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    Police Scam: एनकाउंटर का डर द‍िखा 15 लाख में बिका दारोगा! फर्जी नाम से हत्यारोपित को भेजा जेल, 5 थानेदार जांच के दायरे में

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 01:15 AM (IST)

    गाजियाबाद के हत्यारोपित सोनू को बदायूं के दारोगा ने मुठभेड़ से बचाने के लिए 15 लाख रुपये लेकर फर्जी नाम से जेल भेजा। यह खेल पांच थानों से होकर गुजरा, ...और पढ़ें

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    1. गाजियाबाद में हत्याकर भागे सोनू को बिनावर थाने के दारोगा ने सुरक्षित पहुंचाया जेल

    अंकित गुप्ता, बदायूं। गाजियाबाद में हत्या कर भागे सोनू को मुठभेड़ के डर से बचाकर सुरक्षित जेल पहुंचाने में एक दारोगा की भूमिका मानी जा रही, मगर यह खेल पांच थानों से होकर गुजरा। इस साठगांठ की अगुवाई जिले के थाने के एक वरिष्ठ पुलिसकर्मी ने की। उसने दूसरे, तीसरे, चौथे फिर पांचवें थाने में तैनात अपने करीबी पुलिसकर्मियों से संपर्क कर रास्ता बना ही लिया।

    23 जुलाई को बिनावर थाने के दारोगा ने सोनू को फर्जी नाम-पते से तमंचा रखने के आरोप में जेल भेज दिया। यह जानकारी गाजियाबाद पुलिस को हुई तो एडीजी लाॅ एंड आर्डर से शिकायत की। वहां से बरेली के डीआईजी अजय साहनी से जांच करने को कहा गया। उनके निर्देश पर बरेली के एसपी मानुष पारिक जांच कर रहे हैं।

    12 जुलाई को गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में बाइक सवार विपिन कुमार ने हाॅर्न बजाया तो सड़क पर खड़े सोनू ने हत्या कर दी थी। उसके फरार होने पर गाजियाबाद पुलिस ने उस पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। उस पर पूर्व में भी हत्या के प्रयास का केस दर्ज हो चुका है।

    उसका आपराधिक इतिहास होने के कारण अनुमान लगाया जा रहा था कि पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी। सोनू को भी डर था कि मुठभेड़ या पैर में गोली मारी जा सकती है। इससे बचने के लिए उसने एक व्यक्ति से मदद मांगी। चर्चा है कि उस व्यक्ति ने फैजगंज बेहटा थाने के एक वरिष्ठ पुलिसकर्मी से संपर्क किया।

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    उन्होंने थाने में एक अन्य सहयोगी से चर्चा की, लेकिन पोल खुलने के डर से पैर खींच लिए। इसके बाद फैजगंज बेहटा के उसी वरिष्ठ पुलिसकर्मी ने सहसवान थाने के एक करीबी को प्रस्ताव दिया। इसके बाद कादरचौक, फिर मूसाझाग थाने के करीबी पुलिसकर्मी से संपर्क किया।

    इन थानों में बात नहीं बनने पर बिनावर थाने के परिचित दारोगा बलवीर को फोन किया गया। उन्होंने हामी भर ली। इसके बाद पटकथा लिखी गई। एक मुखबिर तैयार किया, जिससे सूचना जारी कराई गई कि क्षेत्र में तमंचा लिए बदमाश घूम रहा है। इसी आधार पर दारोगा ने सोनू की गिरफ्तारी की, मगर उसका नाम-पता बदल दिया गया।

    प्राथमिकी में उसका नाम सोहनलाल उर्फ सूजल, निवासी करावल, उत्तर-पूर्वी दिल्ली लिखा गया था। बताया जाता है कि इस खेल का सौदा 15 लाख रुपये में तय हुआ था। इसमें 10 लाख रुपये दे दिए गए, पांच लाख बाद में दिए जाने थे। इस बीच गाजियाबाद पुलिस को पता चला कि उनके क्षेत्र के इनामी हत्यारोपित सोनू को हल्की धाराओं में बिनावर थाने का दारोगा जेल भेज चुका।

    गाजियाबाद के पुलिस अधिकारियों ने इसकी जानकारी एडीजी ला एंड आर्डर को दी, तब जांच बैठी। अब तक बिनावर थाने के इंस्पेक्टर अरिहंत सिद्धार्थ एवं दारोगा बलवीर के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अब जांच अधिकारी मानुष पारिक पता कर रहे कि हत्यारोपित को बचाने के खेल में कौन-कौन शामिल था, आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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