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    कंफ्यूजन खत्म! काशी विश्वनाथ और ठाकुर प्रसाद पंचांग के अनुसार 15 जनवरी को मनेगी संक्रांति, ये है पुण्यकाल का समय

    Updated: Sun, 11 Jan 2026 07:25 PM (IST)

    मकर संक्रांति की तारीख को लेकर बनी असमंजस की स्थिति अब समाप्त हो गई है। ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा ने शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर स्पष्ट किया ह ...और पढ़ें

    मकर संक्रांत‍ि

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    HighLights

    1. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से होता है मकर संक्रांति का निर्धारण

    जागरण संवाददाता, बदायूं। मकर संक्रांति को लेकर इस वर्ष लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सवाल यह है कि मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाए या 15 जनवरी को। अलग-अलग पंचांगों में सूर्य के मकर राशि में गोचर का समय अलग-अलग बताए जाने के कारण यह भ्रम उत्पन्न हुआ है।

    हालांकि ज्योतिषाचार्य आचार्य राजेश कुमार शर्मा ने शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर स्पष्ट किया है कि इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाना सर्वमान्य और शास्त्र सम्मत है। आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार, ज्योतिष शास्त्र में मकर संक्रांति का निर्धारण सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से होता है।

    जिस क्षण सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, उसी समय से संक्रांति मानी जाती है और उसके लगभग आठ घंटे तक पुण्यकाल रहता है। निर्णय सिंधु ग्रंथ के अनुसार यदि सूर्य का गोचर सूर्योदय के बाद हो तो उसी दिन पुण्यकाल मान्य होता है, लेकिन यदि संक्रांति सूर्यास्त के बाद या रात्रि में हो, तो उसका पुण्यकाल अगले दिन सूर्योदय से माना जाता है।

    ज्योतिषाचार्यों के मतानुसार काशी विश्वनाथ के हृषिकेश पंचांग के अनुसार इस वर्ष सूर्य देव 14 जनवरी को रात्रि 9 बजकर 41 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि यह गोचर रात्रि के समय हो रहा है, इसलिए मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय के बाद प्राप्त होगा। निर्णय सिंधु के अनुसार भी यही स्थिति बनती है। इस कारण मकर संक्रांति 15 जनवरी, गुरुवार को मनाना शास्त्रों के अनुरूप है।

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    ठाकुर प्रसाद पंचांग में भी मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को ही दर्शाया गया है। उसमें सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 9 बजकर 39 मिनट बताया गया है। इसके विपरीत कुछ ऑनलाइन पंचांगों में सूर्य गोचर का समय 14 जनवरी दोपहर 3 बजकर 13 मिनट बताया गया है और उसी आधार पर मकर संक्रांति 14 जनवरी को दर्शाई गई है।

    इसी कारण लोगों में भ्रम की स्थिति बनी। आचार्य शर्मा ने बताया कि 14 जनवरी को षट्तिला एकादशी है, इस दिन चावल का सेवन और दान वर्जित माना गया है। जबकि मकर संक्रांति पर चावल, तिल और गुड़ का दान विशेष पुण्यकारी होता है। स्नान और दान के लिए सूर्योदय काल, विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त को सर्वोत्तम माना गया है, जो 15 जनवरी को ही संभव है।

    15 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन पुण्यकाल दोपहर 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त से लेकर 2:53 बजे तक स्नान और दान कर सकते हैं। मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है, इसलिए इसे उत्तरायण पर्व के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन स्नान, दान और जप से पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।


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