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    बाराबंकी में चकबंदी के गांवों में किसानों की नहीं हुई फार्मर रजिस्ट्री, खाद के लिए परेशान हो रहे लोग

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 03:04 PM (IST)

    बाराबंकी के हैदरगढ़ तहसील में चकबंदी के कारण किसानों को फार्मर रजिस्ट्री नहीं मिल पा रही है। इससे उन्हें खाद, बीज और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रह ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

    HighLights

    1. चकबंदी के कारण किसानों को फार्मर रजिस्ट्री नहीं मिल रही।

    2. सरकारी केंद्रों से खाद-बीज और योजनाओं का लाभ बाधित।

    3. किसान महंगे दामों पर निजी दुकानों से खाद खरीदने को मजबूर।

    संवाद सूत्र, हैदरगढ़ ग्रामीण (बाराबंकी)। हैदरगढ़ तहसील के 12 ग्राम पंचायतों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी न होने से राजस्व परिषद से संबंधित गांवों की खतौनी निकाले जाने पर प्रतिबंध लगा है। साथ ही सभी गांवों में फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पा रही।

    यही वजह है कि बिना फार्मर रजिस्ट्री के किसानों को खाद, सरकारी कर केंदों पर बीज नहीं मिल पा रहे। और तो और यहां के किसान सरकारी दर पर अपने कृषि उत्पाद भी नहीं बेच पा रहे और समर्थन मूल्य के लाभ से वंचित हो रहे हैं। सरकारी बीज भंडारों पर छूट पर बीज व कृषि यंत्र किसान सम्मान निधि जैसी अहम सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है।

    रानीखेर मजरे लाही निवासी किसान राम अचल ने बताया कि चकबंदी की वजह से फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पाई। साधन सहकारी समिति पोखरा पर खाद नहीं दी गई। निजी दुकानदार 430 रुपये यूरिया और दो पैकेट जिंक और दो पैकेट सल्फर भी खरीदना पड़ा।

    टिकरा के अयोध्या नाथ शुक्ला, कैलाश नाथ शुक्ला, केदारनाथ शुक्ला भी निजी दुकानों से खाद ले रहे हैं। गेहूं, धान भी औने पौने में बेचने को मजबूर होते। किसान नेता विश्राम राज पासी ने बताया कि बगैर फार्मर रजिस्ट्री खाद केंद्रों से उपल्बध करवाई जाए।

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    चकबंदी लेखपाल अंकित सिंह ने बताया कि ग्राम दौलतपुर, कान्हीपुर, तेजवापुर, बिजौली,सहावर, लाही, बबुआ पुर, जासेपुर, पैकौली, पलौली, शरीफाबाद में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है यहां के किसानों को खाद की जरूरत पड़ने पर हाथ से खतौनी बनाकर हिस्सा प्रमाणित करके दिया जाता है, ताकि वह सहकारी समिति पर खतौनी दिखाकर खाद ले सकें।

    किसान यूनियन के राष्ट्रीयता वादी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर रामचंद्र सिंह का कहना है कि एक गरीब किसान को एक बोरी खाद लेना है तो वह पहले लेखपाल को ढूंढे। कभी-कभार कई दिनों तक चक्कर काटने पर लेखपाल नहीं मिलते।

    जब लेखपाल मिले तो बिना रुपये लिए खतौनी के हिस्सा का प्रमाण पत्र नहीं मिल पाता। परेशान होकर किसान निजी दुकानों पर महंगे दामों पर खाद व साथ में जिंक सल्फर ले रहे हैं। चकबंदी वाले गांवों के किसानों के लिए कोई सरल उपाय से खाद के लिए दिए मांग पत्र पर सुनवाई नहीं हुई।

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