बांदा में रिश्वतखोर लेखपाल को 19 साल बाद मिली सजा, 5 हजार का लगाया गया जुर्माना
बांदा में 19 साल पुराने रिश्वत मामले में तत्कालीन लेखपाल दयाराम वर्मा को तीन साल के कठोर कारावास और 5000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह सजा रिव ...और पढ़ें

HighLights
लेखपाल को रिवाल्वर लाइसेंस के लिए रिश्वत मांगने पर सजा।
19 साल पुराने मामले में तीन साल का कठोर कारावास।
दोषी लेखपाल दयाराम वर्मा पर 5000 रुपये का अर्थदंड।
जागरण संवाददाता, बांदा। रिवाल्वर लाइसेंस के प्रार्थना पत्र पर मांगी गई रिपोर्ट लगाने में रिश्वत मांगने पर दोषी लेखपाल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम चंद्रपाल द्वितीय की अदालत ने शनिवार को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अन्य धाराओं में सजा सहित 5000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड की अदायगी न करने पर अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त कारावास काटना होगा। घटना के 19 साल बाद न्यायालय का फैसला आया है। जिसमें नौ गवाह पेश किए गए हैं।
हमीरपुर जिले के थाना कोतवाली नगर क्षेत्र कलौलीतीर निवासी अभय कुमार तिवारी ने पुलिस अधीक्षक भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम संगठन झांसी को 20 जून 2007 को शिकायती पत्र दिया था। जिसमें पीड़ित ने बताया था कि उसके रिवाल्वर के लाइसेंस के प्रार्थना पत्र पर तत्कालीन हल्का लेखपाल कलौलीतीर दयाराम वर्मा निवासी डिग्गी थाना कोतवाली नगर जनपद हमीरपुर ने 2000 रुपये की रिश्वत रिर्पोट लगाने के बदले मांगी है।
काफी निवेदन करने के बाद आरोपित लेखपाल ने 1000 रुपये पहले व 1000 रुपये बाद में लेने की बात तय हुई है। शिकायती जांच के बाद 22 जून 2007 को समय सवा 12 बजे दिन में हल्का लेखपाल को 1000 रुपये की रिश्वत लेने के साथ एंटी करप्शन टीम ने गिरफ्तार किया और उसे जेल भेज दिया। ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी आनंद प्रिय मौर्य ने बताया कि तत्कालीन विवेचक इंस्पेक्टर दिनेश शंकर पांडेय ने विवेचना करके मामले का आरोप पत्र 14 अगस्त 2007 को न्यायालय में पेश किया।
दोषी के विरुद्ध 18 दिसंबर 2008 को आरोप तय किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से गवाह पेश किए गए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों व बचाव पक्ष के अधिवक्ता व अभियोजन अधिकारी की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने तत्कालीन लेखपाल दयाराम वर्मा को दोषी पाकर सजा व जुर्माने से दंडित किया।