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    संभल में अयोध्या का नाम लेकर लोगों को भड़काया, वजूखाने की गढ़ी झूठी कहानी; जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 12:21 AM (GMT+05:30)

    न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में संभल हिंसा को पूर्व नियोजित बताया गया है। इसमें जामा मस्जिद के अध्यक्ष और सांसद पर अयोध्या का नाम लेकर भीड़ को भड़काने और ...और पढ़ें

    संभल में अयोध्या का नाम लेकर लोगों को भड़काया।

    संभल में अयोध्या का नाम लेकर लोगों को भड़काया।

    HighLights

    1. न्यायिक रिपोर्ट में संभल हिंसा को पूर्व नियोजित बताया गया।

    2. जामा मस्जिद अध्यक्ष, सांसद पर भीड़ भड़काने का आरोप।

    3. वजूखाने के पानी की झूठी कहानी गढ़ी गई।

    जागरण संवाददाता, संभल। विधान सभा में प्रस्तुत न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में 24 नवंबर 2024 की संभल हिंसा को पूर्व नियोजित बताते हुए जामा मस्जिद इंतजामिया समिति के अध्यक्ष जफर अली, सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सुहेल इकबाल, कासिम जमाल, मशहूद अली फारुकी और अन्य सदस्यों के तर्क ‘भीड़ केवल दोबारा हो रहे सर्वे का कारण जानने जुटी थी’ को भ्रामक माना। वजूखाने का पानी निकलने से हिंसक होने की बात भी रिपोर्ट से सिरे से नकार दी।

    रिपोर्ट के अनुसार जामा मस्जिद के सदर जफर अली और सपा सांसद जियाउर्रहमान ने लाउडस्पीकर से नारेबाजी कर भीड़ को उत्तेजित किया। इसके लिए ‘ जैसे अयोध्या में हमारी मस्जिद छीनी गई, वैसे ही इसे नहीं छिनने देंगे।’

    आयोग ने उल्लेख किया कि वह मस्जिद की छत से भीड़ की ओर हाथ हिलाते और मुस्कुराते दिखाई दिए, जिसे रिपोर्ट में भीड़ के लिए संकेत जैसा व्यवहार माना गया। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि जफर अली ने गुटखा मंगाने के बहाने मस्जिद से बाहर जाने की बात कही थी, जबकि किसी गवाह ने उस समय आसपास की दुकानें खुली होने की पुष्टि नहीं की। आयोग ने इसे भी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी माना।

    रिपोर्ट के अनुसार 19 नवंबर को सर्वे में बाधा, एडवोकेट कमिश्नर रमेश सिंह राघव पर दबाव, 21 नवंबर की रात वाट्सएप संदेशों से बड़ी संख्या में लोगों को जामा मस्जिद बुलाना और 22 नवंबर को सांसद का उत्तेजक संबोधन, ये सभी घटनाएं मिलकर इस निष्कर्ष की ओर संकेत करती हैं कि हिंसा पूर्व नियोजित षड्यंत्र का परिणाम थी।

    खास बात यह है कि न्यायिक कमेटी ने पूर्व के प्रसिद्ध इतिहासकारों के हवाले से 1526 में बाबर के आदेश पर जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर के खंडहरों पर बनाने का जिक्र है। इससे पहले चंदौसी में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आदेश पर 19 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद का सर्वे शुरू हुआ था।

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    एडवोकेट कमिश्नर ने दो जनवरी 2025 को कोर्ट में ही रिपोर्ट जमा की। इसमें बताया कि जांच में हरिहर मंदिर होने के लिए बौतर साक्ष्य कमल के फूल, बरगद, पुष्प अलंकरण, कुआं व अन्य संरचनात्मक ढांचे का ब्योरा अपनी रिपोर्ट में दिया था।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट कोर्ट में दूसरा पक्ष पहुंचने के बाद रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के बयान में भी वजूखाने के पानी की कहानी बनाकर हिंसा भड़काने का जिक्र किया गया है।

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