होली पर चेहरे की रंगत बिगाड़ देंगे ये नकली रंग, खरीदने से पहले 1 मिनट में ऐसे करें असली-नकली की पहचान
होली पर केमिकल रंगों के खतरों के प्रति आगाह किया गया है, जो त्वचा और आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेख में बताया गया है कि हर्बल रंगों की आड़ ...और पढ़ें

सावधानी के साथ मनाएं होली - एआई जनरेटेड तस्वीर
HighLights
केमिकल रंग त्वचा और आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।
नकली हर्बल रंगों की पहचान करना सीखें।
सुरक्षित होली के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें।
जागरण संवाददाता, बांदा। सेहत के प्रति सचेत लोगों ने होली में हर्बल रंगों का इस्तेमाल शुरू कर दिया पर अभी भी बड़ी संख्या में लोग केमिकल रंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं। मानव जीवन पर्यावरण के लिए घातक इन रंगों का हर्बल रंगों के मुकाबले कारोबार करीब डेढ़ हजार किलोग्राम से अधिक है।
हानिकारक होने के बाद भी प्रशासन इसकी बिक्री पर लगाम नहीं लग पा रही है। केमिकलयुक्त रंगों से त्वचा समेत विभिन्न प्रकार की बीमारियों का जन्म हो जाता है। कभी आंख या कान में गया तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है।
होली की हुडदंग ज्यादातर लोगों को पसंद आती है। इस दिन होली में रंग न बरसे ऐसा संभव नहीं है। हर ओर रंग अबीर गुलाल नजर आता है। होली में बिना रंगों की होली की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। रंगों में जब केमिकलयुक्त रंगों की बात आती है ताे हर कोई रंग अबीर गुलाल से बचना चाहता है।
दरअसल यह केमिकलयुक्त रंग इतने खतरनाक होते हैं कि यदि किसी आंखों में लग जाए तो रोशनी को छीन सकते हैं। किसी के चेहरे को बदसूरत भी बना सकता है। इसलिए हो सके तो होली पर केमिकल रहित रंगों का प्रयोग करना चाहिये।
अगर केमिकल वाले रंगो का इस्तेमाल करें भी तो सावधानी से करें ताकि आपकी वजह से किसी के जीवन में अंधेरा न हो जाए। होली का रंग आप के चेहरे का नूर बिगाड़ सकता है। होली के रंग को खरीदने से पहले इसकी परख कर लें।
खबरें और भी
-1772103046514.jpg)
हर्बल रंग की आड़ में बिक रहा नकली केमिकलयुक्त रंग
होली पर चारों ओर रंग अबीर की दुकानें नजर आने लगी हैं। होली के आने का इंतजार जितनी बेसब्री से लोगों को होता है उससे कहीं ज्यादा इंतजार तो दुकानदाराें को अपने व्यापार को लेकर होता है। होली के समय में रंग का कारोबार करने को लेकर बाजार में होली नकली रंग भी बेचा जाने लगा है। दुकानदार अक्सर हर्बल रंगों के आड़ में नकली रंग बेचते हैं। लिहाजा यह बेहद नुकसानदेय हो सकता है।
ऐसे पहचानें केमिकलयुक्त रंग
- केमिकल युक्त रंगों को पहचानने के लिए रंग को पानी में घोलकर देखें अगर रंग तुरंत पानी में घुल जाता है, तो यह प्राकृतिक रंग हो सकता है। अन्यथा केमिकलयुक्त रंग हो सकता है। इसके अलावा कुछ तरीकों से रंगों की पहचान की जा सकती है।
- हानिकारक रंगों में केरोसिन या किसी अन्य केमिकल की तेज गंध आती है, जबकि प्राकृतिक रंगों में कोई तेज महक नहीं होती।
- ज्यादा चमकीले रंग भी प्राकृतिक नहीं होते हैं, क्योंकि रंगों में चमकीलापन लाने के लिए इसमें ग्लास के पार्टिकल भी मिलाये जाते हैं।
- यदि रंग को छूने पर वह बहुत ज्यादा चिकना या रूखा लगता है, तो आप समझ जाइए कि उसमें सिंथेटिक केमिकल हो सकते हैं।
- बाजार से रंगों को खरीदते समय, पैकेट पर लिखे सामग्री के बारे में जरूर पढ़ें।
- प्राकृतिक रंग हल्दी, चुकंदर, नीम, और अन्य प्राकृतिक चीजों से बनाए गए रंग सुरक्षित होते हैं।
- रंग को अपनी त्वचा पर लगाकर देखें, अगर रंग लगाने के बाद खुजली या जलन होती है, तो वह केमिकल युक्त हो सकता है।
सुरक्षित होली के लिए अपनाएं यह तरीके
प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, बच्चों को केमिकल युक्त रंगों से दूर रखें, होली खेलने के बाद, अपने शरीर को साफ पानी से धो लें, रंगों से होने वाली एलर्जी या अन्य समस्याओं के लिए तुरंत डाक्टर से संपर्क करें। होली के रंगों की चैकिंग को लेकर प्रशासन कतई भी गंभीर नहीं है। एक समय था जब होली हर्बल रंगों से होती थी। लोग घरों में बने रंगों से होली खेलते थे। समय बदला और हर्बल रंगों की जगह केमिकल युक्त रंगों ने ले रखी है।
हो सकते हैं परेशान, ध्यान से करें इस्तेमाल
केमिकलयुक्त रंगों के प्रयोग से अक्सर आंखों की रोशनी जाने व चेहरे खराब होने के केस अस्पतालों में मिलते हैं। केमिकल रंगों से जहां एलर्जी होने की संभावना होती है, वहीं दूसरी तरफ इनके ज्यादा इस्तेमाल से त्वचा से संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं।
मेटेलिक कलर के ज्यादा इस्तेमाल से स्किन कैंसर, एल्यूमिनियम और लौह के मिश्रण युक्त रंग के ज्यादा प्रयोग से किडनी की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। इन दिनों बाजार में होली के रंगों की भरमार है। मुनाफे के चक्कर में हर्बल रंग की आड़ में बाजार में नकली रंग भी मौजूद है। होली के रंगों की चैकिंग को लेकर प्रशासन कतई भी गंभीर नहीं है। प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
स्वयं तैयार कर सकते हैं हर्बल रंग
अगर आप बाजार के केमिकलयुक्त और नकली हर्बल रंगों के प्रयोग से बचना चाहते हैं तो घर पर ही हर्बल रंग तैयार कर सकते हैं। इसके लिए आपकों को कुछ पौधों के पत्तों की जरूरत होगी। हरा रंग बनाने के लिए मेहंदी के पत्तों को सुखाकर पाउडर बना लें।
हल्दी और बेसन को मिलाकर भी एक अच्छा रंग बनाया जा सकता है। गेंदे के फूलों को भी सूखाकर पेस्ट बनाकर प्रयोग किया जा सकता है। लाल चंदन का पाउडर लाल रंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। गुलाब की पंखुड़ियां भी एक अच्छा विकल्प हैं। लाल गुड़हल के फूलों को रातभर पानी में भिगोकर रख दें, सुबह इसे पीसकर लाल रंग के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
होली में यदि आंख में रंग पड़ जाए तो सर्वप्रथम पहले साबुन से अपने हांथ साफ करें, इसके बाद साफ पानी से आंख को साफ करें। यदि उसके बाद भी जलन हो तो किसी अच्छे आंख के चिकित्सक से संपर्क करें। आंख बिल्कुल रगड़े नहीं। -डा.आकाश श्रीवास्तव, वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ, रानी दुर्गावती मेडिकल