्सप्रेस-वे का 138 किमी का हिस्सा बरेली मंडल के दो जिले बदायूं से 92 और शाहजहांपुर से 44 किमी होकर गुजरा है। बुधवार को हरदोई से इस एक्सप्रेस-वे की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हरी झंडी दिखाकर कर दी।
इसी के साथ बरेली मंडल के चारों जिलों का ढांचागत विकास रफ्तार पकड़ने लगेगा। बदायूं और शाहजहांपुर दोनों क्षेत्रों को मिलाकर गंगा एक्सप्रेस-वे पर चार औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं। जिनमें से बदायूं और शाहजहांपुर में एक एक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाने का काम शुरू कर दिया गया है।

बदायूं के घटपुरी और शाहजहांपुर के जलालाबाद के गुलड़िया गांव में औद्योगिक, वाणिज्यिक और लाजिस्टिक केंद्र (आइएमएलसी) बनाया जाना शुरू कर दिया गया है। इसके लिए भूखंड आवंटन की प्रक्रिया चल रही है।
वहीं बदायूं के डहरपुर और वनकोटा के पास भी औद्योगिक गलियारा बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए जमीन तलाश की जा रही है। गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे विकसित किए जा रहे इन औद्योगिक क्षेत्रों से न सिर्फ बदायूं और शाहजहांपुर विकास की गति पकड़ेंगे, साथ ही बरेली और पीलीभीत के जिले के युवाओं के लिए भी रोजगार के रास्ते खुलेंगे।
12 जिलों से गुजरे गंगा एक्सप्रेस-वे में से यूपीड़ा ने पहले चरण में बदायूं और शाहजहांपुर के अलावा संभल, उन्नाव, मेरठ और हरदोई जिले में औद्योगिक, वाणिज्यिक और लाजिस्टिक केंद्र (आइएमएलसी) विकसित करना तय किया है। इन सभी छह जिलों में आइएलएलसी विकसित करने के लिए भी भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा हो चुका है।
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गंगा एक्सप्रेस-वे: बदायूं जनपद की मुख्य विशेषताएं
| विशेषता | विवरण |
| कुल लंबाई (जनपद में) | लगभग 91.67 किलोमीटर |
| प्रभावित तहसीलें | बिल्सी, बदायूं, बिसौली एवं दातागंज |
| प्रभावित गांवों की संख्या | 85 गांव (सीधे जुड़े हुए), कुल 195 गांव (प्रभावित/स्पर्शित) |
| प्रमुख इंटरचेंज | 1. घटपुरी (सदर) 2. वनकोटा (बिसौली) 3. डहरपुर (दातागंज) |
| कनेक्टिविटी लाभ | दिल्ली, मेरठ और प्रयागराज जैसे शहरों की दूरी और समय में बड़ी कमी |
| क्षेत्रीय लाभ | बरेली, पीलीभीत, संभल और शाहजहांपुर (कलान क्षेत्र) के लोगों को आसान आवागमन |
| आर्थिक प्रभाव | ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों, आधारभूत सुविधाओं और औद्योगिक गलियारों का विस्तार |
अब भूखंड आवंटन की प्रक्रिया चल रही है। बता दें कि बदायूं के घटपुरी क्षेत्र में 269 एकड़ भूमि व शाहजहांपुर में 252 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। इसके लिए दिल्ली की फर्म एसएस इंफ्रा का चयन किया गया है।
गंगा एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण के बाद इन आइएमएलसी को ढांचागत रूप देने का काम भी शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इसे पूरा होने में डेढ़ से दो वर्ष का समय लगने का अनुमान है। बरेली मंडल के इन दोनों जिलों में आइएमएलसी की स्थापना होने से बरेली और पीलीभीत को भी लाभ होगा।

इन दोनों जिले के निवेशक भी यहां आकर अपना उद्योग स्थापित कर सकेंगे, साथ ही इन जिलों के युवाओं को भी रोजगार भी मिलेगा। वहीं जिलों से जो युवा बड़े शहरों में जाकर रोजगार तलाश करते थे, उनके लिए जिले में ही रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।
सिर्फ इतना ही नहीं जिले के किसानों और व्यापारियों के लिए भी यह एक्सप्रेस-वे नए अवसर खोलेगा। जिले में आलू, मैंथा, मक्का और गन्ना आदि की फसल पर्याप्त मात्रा में होती है। बेहतर कनेक्टिविटी न होने के चलते किसान जिले में ही अपनी फसल को बेचना पड़ता था।
अब बेहतर कनेक्टिविटी और जिले में ही औद्योगिक क्षेत्र स्थापित होने से उन्हें भी अपनी फसल को बड़े शहरों तक पहुंचाने में आसानी होगी और जिले में भी खरीदार बढ़ने की संभावना है। इसी तरह व्यापारियों के लिए भी बाया मेरठ होकर दिल्ली पहुंचना आसान हो जाएगा।