बागपत में 13 साल बाद शहीद सिपाही राहुल ढाका के हत्यारों को उम्रकैद, मां बोली- कातिलों को होनी चाहिए थी फांसी
बागपत में 13 साल बाद शहीद सिपाही राहुल ढाका के दो हत्यारों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जिस पर उनकी 75 वर्षीय मां ने कहा कि 'बुरे काम का बुरा नतीजा'। ...और पढ़ें

13 साल बाद शहीद सिपाही राहुल ढाका के हत्यारों को उम्रकैद।
HighLights
शहीद सिपाही राहुल ढाका के हत्यारों को उम्रकैद की सजा।
13 साल बाद मिला न्याय, मां ने कहा 'बुरे काम का बुरा नतीजा'।
2013 में सहारनपुर मुठभेड़ में शहीद हुए थे राहुल ढाका।
संवाद सूत्र, चांदीनगर (बागपत)। 13 साल दो माह एक दिन बाद सिपाही राहुल ढाका के दो कातिलों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने की खबर मिलते ही उनकी 75 वर्षीय मां हरबीरी के मुंह से निकला...बुरे काम का बुरा नतीजा। देरी से ही सही, कातिलों को सजा मिल गई। न्याय पालिका पर पूरा भरोसा था, इसका स्वागत करते हैं।
वह कहती हैं कि कातिलों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी। उनकी एक ही इच्छा थी कि बेटे के कातिलों को सजा मिले। पिता चंद्रपाल सिंह ढाका को बेटे के जाने का ऐसा सदमा लगा कि उन्होंने चारपाई पकड़ ली। पांच साल में उनकी भी मौत हो गई थी। मां भी तब से बीमार है।
ग्राम ढिकौली निवासी किसान चंद्रपाल ढाका के सबसे छोटे बेटे राहुल ढाका वर्ष 2011 में यूपी पुलिस में भर्ती हुए थे। पांच जून 2013 को सहारनपुर में मुकीम काला गिरोह से लोहे लेते हुए बलिदानी हो गए थे। उनके बड़े भाई राजेश ढाका का कहना है कि उस समय राहुल की शादी के लिए रिश्ता तय हो गया था, लेकिन शादी की तारीख निर्धारित नहीं हुई थी। इसकी घर में तैयारी चल रही थी।
घटना की जब सूचना मिली, तब परिवार के लोग खेत में कार्य कर रहे थे। यह खबर सुनकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। तहेरे भाई एवं दिली पुलिस के दारोगा अनिल ढाका का कहना है कि उनके परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। पुलिस के साथ मिलकर मजबूती से अदालत में पैरवी की गई। न्याय पालिका पर इंसाफ का भरोसा था।
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बड़े भाई को मिली मृतक आश्रित में नौकरी
सिपाही राहुल ढाका के बलिदानी होने पर उनके बड़े भाई मनोज ढाका को यूपी पुलिस विभाग में मृतक आश्रित कोटे पर चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति मिली थी, वह बागपत में तैनात है।
इंसाफ की आस में गुजर गए 13 साल
इंसाफ के इंतजार में 13 साल गुजर गए। उनके पिता चंद्रपाल ढाका की 10 मार्च 2019 को मृत्यु हो गई थी। उनकी बुजुर्ग माता हरबीरी, बड़ी बहन सुनीता व दो भाई राजेश ढाका व मनोज ढाका हैं। उन्हें न्याय पालिका व सरकार पर पूरा भरोसा था।
राहुल ढाका के ताऊ राजपाल ढाका सेना में थे, जिन्होंने 1962 और 1971 की लड़ाई लड़ी थी। राहुल के चाचा वेदपाल सिंह पुलिस विभाग में थे और राहुल के तहेरे भाई अनिल ढाका दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं।
बहुत होनहार थे बलिदानी राहुल ढाका
जिला जाट सभा के अध्यक्ष एडवोकेट सोमेंद्र ढाका, समाजसेवी ओमवीर ढाका, अनुज ढाका आदि का कहना है कि उनके गांव का लाल राहुल ढाका बहुत ही होनहार और बहादुर था। उनके कातिलों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाकर परिवार को इंसाफ दिलाया है।