ग्लोबल बाजार में धूम मचाएगा बाराबंकी का सरसों का शहद, न्यूजीलैंड के वैज्ञानिक करेंगे अध्ययन
बाराबंकी का सरसों का शहद अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने की ओर अग्रसर है, न्यूजीलैंड के वैज्ञानिक इसकी गुणवत्ता और औषधीय गुणों का अध्ययन करेंगे। ...और पढ़ें

न्यूजीलैंड में मनुका के खेत में मधुमक्खी पालन के लिए रखे बाक्स को देखते निमित्त सिंह
HighLights
न्यूजीलैंड वैज्ञानिक करेंगे बाराबंकी के सरसों शहद पर शोध।
गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने पर 15-20 हजार/किलो कीमत।
पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड समझौते को पुख्ता किया।
दीपक मिश्रा, बाराबंकी। सरसों का शहद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। न्यूजीलैंड के विज्ञानी बाराबंकी से भेजे जाने वाले सरसों के शहद की गुणवत्ता, पोषक तत्वों और औषधीय गुणों का अध्ययन करेंगे। यदि यह शहद उनके मानकों पर खरा उतरा तो न्यूजीलैंड न केवल यहां आधुनिक तकनीक से मधुमक्खी पालन विकसित करेगा, बल्कि किसानों से 15 से 20 हजार रुपये प्रति किलो तक की दर से शहद खरीदने की भी तैयारी है। पीएम मोदी ने शनिवार को न्यूजीलैंड से इस समझौते को पुख्ता कर दिया है।
बाराबंकी का सरसों का शहद अब न्यूजीलैंड की प्रयोगशालाओं में शोध का विषय बनेगा। वहां के विज्ञानी शहद में कार्बोहाइड्रेट (शुगर), नमी, विटामिन, खनिज तत्व और एंटीआक्सीडेंट की मात्रा का परीक्षण करेंगे। यह भी परखा जाएगा कि न्यूजीलैंड के विश्व प्रसिद्ध मनुका शहद और बाराबंकी के सरसों के शहद में क्या समानताएं और क्या अंतर हैं।
15 से 20 हजार रुपये प्रति किलो होगी कीमत
यदि शोध में यह साबित होता है कि सरसों का शहद स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यधिक लाभकारी है और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है, तो न्यूजीलैंड की ओर से चयनित बाराबंकी और असम में अपनी तकनीक से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देगा। इतना ही नहीं, किसानों से तैयार शहद 15 से 20 हजार रुपये प्रति किलो तक की कीमत पर खरीदेगा।
वर्तमान में न्यूजीलैंड का मनुका शहद अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 60 हजार रुपये प्रति किलो तक बिकता है। जून माह में आयोजित न्यूजीलैंड-इंडिया एंटरप्रेन्योरशिप इनिशिएटिव कार्यक्रम हुआ। भारत के 10 प्रमुख एग्री-बिजनेस लीडरों ने प्रतिभाग किया था। इनमें बाराबंकी के फतेहपुर के रजौली गांव निवासी मधुमक्खी पालक निमित्त सिंह, मुंबई के स्टार्टअप विशेषज्ञ स्वप्निल जाधव, हरियाणा की कृषि सलाहकार हिमानी पडालिया, बिहार के प्रभात कुमार, कोलकाता की अमृता मुखर्जी गांगुली और असम के जय सिंह शामिल थे।
कार्यक्रम से लौटने के बाद निमित्त सिंह अब एशिया न्यूजीलैंड फाउंडेशन के सहयोग से बाराबंकी का सरसों का शहद न्यूजीलैंड अगले माह जांच के लिए भेजेंगे। वहां विज्ञानी परीक्षण के आधार पर यह तय करेंगे कि भारतीय सरसों का शहद मनुका शहद के मुकाबले किस स्तर का है और उसके कौन-कौन से औषधीय गुण वैश्विक बाजार में नई पहचान बना सकते हैं।
क्या है मनुका
मधुमक्खी पालक निमित्त सिंह ने बताया कि मनुका शहद, मनुका फूल से मधुमक्खियों के माध्यम से बनाया जाता है। शहद में मिथाइलग्लाय आक्सल (एमजी) की मात्रा अधिक होती है। इस शहद के सेवन से छोटे-छोटे घाव अपने आप भर जाते हैं। शहद त्वचा रक्षक माना जाता है।