24 साल का साथ, नम आंखें और ढोल-नगाड़े: बागपत में निकली गाय की अनोखी शवयात्रा, रो पड़ा पूरा गांव
बागपत के मुकुंदपुर गांव में 24 साल तक परिवार का हिस्सा रही गाय 'गोरी' को भावुक विदाई दी गई। ढोल-बाजे और फूलों के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसम ...और पढ़ें
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मुकुंदपुर गांव में गाय गोरी की अंतिम यात्रा में फूल बिखेरती महिलाएं
HighLights
24 साल तक परिवार का हिस्सा रही गाय 'गोरी'।
ढोल-बाजे और फूलों के साथ निकाली गई अंतिम यात्रा।
परिवार ने मां समान माना, खेत में दफनाया गया।
संवाद सूत्र, जागरण, बागपत। मुकुंदपुर गांव में इंसान और पशु के अनोखे रिश्ते की भावुक मिसाल देखने को मिली, जब 24 साल तक परिवार का हिस्सा रही एक गाय गोरी को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
ढोल की गूंज, फूलों की बरसात और नम आंखों के बीच गोरी की अंतिम यात्रा निकाली गई। इसे देखने के लिए पूरे गांव के लोग उमड़ पड़े।
मुकुंदपुर गांव निवासी देवेंद्र शर्मा ने बताया कि गोरी उनके लिए सिर्फ एक गाय नहीं, बल्कि मां के समान थी। वह संकर नस्ल की देसी गाय थी। अधिकतम 12 लीटर तक दूध दिया। उसका 15 बार गर्भाधान हुआ और पांच बछड़े व 10 बछिया को जन्म दिया।
वृद्ध और बीमार होने के कारण वह 13 मार्च को बैठ गई थी जिसके बाद खड़ी नहीं हो पाई। देवेंद्र शर्मा के बेटे अमित शर्मा ने कहा कि गोरी के दूध से उनके परिवार की तीन पीढ़ियां पली-बढ़ीं। गोरी की अर्थी को फूलों और गुब्बारों से सजा कर पूरे गांव में अंतिम यात्रा निकाली गई।
ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर गोरी को श्रद्धांजलि दी। उसके बाद स्वजन ने गोरी को अपने खेत में ले जाकर दफनाया।
देवेंद्र शर्मा ने बताया कि गोरी की तेरहवीं भी विधि-विधान से की जाएगी।
हालांकि अभी तेरहवीं की कोई तारीख निश्चित नहीं की। गोरी के जाने से स्वजन गहरा दुख मान रहे हैं, लेकिन उन्हें यह संतुष्टि है कि उसका वंश उनके रिश्तेदारों एवं आसपास जीवित है। इस दौरान बड़ी संख्या में स्वजन एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।