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    71 लीटर गंगाजल, 100 KM की पदयात्रा: कड़कती धूप और पैर के छालों को मात दे 'भोले' की ओर बढ़े कांवड़िया!

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 06:15 AM (IST)

    सावन में कछला गंगा घाट से शिवभक्तों ने 71 लीटर गंगाजल भरकर 100 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू की है। कड़कती धूप और पैरों के छालों के बावजूद, अलीगढ़ और पीली ...और पढ़ें

    अलीगढ़ के कमलू गांव के कावड़िया जल लेकर जाते हुए। जागरण

    अलीगढ़ के कमलू गांव के कावड़िया जल लेकर जाते हुए। जागरण

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    1. कछला गंगा घाट से जल भरकर अलीगढ़ और पीलीभीत के कांवड़ियों ने शुरू की आस्था की यात्रा

    पवन कश्यप, कछला (बदायूं)। सावन का महीना, गंगा की पावन धारा, कंधों पर सजे तीन-चार कलश, भगवा वस्त्रों की छटा और होंठों पर हर-हर महादेव का अखंड जयघोष... सावन के पावन महीने में कछला से बदायूं जाने वाला कांवड़ मार्ग शनिवार को पूरी तरह शिवमय हो उठा। पैरों के छाले और कड़कती धूप भी शिव भक्तों की अटूट श्रद्धा के आगे बौने साबित हुए।

    गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते कांवड़ियों के अपार उत्साह और डमरुओं की गूंज ने पूरे माहौल को असीम भक्ति और समर्पण के रंग में सराबोर कर दिया।

    कछला गंगा घाट से जिला अलीगढ़ के थाना अकराबाद क्षेत्र के गांव नगला कमलू निवासी शिवभक्त हिमांशु, लवकुश, रवि, काले, सूरज, आकाश, पुनीत और कुश की टोली ने 71 लीटर गंगाजल कलशों में भरकर करीब 100 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू की।

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    श्रद्धालु सोमवार को अपने गांव स्थित शिव मंदिर में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। टोली के सदस्यों ने बताया कि वर्षों से सावन में कांवड़ यात्रा कर जलाभिषेक करना उनकी आस्था और परंपरा का हिस्सा है।

    वहीं जिला पीलीभीत के न्यूरिया क्षेत्र से हरी शंकर मौर्य, नवीन कुमार, छत्रपाल, शेखर, किरण पाल समेत आठ शिव भक्तों की टोली भी कछला पहुंची। सभी श्रद्धालुओं ने पहले गंगा में आस्था की डुबकी लगाई, फिर विधिवत पूजा-अर्चना और भोलेनाथ की आरती के बाद कलशों में गंगाजल भरकर अपनी यात्रा शुरू की।

    यह टोली भी सोमवार को पीलीभीत स्थित शिव मंदिर में जलाभिषेक करेगी। सावन के दूसरे दिन कछला गंगा घाट पर सुबह से ही शिव भक्तों का सैलाब उमड़ा रहा। हर-हर महादेव और बोल बम के गगनभेदी जयघोषों के बीच श्रद्धालु पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ अपनी मंजिल की ओर बढ़ते रहे। श्रद्धा, तप और संकल्प का यह अद्भुत संगम देखने वालों के लिए भी आस्था का अविस्मरणीय अनुभव बन गया।

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