यमुना खादर जमीन विवाद: हाई कोर्ट के आदेश पर यूपी-हरियाणा के किसानों को 13 अगस्त को सुनवाई के लिए नोटिस जारी
नायब तहसीलदार मोनिका यादव ने हाईकोर्ट के आदेश पर बागपत और सोनीपत के किसानों को 13 अगस्त को यमुना खादर भूमि विवाद की सुनवाई के लिए तलब किया है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
बागपत नायब तहसीलदार 13 अगस्त को करेगी भूमि विवाद की सुनवाई।
किसानों को 8 अगस्त तक जमा करने होंगे लिखित कथन और साक्ष्य।
दीक्षित अवार्ड 1983 के आधार पर होगा जमीन का फैसला।
जागरण संवाददाता, बागपत। हाईकोर्ट के आदेश पर बागपत की नायब तहसीलदार सर्वे मोनिका यादव ने बागपत के मवीकलां तथा सोनीपत के भैरा-बाकीपुर व बसंतपुर गांवों के किसानों को नोटिस जारी कर 13 अगस्त को सुनवाई के लिए तलब किए हैं।
किसानों को आठ अगस्त तक अपना लिखित कथन, आपत्तियां, अभलेख, साक्ष्य आदि उनके कार्यालय में जमा कराने का निर्देश दिया गया है। नायब तहसीलदार ने कहा कि सुनवाई का यह अंतिम अवसर होगा। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हरियाणा के किसानों के नाम जमीन दर्ज करने पर फैसला लिया जाएगा।
बागपत के मवीकलां तथा सोनीपत के भैरा-बाकीपुर और बसंतपुर गांवों के किसानों के बीच यमुना खादर में जमीन का विवाद लंबे समय से चल रहा है। वर्ष 1983 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री उमा शंकर दीक्षित की अध्यक्षता में दीक्षित अवार्ड गठित हुआ था।
दीक्षित अवॉर्ड ने फैसला दिया था कि 1974-75 में जिसके नाम जो जमीन थी वह जमीन उसी किसान की रहेगी। यदि हरियाणा के किसानों की जमीन बागपत की ओर आई तो यहां के राजस्व रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज किया जाएगा।
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इसी तरह बागपत के किसानों का नाम सोनीपत के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। इस मामले को लेकर भैरा-बाकीपुर व बसंतपुर के किसानों ने अपना नाम दर्ज नहीं होने पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद में रिट दायर की थी। हाइकोर्ट के आदेश पर अब उत्तर प्रदेश का सर्वे विभाग सुनवाई कर मामले का निस्तारण कराने की कवायद में जुटा है।