ब्लैकबक की वापसी! यूपी के इस जिले में शुरू हुआ महाअभियान, 3-5 साल में दोगुनी होगी आबादी
बदायूं जिले में कृष्ण मृगों के संरक्षण के लिए 18 वनखंडों में एक विशेष अभियान शुरू किया गया है, जिसका लक्ष्य 3-5 वर्षों में इनकी संख्या को दोगुना करना ...और पढ़ें

कृष्ण मृग
HighLights
जिले के 18 वनखंडों में विचरण कर रहे हैं कृष्ण मृग, वर्ष 2025 की गणना में मिले थे 463 मृग
उमेश राठौर, बदायूं। काले-सफेद खूबसूरत सींगों वाला कृष्ण मृग, जिसे ब्लैक बक भी कहते हैं। कभी उत्तर प्रदेश के खेतों और मैदानी इलाकों की शान था। धीरे-धीरे घटती संख्या ने इसे चिंता का विषय बना दिया। अब इसे बचाने के लिए वन विभाग ने जिला स्तर पर बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत दातागंज और उसावां इलाके से की जा रही है।
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पूरे जिले में 18 वनखंड हैं। इनमें विभाग के पास 886 हेक्टेयर वन क्षेत्र हैं। वर्ष 2025 की गणना के अनुसार, जिले में कृष्ण मृग की संख्या 463 दर्ज की गई थी। इनमें सबसे अधिक आबादी दातागंज और उसावां क्षेत्र में है। कृष्ण मृग पर्यावरण संतुलन का प्रतीक है।
खुले मैदान और घास के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जरूरी है। एक समय था जब यह झुंड में खेतों में दौड़ते दिखते थे। आज कुछ गांवों तक ही सीमित रह गए हैं। वन विभाग ने कृष्ण मृग की संख्या बढ़ाने के लिए ठोस योजना बनाई है। इसे सभी 18 वनखंडों में लागू किया जाएगा।
क्यों घट रही संख्या
स्थानीय लोगों और वन विभाग का मानना है कि शिकार, आवासों का सिकुड़ना, खेती का विस्तार, आवारा कुत्तों का हमला और सड़क हादसे इनकी संख्या घटाने के मुख्य कारण बन रहे हैं। साथ ही ग्रामीणों और मृगों के बीच संघर्ष भी बढ़ा है। ऐसे में अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो यूपी में ये प्रजाति और सिमटकर रह जाएगी।
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अधिकारियों की अपील
वन विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि कृष्ण मृग को नुकसान न पहुंचाएं। अगर कहीं घायल या फंसा हुआ मृग दिखाई दे तो तुरंत 1926 हेल्पलाइन या नजदीकी वन कार्यालय को सूचना दें, जिससे तत्काल उसका उपचार कराया जा सके। ज्यादा गंभीर होने पर उसे पशु चिकित्सालय में भर्ती कराया जा सके। अगर नजदीकी लोगों का सहयोग रहा तो इनकी संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है।
सफल हुआ प्लान तो तीन से पांच साल में दोगुणी हो जाएगी संख्या
वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि अगर यह प्लान सफल हुआ तो इसे आगरा, मैनपुरी, इटावा व अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा, जहां-जहां यह कृष्ण मृग पाए जाते हैं। विभाग के अधिकारियों का यह भी कहना है कि इनके सरंक्षण पर लगातार काम किया जाएगा। इससे इनकी संख्या तीन से पांच साल में दोगुणी हो सकती है।
वन विभाग ने उठाए ये कदम
वन विभाग ने कृष्ण मृग की आबादी बढ़ाने के लिए बड़ी योजना तैयार की है और उसे चरणबद्ध तरीके से जिले के सभी 18 वन खंडों में लागू किया जाएगा।
- सुरक्षित आवास- सभी वन क्षेत्रों के चारों ओर कटीली बाड़ लगाई जाएगी, जिससे मृग सुरक्षित रहें और बाहर न निकलें।
- हर वन खंड में पेयजल के लिए नए जलाशय बनाए जाएंगे। मृगों के स्वास्थ्य के लिए साल्ट लिक भी स्थापित किए जाएंगे। इससे उनके शरीर में नमक की पूर्ति होती रहेगी।
- संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। बीच-बीच में वाच टावर बनाकर 24 घंटे गश्त कराई जाएगी। ड्रोन से भी निगरानी होगी।
- जिन गांवों के खेतों में मृग आते हैं, वहां जागरुकता अभियान चलेंगे। फसल को नुकसान होने पर त्वरित मुआवजा दिया जाएगा।
- डीएफओ और रेंजर हर महीने निरीक्षण करेंगे। वन क्षेत्र के आसपास बैनर-पोस्टर लगाकर लोगों को संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
जिले में वन विभाग के कुल 18 वनखंड हैं और इसके 886 हेक्टेयर में 463 कृष्ण मृग देखे गए हैं। इनको संरक्षित करने की बड़ी पहल की जा रही है। इसके लिए एक बड़ी कार्ययोजना तैयार की गई है। उसके तहत लगातार कृष्ण मृगों की निगरानी कराई जाएगी। उनकी सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं।
- विनीता सिंह, डीएफओ
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