अब सात समंदर पार भी पहुंचेगी देसी माटी की पहचान, पोर्टल पर अपलोड हुआ 155 गांवों की धरोहर और विरासत का ब्योरा
बहराइच में 'मेरा गांव-मेरी धरोहर' योजना के तहत 155 गांवों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इससे देश-विदेश के लोग धरोहर ...और पढ़ें

अब सात समंदर पार भी पहुंचेगी देसी माटी की पहचान।

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जागरण संवाददाता, बहराइच। गांवों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के उद्देश्य से ''मेरा गांव-मेरी धरोहर'' योजना शुरू की गई है। अब तक जिले में 155 गांवों के मंदिर और पर्यटन स्थलों को इस पर अपलोड किया जा चुका है।
अब सात समंदर पार से भी लोग अपनी लोक संस्कृति, गांव, माटी, मेला और स्थलों को जान सकेंगे जिला प्रशासन के अनुसार, योजना के तहत गांवों के प्राचीन मंदिरों, लोककला, पारंपरिक खेती पद्धति और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्थलों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा।
इसके लिए राजस्व, पर्यटन और पंचायतीराज विभाग की संयुक्त टीम सर्वे कर रही है। सचिवों द्वारा गांव की विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर अपलोड किया जा रहा है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में होम स्टे, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा। इससे युवाओं को गांव में ही रोजगार के अवसर मिल सकेंगे और ग्रामीण अंचल पर्यटन मानचित्र पर उभरेंगे।

''मेरा गांव मेरी धरोहर पोर्टल पर दर्ज होने के बाद इन स्थलों की विस्तृत जानकारी देश-विदेश के पर्यटकों को उपलब्ध हो सकेगी। योजना के तहत गांव के प्रसिद्ध मंदिर, मेले, तालाब, प्राचीन स्थल और अन्य धरोहरों को पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। केंद्र सरकार की इस पहल का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
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चित्तौरा गांव स्थित झील, बौंड़ी गांव का किला, बड़नापुर का किला, कारीकोट मंदिर, कौड़ियाला नदी, गुल्लाबीर मंदिर, टेढ़ी नदी, मंगलीनाथ मंदिर समेत जिले के कई अन्य मंदिर व पौराणिक स्थल जिले में हैं।
मेरी गांव मेरी धरोहर योजना के लिए गांवों की धरोहर और विरासत का सर्वे कर पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। अब तक 155 गांवों का ब्योरा दर्ज हो चुका है। यह प्रक्रिया डिजिटल तरीके से हो रही है। -चंद्रभान सिंह, डीपीआरओ, बहराइच।
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