Banda ने तोड़ा 75 साल का रिकॉर्ड! देश और दुनिया में सबसे गर्म हुआ बुंदेलखंड, औरैया-इटावा भी झुलसे
बुंदेलखंड के बांदा में भीषण गर्मी ने 75 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, सोमवार को तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह शहर अब देश और दुनिया के स ...और पढ़ें

भीषण गर्मी में जाते बुजुर्ग। जागरण अर्काइव
HighLights
बांदा में 75 साल का गर्मी का रिकॉर्ड टूटा
सोमवार को तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया
बांदा देश और दुनिया के सबसे गर्म शहरों में शामिल
विमल पांडेय, बांदा। बुंदेलखंड के बांदा में भीषण गर्मी का कहर जारी है। सोमवार को अधिकतम तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो मंगलवार को भी लगभग 47 डिग्री के आसपास ही है। औरैया, इटावा व फतेहपुर भी इसी स्तर पर हैं। मौसम विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मई महीने में बांदा का 75 साल का नया रिकार्ड है। वर्ष 1951 से अब तक बांदा में इतनी गर्मी कभी नहीं पड़ी थी।
ये था पहले रिकार्ड
पहले का रिकार्ड 47.4 डिग्री था, जो 25 अप्रैल 2026 को व 30 अप्रैल, 2022 को दर्ज किया गया था। अब 0.2 डिग्री बढ़कर नया रिकार्ड बन गया है। बांदा केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश व दुनिया में सबसे गर्म शहरों में शामिल हो गया है।
बिगाड़े प्राकृतिक स्वरूप का नतीजा
जल जमीन और जंगल के बिगाड़े जा रहे प्राकृतिक स्वरूप के बीच अब बांदा भारत ही नही बल्कि दुनिया के उन 10 शहरों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा गर्मी पड़ रही है। आइएमडी (भारत मौसम विज्ञान विभाग) के आंकड़ों की मानें तो दुनिया के सबसे गर्म शहरों की सूची मौसम के अनुसार बदलती रहती है।
ये क्षेत्र सबसे गर्म
भारत में विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार के क्षेत्र, मध्य पूर्व ईरान, कुवैत और उत्तरी अमेरिका के कुछ शहर दुनिया के शीर्ष गर्म स्थानों में शामिल हैं। बांदा में अधिकतम पारा 48 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा चुका है। भारत में गर्म शहर मुरादाबाद, इटावा, बिलासपुर, विदेशी शहरों में कुवैत सिटी (कुवैत), अहवज (ईरान) जैकबाबाद (पाकिस्तान) सैन लुइस रियो कोलोराडो ( मैक्सिको) शहर ऐसे में हैं जहां पारा जून तक 50 के ऊपर पहुंचता है लेकिन मई महीने में सर्वाधिक गर्म शहर बनने के बाद बांदा ने यह रिकार्ड बनाया है।
खबरें और भी
ये जिम्मेदार
बेहिसाब अवैध खनन, लगातार पेड़ों की कटान, पहाड़ों का धीरे- धीरे विलुप्त होना बांदा के इस मौसम के बदलाव का प्रमुख कारण माना जा रहा है। मौसम विशेषज्ञ डा. एसएन सुनील पांडेय बताते हैं कि बुंदेलखंड समुद्र से दूर स्थित है, इसलिए यहां समुद्री हवा का असर नहीं पहुंचता। सूखी जमीन तेजी से गर्म होती है और देर तक गर्मी छोड़ती रहती है।
इस वजह से रुक रही ठंडक प्रक्रिया
बुंदेलखंड की पथरीली चट्टानें व नमी विहीन मिट्टी सूर्य की ऊष्मा को तेजी से सोख रही हैं। मिट्टी में नमी कम होने से प्राकृतिक ठंडक की प्रक्रिया भी रुक गई है। उधर, राजस्थान व पाकिस्तान के थार मरुस्थल से आने वाली गर्म पछुआ हवा हालात और बिगाड़ रही है। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डा. दिनेश साहा ने बताया कि पश्चिम से आने वाली सूखी और गर्म हवा तापमान को बढ़ा रही है। बेलगाम खनन व पहाड़ों की ब्लास्टिंग, सूखी नदियां व चट्टानें भी इसकी वजह हैं।