अब एक क्लिक पर मिलेगा जमीन का पूरा विवरण, हर भूखंड के लिए जारी होगा 14 अंकों का भू-आधार नंबर
केंद्र सरकार ने जमीन के रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाने और विवाद कम करने के लिए 14 अंकों का यूनिक भू-आधार नंबर लागू किया है। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले ...और पढ़ें

एक क्लिक पर मिलेगा जमीन का पूरा विवरण। AI जेनरेटेड फोटो
HighLights
हर भूखंड को मिलेगा 14 अंकों का यूनिक भू-आधार नंबर।
बाराबंकी का लिखना गांव बना पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा।
डिजिटल व्यवस्था से जमीन विवाद और धोखाधड़ी पर लगेगी रोक।
संवाद सूत्र, बाराबंकी। जमीन के रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाने और गांवों में विवाद कम करने के लिए केंद्र सरकार ने नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर दी है। हर भूखंड को 14 अंकों का यूनिक भू-आधार नंबर मिलेगा।
उत्तर प्रदेश में इस व्यवस्था के परीक्षण के लिए बाराबंकी के फतेहपुर ब्लाक के लिखना गांव का चयन किया गया है। ऑनलाइन मैपिंग के आदेश हो चुके हैं।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग की ‘लैंड स्टैक’ योजना के तहत जमीन से जुड़ी सभी जानकारियां एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएंगी। अभी तक जमीन का नक्शा, खतौनी और अन्य अभिलेख अलग-अलग स्थानों पर उपलब्ध होते हैं, लेकिन नई व्यवस्था में यह सभी जानकारी एक साथ जुड़ जाएंगी।
सर्वे पूरा होने के बाद प्रत्येक भूखंड को 14 अंकों का स्थायी भू-आधार नंबर दिया जाएगा। इस नंबर के माध्यम से जमीन का स्वामी कौन है, उसकी सीमा कहां तक है, नक्शा क्या है, भूमि का उपयोग किस काम में हो रहा है और आसपास किन लोगों की जमीन है, जैसी जानकारी कुछ ही सेकेंड में देखी जा सकेंगी।
डिजिटल व्यवस्था से जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया भी अधिक सुरक्षित होगी। फर्जी बैनामा, रिकॉर्ड में हेराफेरी, एक ही जमीन को कई लोगों को बेचने और सीमांकन से जुड़े विवादों पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है। लोगों को बार-बार तहसील और राजस्व कार्यालयों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे।
योजना के तहत महिला और पुरुष स्वामित्व का अलग-अलग डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा। इससे सरकार को भूमि स्वामित्व से जुड़े सटीक आंकड़े मिलेंगे।
निगरानी के लिए लखनऊ में राजस्व परिषद के कार्यालय में कंप्यूटर सेल गठित कर दी गई है। अपर मुख्य सचिव (नियोजन) को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी बनाया गया है, जबकि राजस्व परिषद और स्टांप एवं पंजीयन विभाग के सचिव उप नोडल अधिकारी होंगे। सर्वे ऑनलाइन जीआईएस (जियोग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम) तकनीक आधारित होगा। इसके लिए लखनऊ से तकनीकी टीम गठित की गई है।
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राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा के आदेश पर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अपर जिलाधिकारी निरंकार सिंह ने बताया कि बाराबंकी के लिखना गांव को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। सर्वे के लिए तैयारी चल रही है।