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    पुरा महादेव मंदिर में 'भक्ति भी-प्रकृति भी' थीम पर जीरो वेस्ट शिवरात्रि मेला, बागपत डीएम की अनूठी पहल

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 12:50 PM (IST)

    बागपत की डीएम अस्मिता लाल ने पुरा महादेव मंदिर के शिवरात्रि मेले में चढ़ावे को गोवंशियों के लिए उपयोग करने का फैसला किया है। यह पहल 'भक्ति भी-प्रकृति ...और पढ़ें

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    जहीर हसन, बागपत। श्रावणी मास की शिवरात्रि पर कांवड़ यात्रा को भव्य, दिव्य, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने की कवायद तेज हो गई है। अब डीएम अस्मिता लाल ने शिवरात्रि मेला पर पुरा महादेव मंदिर के चढ़ावे को लेकर बड़ा पवित्र फैसला लिया है।

    लाखों कांवड़ियों द्वारा भगवान को अर्पित किए जाने वाले फल-फूल व दूध एवं शहद आदि गोवंशियों के काम आएगा। इससे न केवल जीरो वेस्ट का सपना सकार होगा, बल्कि आस्था के संग गोसेवा का पुण्य प्राप्त होगा।

    30 जुलाई से हरिद्वार से लेकर पश्चिम यूपी में शिवभक्त कांवड़ियों का सैलाब उमड़ने लगेगा। अब जिला प्रशासन आठ से 12 जुलाई तक ऐतिहासिक और प्राचीन भगवान श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर पुरा में शिवरात्रि मेले की तैयारी में युद्ध स्तर पर जुटा है।

    न केवल प्रशासन बल्कि सीएम योगी आदित्यनाथ की सर्वोच्च प्राथमिकता में पुरा मेला है। हर साल 25 से 30 लाख शिवभक्त हरिद्वार और गोमुख से पवित्र गंगाजल लाकर पुरा मंदिर में भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करते रहे हैं।

    डीएम ने की पहल

    शिवभक्त न केवल गंगाजल अर्पित करते हैं, बल्कि भांग, दूध, धतूरा, शहद और बेलपत्र एवं फल-फूल अर्पित कर मन्नतें मांगते हैं, लेकिन हर साल यह सामग्री कचरा बनकर बेकार जाती रही। अबकी बार डीएम अस्मिता लाल ने ने ‘भक्ति भी-प्रकृति भी’ थीम पर पुरा के शिवरात्रि मेला को जीरो वेस्ट महोत्सव के रूप में आयोजित कराने की सकारात्मक एवं नवाचार की नई पहल की है।

    मेला प्लास्टिक एवं कचरा मुक्त बनाने के साथ शानदार काम यह होगा कि पुरा में लाखों कांवड़ियों द्वारा भगवान को अर्पित किए जाने वाले फल-फूल, दूध तथा शहद आदि गोवंश के काम आएगा। इसका जिम्मा मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को सौंपा है।

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    सीवीओ डॉ. अरविंद त्रिपाठी ने कहा कि भगवान को अर्पित होने वाली 15-20 लोगों को लगाकर शिवरात्रि मेला में भगवान को जलाभिषेक संग अर्पित की गई सामग्री में भांग-धतूरा अलग कराकर दूध, फूल एवं फल बेलपत्र तथा शहद घुले पानी को पानी को गो आश्रय स्थलों में भिजवाएंगे।

    कचरे से नन्ही कली गुड़िया बनवाएंगे

    भांग-धतूरा से जैविक खाद, फूलों से अगरबत्तिया, पानी की खाली प्लास्टिक की बोतलों से रुई जैसे बारीक रेशे बनवाकर गत साल की तरह बच्चों के लिए नन्ही कली गुड़िया बनवाएंगे। प्लास्टिक चप्पलों से पिछले साल की तरह स्कूली बच्चों के बैठने के लिए मैट तैयार कराएंगे। जलाभिषेक के बाद गर्भगृह से निकलने वाला जल पाइप लाइन के जरिए पास में ही हिंडन नदी में जाकर समा जाता है।

    इससे पूजा के बाद लाखों की सामग्री का सदुपयोग होने से गोवंश का चारा स्वादिष्ट एवं पौष्टिक होगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

    पुरा मंदिर पर मेला भक्ति भी-प्रकृति भी थीम पर जीरो वेस्ट महोत्सव के रूप में आयोजित होगा। भगवान को अर्पित के बाद दूध, फल-फूल सामग्री गोवंशियों के काम आएगी। इन्हें इकट्ठा कराकर गो आश्रय स्थलों में भिजवाया जाएगा।

    -अस्मिता लाल, जिलाधिकारी बागपत।

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